40 लाख बकाया मांगने पर व्यापारीपरहमला:कानून-व्यवस्था और औद्योगिक नैतिकता पर गंभीर सवाल

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रूद्रपुर के सिडकुल पंतनगर क्षेत्र से सामने आया डैकेन हेल्थकेयर लिमिटेड से जुड़ा मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि उत्तराखंड के औद्योगिक माहौल और कारोबारी नैतिकता पर गहरा प्रश्नचिह्न है। वर्ष 2013 से दवाई फॉइल प्रिंटिंग का वैध व्यवसाय करने वाले व्यापारी धनन्जय सर्राफ के साथ 40 लाख रुपये से अधिक की बकाया राशि मांगने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी दिए जाने के आरोप चिंताजनक हैं।
यह मामला दर्शाता है कि कैसे कुछ प्रभावशाली औद्योगिक घराने छोटे और मध्यम व्यापारियों को वर्षों तक भुगतान न देकर आर्थिक रूप से तोड़ते हैं, और जब पीड़ित अपना वैध हक मांगने जाता है तो उसे हिंसा और धमकी का सामना करना पड़ता है। वर्ष 2019 के बाद से भुगतान रोकना और 2025 तक 40 लाख रुपये से अधिक का बकाया जमा हो जाना, अपने आप में कंपनी की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


सबसे गंभीर पहलू यह है कि कथित तौर पर कंपनी के मालिक और उनके सहयोगियों ने कानून का भय छोड़े बिना खुलेआम मारपीट और जान से मारने की धमकी दी। यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्र अब सुरक्षित नहीं रहे? क्या यहां कारोबार करने वाले छोटे उद्यमी अपने ही साझेदारों से असुरक्षित हैं?
उत्तराखंड सरकार एक ओर निवेश, उद्योग और “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामले सामने आना इस दावे को कमजोर करता है। यदि बकाया भुगतान मांगना अपराध बन जाए और पीड़ित को ही जान बचाने के लिए पुलिस की शरण लेनी पड़े, तो यह राज्य के औद्योगिक भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।
पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करना सही दिशा में कदम है, लेकिन केवल एफआईआर पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि मामले की निष्पक्ष, तेज और कठोर जांच हो, दोषियों को कानून के तहत सख्त सजा मिले और पीड़ित को उसकी बकाया राशि दिलाई जाए। साथ ही सिडकुल प्रशासन और उद्योग विभाग को भी यह देखना होगा कि कहीं ऐसे उद्योगों को संरक्षण तो नहीं मिल रहा, जो अपने व्यावसायिक दायित्वों से बचते हुए दबंगई पर उतर आते हैं।
यह प्रकरण पूरे औद्योगिक समाज के लिए चेतावनी है कि व्यापार विश्वास और नियमों पर चलता है, भय और हिंसा पर नहीं। यदि ऐसे मामलों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल छोटे व्यापारियों का भरोसा तोड़ेगा, बल्कि उत्तराखंड की औद्योगिक छवि को भी गंभीर नुकसान पहुंचाएगा।


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