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“फूलदेई का लोकसंदेश: नन्हे कदमों से खिलती संस्कृति, पर्वतीय समाज में प्रकृति और परंपरा का उत्सव”

रुद्रपुर।उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं का प्रतीक लोकपर्व फूलदेई इस वर्ष…

“जंग की आग में दुनिया: वैश्विक टकराव के बीच अवतार सिंह बिष्ट की विशेष रिपोर्ट” होर्मुज की दहलीज पर खड़ा महायुद्ध: ट्रंप की जिद, ईरान की चुनौती और मध्य-पूर्व में सुलगता संकट”

उत्तराखंड,पश्चिम एशिया एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहाँ से…

देहरादून की कोठी कांड: पुलिस की लापरवाही ने उजाड़ दिया एक परिवार, अब कार्रवाई की संस्तुति”

देहरादून के क्लेमेनटाउन क्षेत्र में वर्ष 2022 में दिनदहाड़े हुई कोठी ध्वस्तीकरण और लूटपाट की…

गैरसैंण का बजट सत्र—उपलब्धियों के दावे और सड़कों पर उतरती जनता के सवाल

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित विधानसभा का बजट सत्र इस बार कई मायनों…

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रुद्रपुर में 16 मार्च को शिवसेना का पैदल मार्च: UGC नियम और जातिगत आरक्षण पर उठे सवालसंपादकीय / विशेष रिपोर्ट – अवतार सिंह बिष्टरुद्रपुर।

फूलदेई पर्व पर पंडित त्रिलोचन पनेरु की ज्योतिषीय व्याख्या, रामदत्त पंचांग का हवालाफूलदेई : उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, प्रकृति और मासूमियत का अनोखा उत्सव

14 March 2026: 14 मार्च की सुबह ब्रह्मांड में एक बड़े बदलाव की गवाह बन रही है. चंद्रदेव का मकर राशि में प्रवेश हमें आलस्य त्यागकर कर्तव्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है.

नजूल की रजिस्ट्री का रास्ता: विधायक शिव अरोड़ा की पहल?नजूल की जमीन से सम्मान तक: रुद्रपुर के गरीबों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल,

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रुद्रपुर में 16 मार्च को शिवसेना का पैदल मार्च: UGC नियम और जातिगत आरक्षण पर उठे सवालसंपादकीय / विशेष रिपोर्ट – अवतार सिंह बिष्टरुद्रपुर।

रुद्रपुर।उधम सिंह नगर में एक बार फिर सामाजिक और शैक्षिक नीतियों को लेकर बहस तेज होने जा रही है। शिवसेना…

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फूलदेई पर्व पर पंडित त्रिलोचन पनेरु की ज्योतिषीय व्याख्या, रामदत्त पंचांग का हवालाफूलदेई : उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, प्रकृति और मासूमियत का अनोखा उत्सव

उत्तराखंड की संस्कृति प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। यहाँ के पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज,…

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14 March 2026: 14 मार्च की सुबह ब्रह्मांड में एक बड़े बदलाव की गवाह बन रही है. चंद्रदेव का मकर राशि में प्रवेश हमें आलस्य त्यागकर कर्तव्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है.

नजूल की रजिस्ट्री का रास्ता: विधायक शिव अरोड़ा की पहल?नजूल की जमीन से सम्मान तक: रुद्रपुर के गरीबों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल,

महिला आयोग आपके द्वार अभियान के तहत उधम सिंह नगर में जनसुनवाई, अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने सुनीं 12 शिकायतें

पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने ब्लॉक प्रमुख रीना गौतम के साथ ग्राम लोहरी गंगापुर में अंबेडकर पार्क का लोकार्पण, बाबा साहब की प्रतिमा का अनावरण किया

“फूलदेई का लोकसंदेश: नन्हे कदमों से खिलती संस्कृति, पर्वतीय समाज में प्रकृति और परंपरा का उत्सव”

रुद्रपुर।उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं का प्रतीक लोकपर्व फूलदेई इस वर्ष भी पूरे प्रदेश में उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों के साथ मनाया गया। कुमाऊं से…

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“जंग की आग में दुनिया: वैश्विक टकराव के बीच अवतार सिंह बिष्ट की विशेष रिपोर्ट” होर्मुज की दहलीज पर खड़ा महायुद्ध: ट्रंप की जिद, ईरान की चुनौती और मध्य-पूर्व में सुलगता संकट”

उत्तराखंड,पश्चिम एशिया एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहाँ से दुनिया का भू-राजनीतिक संतुलन बदल सकता है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव…

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देहरादून की कोठी कांड: पुलिस की लापरवाही ने उजाड़ दिया एक परिवार, अब कार्रवाई की संस्तुति”

देहरादून के क्लेमेनटाउन क्षेत्र में वर्ष 2022 में दिनदहाड़े हुई कोठी ध्वस्तीकरण और लूटपाट की घटना एक बार फिर चर्चा में है। इस प्रकरण में राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने…

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गैरसैंण का बजट सत्र—उपलब्धियों के दावे और सड़कों पर उतरती जनता के सवाल

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित विधानसभा का बजट सत्र इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा। यह सत्र ऐसे समय में आयोजित हुआ…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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आज मेट्रोपोलिस सिटी में फ्लैट नंबर 62 में शकुंतला तड़ियाल ,गिरीश तड़ियाल के घर पर भजन संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें मेट्रोपोलिस ओमेक्स और शहर की अन्य कॉलोनी की महिलाओं ने भजन कीर्तन में प्रतिभाग किया। जिसमें मुख्य रूप से शकुंतला तड़ियाल गिरीश तड़ियाल,मोहिनी बिष्ट, नीलम कांडपाल लता पंत ,विनीत लाखेड़ा, शारदा ढोडीयाल आदि सैकड़ो महिलाएं उपस्थित।दोपहर तक महिलाएं भजन-कीर्तन करती रहीं। इसके बाद प्रसाद बांटा गया। भजन-कीर्तन से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।

श्याम कीर्तन में बही भक्ति की रसधारा… मां दुर्गा और मां काली के चैत्र नवरात्र के चौथा दिन भक्तों की भीड़ शकुंतला के घर मै उमड़ पड़ी। वैदिक मंत्रोचार सहित […]

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ गणेश उपाध्याय ने गन्ना किसानों की बदहाली पर भाजपा सरकार के गन्ना मंत्री पर प्रदेश की जनता के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विगत वर्ष की अपेक्षा इस बार उत्तराखंड में गन्ना की पैदावार 1 लाख 70 हजार क्विंटल कम हुई है। सरकार की उदासीनता, गन्ना मूल्य उचित नहीं देना, समय से भुगतान नहीं होना,

गन्ना पेराई में समस्याओं की वजह से गन्ना किसानों ने गन्ना उत्पादन से दूरी बना ली है। पूरे प्रदेश में वर्तमान में लगभग 200 करोड़ रुपये गन्ने का किसानों का […]

नवरात्र के चौथे दिन ‘कूष्मांडा देवी’ की पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि जब यह सृष्टि अंधकारमय थी तो देवी कूष्मांडा ने ही ब्रह्मांड की रचना की। इसलिए इन्हें सृष्टि की आदि स्वरूपा, आदिशक्ति भी कहते हैं।

शेर मां कूष्मांडा का वाहन है। माता कुष्मांडा की पूजा से भक्तों को मनोबल, आत्मविश्वास और सफलता मिलती है। माता सभी रोगों से मुक्ति, कष्टों का निवारण और मनोकामनाओं की […]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के ऋषिकेश पहुंचे. यहां जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत इतना मजबूत हो चुका है कि वह दुश्मनों के घर में घुसकर मारता है.मोदी मंच पर पहुंचे और देवभूमि को नमन कर अपना संबोधन शुरू किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज मैं बाबा केदार और बदरीनाथ के चरण में हूं। डमरू बजाकर प्रधानमंत्री मोदी ने बाबा केदार का आह्वान किया।संबोधन की शुरुआत करते हुए सीएम धामी ने भाजपा सरकार के काम गिनाए। कहा कि पीएम के द्वारा किए गए कामों से ही आज भारत का विश्व में नाम है। कई ऐसे फैसले लिए गए, जिनको पूरा करने की कोई सोच भी नहीं सकता था। पीएम मोदी उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का काम कर रहे हैं।

मंच से बोले- बाबा केदार का किया आह्वान प्रधानमंत्री मोदी मंच पर पहुंचे और उत्तराखंड की संस्कृति को दर्शाने वाला वाद्ययंत्र हुड़का (डमरू) बजाकर अभिनंदन स्वीकार किया। इस दौरान लोग […]

रूद्रपुर, 10,अप्रैल/ जिला निर्वाचन अधिकारी श्री उदयराज सिंह तथा मुख्य विकास अधिकारी (नोडल अधिकारी स्वीप) श्री मनीष कुमार के निर्देशन में पंतनगर विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा मतदाता जागरूकता हेतु रैली आयोजित की गई। स्वीप टीम के द्वारा छात्र तथा प्रोफेसर हेतु मतदाता जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया तथा सभी को वोटर हेल्पलाइन नं. 1950 व वोटर हेल्पलाइन ऐप के संबंध में जानकारी दी गई।छात्रों के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में रैली निकालकर सभी को मतदान के प्रति जागरूक किया गया तथा 19 अप्रैल को मतदान करने की अपील की गयी।इस अवसर पर सहायक डी0एस0डब्ल्यू0ओ0(पंतनगर वि.वि.) डॉ. सोनिका चौहान, स्वीप टीम से जिला प्रोबेशन अधिकारी व्योमा जैन , पारस, पिंकेश, विश्वविद्यालय के अन्य प्रोफेसर तथा छात्र उपस्थित थे।

रुद्रपुर 11 अप्रैल सूचना विभाग। ज़िला निर्वाचन अधिकारी उदय राज सिंह,मुख्य विकास अधिकारी मनीष कुमार के निर्देशन में पब्लिक स्थान में मतदाता जागरूकता हेतु रूद्रपुर रेलवे स्टेशन पर मतदाता जागरूकता […]

नवरात्रि का तीसरा दिन है. नवरात्रि का तीसरा दिन भय से मुक्ति और अपार साहस प्राप्त करने का होता है. इस दिन मां के ‘चंद्रघंटा’ स्वरूप की उपासना की जाती है.

इनके सर पर घंटे के आकार का चन्द्रमा है. इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. इनके दसों हाथों में अस्त्र-शस्त्र हैं और इनकी मुद्रा युद्ध की मुद्रा है. मां चंद्रघंटा […]

सुन ओ आमा, बुबू, मतदान करी ऊँलां”…, कुमाऊं कमिश्नर आईएएस दीपक रावत का गीत आमजन को मतदान के प्रति कर रहा जागरूक।रिपोर्ट। ललित जोशी/हर्षित जोशी।नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल व पूरे उत्तराखंड में आगामी 19 अप्रैल को होना है । पांचों लोकसभा सीटों पर मतदान। जिसको प्रेरित करने के लिए आयुक्त दीपक रावत ने कुमाऊनी गीत गाकर आम जन मानस को अपने मत दिये जाने के लिए प्रेरित करते हुए पहाड़ी गीत गाकर मतदान किये जाने की अपील की।

यहाँ बता दें।उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर आगामी 19 अप्रैल को मतदान होने जा रहा है। कार्यालय, मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से मतदाता जागरूकता को लेकर निरंतर रूप […]

रूद्रपुर 10 अप्रैल, 2024 (सू.वि.)- जिला निर्वाचन अधिकारी उदयराज सिंह व नोडल कार्मिक मनीष कुमार ने युवा कल्याण भवन में निर्वाचन सामाग्री किट तैयार करने के कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मतदान हेतु प्रत्येक सामाग्री अति महत्वपूर्ण होती है, इसलिए आयोग से प्राप्त सूची के अनुसार ही सभी सामाग्री निर्वाचन किटों मंे रखना सुनिश्चित करें।जिला निर्वाचन अधिकारी ने नोडल अधिकारी निर्वाचन सामाग्री को निर्देश दिये कि सूची से मिलान करते हुये थैले बनाये तथा थैलों को विधानसभावार अलग-अलग रखा जाये। उन्होने कहा विधानसभावार किट बनाते समय यह सुनिश्चित कर लिया जाये कि निर्वाचन नामावली सम्बन्धित मतदेय स्थल की ही हो। उन्होने कहा कि मतदान पार्टियों को मतदान सामाग्री देने से पूर्व भी किट की भली-भांति जांच कर ली जाये ताकि कोई भी सामाग्री छुटने न पाये। उन्होने नोडल निर्वाचन सामाग्री को यह भी निर्देश दिये कि मतदान दिवस से एक दिन पूर्व मतदान पार्टियों को बगवाड़ा मंडी से मतदान हेतु रवाना किया जायेगा, बगवाड़ा मंडी में भी सामाग्री सहित स्टांल लगाया जाये ताकि कोई भी मतदान सामाग्री कम होने पर तत्काल मतदान कार्मिकों को उपलब्ध करायी जा सकंे।इस दौरान नोडल अधिकारी कार्मिक मनीष कुमार, नोडल मतदान सामाग्री भावना जोशी व उनकी टीम उपस्थित थी।

अपीलउत्तराखंड क्रांति दललोकसभा चुनाव 2024सम्मानित मतदाताओं,पुनः एकबार आपके सम्मुख देश की संसद में अपने क्षेत्र की समस्याओं के निदान व मूलभूत सुविधाएं सुलभ करवाने संबंधी विकास की राह सुगम बनाने के लिए अपना सांसद चुनने का अवसर है। उत्तराखंड राज्य के अस्तित्व में आने के बाद पिछले 23 वर्षों में चार बार चुने गये सांसदों ने उत्तराखंड राज्य की मूल अवधारणा के उलट उत्तराखंड को दिल्ली व लखनऊ का उपनिवेश बना कर रख दिया। जिसके दुष्परिणाम के रूप में हमारे मूलभूत अधिकार भी हमसे छीन लिए गये, कभी तो ऐसा लगता है केंद्र सरकार हमसे अलग राज्य मांगने का बदला ले रही है और केंद्र सरकार के छिपे ऐजेण्डे में है कि उत्तराखंडवासियों को इस कदर संसाधन विहीन कर दो ताकि वे यहां से पलायन को विवश हो जायं, विशेष कर पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को। शायद इसीलिए यहां के लोगों का पहले मूलनिवास छीना गया, फिर भू-कानून पूरी तरह समाप्त किया गया,फिर यहां से निकलने वाली नदियों का नैसर्गिक अधिकार छीन कर गंगा-यमुना बोर्ड बना कर हमसे पानी का अधिकार छीना गया,फिर राज्यस्तरीय सेवाओं के लिए राज्य सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण की अनिवार्यता समाप्त की गई यहां तक कि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भी देश-भर से आवेदन अनुमन्य कर दिये गये।हमारा राज्य देश का एकमात्र राज्य है जिसकी 24 वर्षों बाद भी स्थायी राजधानी तय नहीं है, हमारी परिसंपत्तियां अभी तक भी उत्तरप्रदेश कि क़ब्ज़े में हैं, वन अधिनियम व वन्यजीव संरक्षण अधिनियम इतने जटिल कर दिये गये हैं कि हमारे किसानों को अपने खेतों में कृषि कार्य करना तो दूर अपने गांव तक आने जाने से भी रोका जा रहा हैं,(कार्बेट नेशनल पार्क की सीमा से लगे गांव में इसका उदाहरण हैं ) हमारे पढ़े-लिखे युवाओं की नौकरियां पिछले दरवाजे से बाहर के अपात्र लोगों को बेच दी गई हैं जिनमें मुख्यमंत्री कार्यालय, सचिवालय, विधानसभा सचिवालय सहित सभी विभागों की नौकरियां शामिल हैं। खेद की बात है कि नौकरी बेचने वाले गिरोह को मंत्री, विधायकों के अतिरिक्त बहुत गरिमामय पदों पर आसीन मुख्यमंत्रियों व विधानसभा अध्यक्षों का संरक्षण प्राप्त है। सूचना अधिकार से हुए खुलासों से सारी सच्चाई जनता के सम्मुख आ चुकी हैं। महिलाएं गांवों में जंगली जानवरों से व शहरों में नर-पिशाचों से सुरक्षित नहीं हैं। अंकिता भंडारी सहित अनेकों युवतियां ऐसे ही नर-पिशाचों का शिकार हो चुकी हैं। अंकिता के हत्यारों का पता चल जाने के बावजूद उन्हें कठोर सजा दिये जाने की बजाय हत्या व अन्य गुनाहों के सबूत मिटा दिए गए हैं। इसके विपरीत इस जघन्य कांड को सार्वजनिक करने व कानूनी लड़ाई लड़ने वाले पत्रकार व वकील आशुतोष नेगी के साथ तथा इसी तरह UKSSSC/UKPSC भर्ती दरोगा भर्ती व अन्य भर्ती घोटाला को उजागर करने वाले युवा बौबी पंवार को पुलिस द्वारा फर्जी मुकदमों में फंसाकर उनसे साथ मारपीट कर उन्हें जेल में डाला गया और उपरोक्त सभी जुल्मों के खिलाफ सड़क पर आंदोलन करने वाले युवाओं व महिलाओं पर लाठीचार्ज, आंसू गैस व पानी की बौछारें की जा रही हैं।साथियों हमारे प्रत्याशी इस लोकसभा चुनाव में उपरोक्त मुद्दों के अतिरिक्त राज्य की अनेकों समस्याओं को लेकर चुनाव मैदान में है। यदि आपके सहयोग से हमारे प्रत्याशी विजयी होकर देश की संसद में पहुंचेंगे तो हम आपको आश्वस्त करते हैं कि हम निम्न बिंदुओं पर केन्द्र सरकार से तुरन्त समाधान करवायेंगे

1- जनभावनाओं के अनुरूप राज्य की स्थाई राजधानी गैरसैंण घोषित करना।2- देश के संविधान के अनुरूप राज्य में मूलनिवास का आधार वर्ष 1950 निर्धारित करवाना , एक राज्य एक कानून […]

उत्तराखंड के गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब के डेरा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की हत्या के मुख्य आरोपी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सिहोरा निवासी 50 हजार रुपये के इनामी अमरजीत सिंह को उत्तराखंड एसटीएफ ने हरिद्वार पुलिस के साथ संयुक्त मुठभेड़ में मार गिराया।

उत्तराखंड के गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब के डेरा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की हत्या के मुख्य आरोपी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सिहोरा निवासी 50 हजार रुपये के इनामी अमरजीत सिंह […]