उत्तराखंड में सावन का शुभारंभ हरेला लोकपर्व हरेला से माना जाता है। हरेला हरियाली, प्रकृति, समृद्धि और शिवभक्ति का पावन प्रतीक है। इस पर्व के साथ देवभूमि का जनमानस भगवान भोलेनाथ की आराधना में लीन हो जाता है और पूरे सावन माह में आस्था, संस्कृति तथा प्रकृति संरक्षण का संदेश घर-घर तक पहुँचता है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
सावन का प्रथम शनिवार अपने साथ भक्ति, श्रद्धा, आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश लेकर आया। उत्तराखंड की देवभूमि में सावन जब प्रत्येक शिवालय “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठता है, जब श्रद्धालु अपने आराध्य भगवान शिव के चरणों में जल, बेलपत्र, धतूरा और अपनी अटूट आस्था अर्पित करते हैं।
इसी पावन अवसर पर आज रुद्रपुर के आवास विकास स्थित शिव शक्ति मंदिर में परिवार सहित भगवान भोलेनाथ के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही घंटियों की मधुर ध्वनि, वैदिक मंत्रोच्चार, धूप और अगरबत्ती की सुगंध तथा श्रद्धालुओं के मुख से निकलते “ॐ नमः शिवाय” के मंत्र ने वातावरण को पूरी तरह शिवमय बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं कैलाश की दिव्य अनुभूति धरती पर उतर आई हो।
सावन का महीना सनातन संस्कृति में अत्यंत पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इसी मास में भगवान शिव की आराधना करने से मनुष्य के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस पावन काल में किया गया प्रत्येक पुण्य कार्य अनेक गुना फलदायी माना जाता है। इसलिए देशभर की तरह उत्तराखंड के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ रही है।
आज शिव शक्ति मंदिर में परिवार सहित पूजा-अर्चना करते समय मन में यही भाव था कि भगवान शिव का आशीर्वाद केवल हमारे परिवार पर ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण उत्तराखंड, पूरे देश और समस्त मानव समाज पर बना रहे। देवाधिदेव महादेव सभी के जीवन में सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और सद्बुद्धि प्रदान करें।
आज की पूजा में मेरी अर्धांगिनी श्रीमती बाबू मोहिनी बिष्ट भी साथ रहीं। परिवार के साथ भगवान शिव के समक्ष दीप प्रज्वलित कर जलाभिषेक किया गया और प्रदेश की खुशहाली, समाज की उन्नति तथा मानवता के कल्याण की प्रार्थना की गई। परिवार के साथ मंदिर में बिताए गए ये आध्यात्मिक क्षण जीवन की अमूल्य स्मृतियों में सदैव सुरक्षित रहेंगे।
उत्तराखंड को देवभूमि यूँ ही नहीं कहा जाता। यहाँ का प्रत्येक पर्व, प्रत्येक नदी, प्रत्येक पर्वत और प्रत्येक मंदिर आस्था का जीवंत केंद्र है। हिमालय की गोद में बसे इस प्रदेश की संस्कृति में भगवान शिव का विशेष स्थान है। केदारनाथ धाम से लेकर गाँव-गाँव के छोटे-छोटे शिवालयों तक सावन के महीने में भक्ति का अद्भुत प्रवाह दिखाई देता है। यही हमारी सांस्कृतिक विरासत है, जिसने सदियों से समाज को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाया है।
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥
वन्दे देवम् उमापतिं सुरगुरुं वन्दे जगत्कारणम्।
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं वन्दे पशूनां पतिम्॥
वन्दे सूर्यशशाङ्कवह्निनयनं वन्दे मुकुन्दप्रियम्।
वन्दे भक्तजनाश्रयं च वरदं वन्दे शिवं शङ्करम्॥
ॐ नमः शिवाय।
हर हर महादेव।
सावन हमें संयम, सेवा, करुणा और सादगी का भी संदेश देता है। यह वह समय है जब मनुष्य अपने भीतर झाँकता है, अपने व्यवहार को बेहतर बनाने का संकल्प लेता है और ईश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा को कर्म के माध्यम से व्यक्त करता है। केवल पूजा करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि जीवन में सत्य, ईमानदारी, सेवा और सदाचार को अपनाना भी भगवान शिव की सच्ची आराधना है।
मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं के चेहरों पर अद्भुत शांति दिखाई दे रही थी। कोई परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना कर रहा था, कोई संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए, कोई समाज की शांति के लिए और कोई देश की उन्नति के लिए। यही सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ व्यक्तिगत हित के साथ-साथ लोककल्याण की भावना भी सर्वोपरि रहती है।
भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों की निष्कपट भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। वे भेदभाव से परे हैं। राजा और साधारण व्यक्ति, धनवान और निर्धन, सभी उनके दरबार में समान हैं। यही समानता का संदेश आज भी समाज को नई दिशा देता है।
सावन का महीना प्रकृति के सौंदर्य को भी नई पहचान देता है। चारों ओर हरियाली, शीतल हवाएँ, वर्षा की फुहारें और मिट्टी की सुगंध मन को आनंद से भर देती हैं। प्रकृति का यह अनुपम स्वरूप स्वयं भगवान शिव की सृष्टि का दिव्य रूप है। जब हम प्रकृति का सम्मान करते हैं, तब वास्तव में हम ईश्वर की बनाई इस अद्भुत रचना का सम्मान करते हैं।
आज शिव शक्ति मंदिर में पूजा के दौरान यही प्रार्थना की गई कि उत्तराखंड सदैव अपनी आध्यात्मिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ विश्वभर में प्रेरणा का केंद्र बना रहे। प्रदेश में प्रेम, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द निरंतर मजबूत हो तथा युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहे।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स परिवार की ओर से समस्त उत्तराखंडवासियों, देशवासियों तथा विश्वभर में बसे सनातन धर्मावलंबियों को पावन सावन मास की हार्दिक शुभकामनाएँ। भगवान भोलेनाथ सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, आध्यात्मिक शक्ति और मंगलमय भविष्य का आशीर्वाद प्रदान करें।
हर-हर महादेव।
ॐ नमः शिवाय।
— अवतार सिंह बिष्ट
संपादक, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स
