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उत्तराखंड,चारधाम यात्रा के लिए व्यावसायिक वाहनों के ग्रीन कार्ड 23 मार्च से बनने शुरू हो जाएंगे। दुर्घटना नियंत्रण के लिए ग्रीन कार्ड बनाने को वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर परिवहन विभाग इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरतने का दावा कर रहा है।

इस साल, चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होने वाली है। इस भव्य त्योहार की शुरुआत पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) की रस्म के साथ होगी। नवरात्रि के उत्सव 27 मार्च को महानवमी के साथ समाप्त होंगे।

18 March 2026: पढ़ें अपना दैनिक राशिफल (Dainik Rashifal) और जानें अपना आज का भविष्य। आज का राशिफल (Daily Horoscope), वैदिक ज्योतिष की गणना पर आधारित है। इस राशिफल (Dainik Rashifal) की मदद से आप यह जान सकते हैं कि आज का दिन आपके लिए कैसा बीतेगा।

हिंदू कैलेंडर में अमावस्या की तिथि का अपना ही एक अलग और गहरा महत्व है। लेकिन, जब बात चैत्र अमावस्या (Chaitra Amavasya 2026) की आती है, तो इसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है।

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नवरात्रि 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. यह पर्व मां दुर्गा की आराधना का प्रतीक है, जिसमें श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर और विधि-विधान से पूजा कर शक्ति की उपासना करते हैं.

वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी.…

19 मार्च, 2026, धार्मिक और ज्योतिषीय, दोनों ही दृष्टिकोणों से एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन होने वाला है। इसका कारण यह है कि इस एक ही दिन कई प्रमुख त्योहार, व्रत और दुर्लभ खगोलीय संयोग एक साथ घटित हो रहे हैं; परिणामस्वरूप, 19 मार्च को ‘सुपर कंजंक्शन’ या ‘महा संयोग’ (*Maha Samyog*) के दिन के रूप में सराहा जा रहा है।

19 मार्च वास्तव में एक विशेष दिन होगा, जब विविध त्योहारों और परंपराओं का एक…

ईरान के एकमात्र एक्टिव न्यू्क्लियर पावर प्लांट बुशहर के पास मंगलवार (17 मार्च 2026) की शाम प्रोजेक्टाइल मिसाइल से हमला किया गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया. हालांकि राहत की बात यह है कि प्लांट को कोई नुकसान नहीं हुआ और कोई भी कर्मचारी घायल नहीं हुआ.

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जंग तीसरे…

पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इज़रायल ने अमेरिका को गुप्त रूप से चेतावनी दी है कि ईरान की सत्ता पर पकड़ अभी भी बेहद मज़बूत है। जहाँ एक ओर इज़रायल सार्वजनिक रूप से ईरानी जनता को विद्रोह के लिए उकसा रहा है, वहीं निजी तौर पर उसका मानना है कि किसी भी बड़े जन-आंदोलन का अंत भयानक ‘नरसंहार’ (Massacre) के रूप में हो सकता है।

इज़रायल के शीर्ष अधिकारियों की एक कड़ी चेतावनी ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष…

दुनिया

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सनातन चिंतन को नई दिशा देता “सृष्टिदर्शन”: गुरुग्राम में भव्य विमोचन

उत्तराखंड,चारधाम यात्रा के लिए व्यावसायिक वाहनों के ग्रीन कार्ड 23 मार्च से बनने शुरू हो जाएंगे। दुर्घटना नियंत्रण के लिए ग्रीन कार्ड बनाने को वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर परिवहन विभाग इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरतने का दावा कर रहा है।

इस साल, चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होने वाली है। इस भव्य त्योहार की शुरुआत पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) की रस्म के साथ होगी। नवरात्रि के उत्सव 27 मार्च को महानवमी के साथ समाप्त होंगे।

18 March 2026: पढ़ें अपना दैनिक राशिफल (Dainik Rashifal) और जानें अपना आज का भविष्य। आज का राशिफल (Daily Horoscope), वैदिक ज्योतिष की गणना पर आधारित है। इस राशिफल (Dainik Rashifal) की मदद से आप यह जान सकते हैं कि आज का दिन आपके लिए कैसा बीतेगा।

Express News

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18 March 2026: पढ़ें अपना दैनिक राशिफल (Dainik Rashifal) और जानें अपना आज का भविष्य। आज का राशिफल (Daily Horoscope), वैदिक ज्योतिष की गणना पर आधारित है। इस राशिफल (Dainik Rashifal) की मदद से आप यह जान सकते हैं कि आज का दिन आपके लिए कैसा बीतेगा।

क्या आपको शानदार परिणाम मिलेंगे या दिन मिलाजुला रहेगा अथवा करना होगा चुनौतियों का सामना। इसमें सभी 12 राशियों (मेष,…

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हिंदू कैलेंडर में अमावस्या की तिथि का अपना ही एक अलग और गहरा महत्व है। लेकिन, जब बात चैत्र अमावस्या (Chaitra Amavasya 2026) की आती है, तो इसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है।

यह दिन पितरों को प्रसन्न करने और जीवन से नकारात्मकता दूर करने का सबसे बड़ा दिन माना जाता है। मार्च…

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उत्तराखंड में बदला मौसम: बर्फबारी के बाद अब बढ़ेगा तापमान, पहाड़ों में हल्की बारिश के आसार

भीमताल सीट पर सियासी उबाल: 13 कांग्रेस दावेदार मैदान में, पैराशूट राजनीति के खिलाफ बिगुल — “हरीश पनेरू सबसे भारी”

देहरादून में ‘फ्यूचर कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी’ पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारम्भ, राष्ट्रीय सम्मेलन का पोस्टर भी जारी

रामनगर में UKD की संगठनात्मक बैठक, नए पदाधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारियां

नवरात्रि 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. यह पर्व मां दुर्गा की आराधना का प्रतीक है, जिसमें श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर और विधि-विधान से पूजा कर शक्ति की उपासना करते हैं.

वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी. इस बार नवरात्रि को खास बनाने वाले कई ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं. ज्योतिषाचार्यों के…

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19 मार्च, 2026, धार्मिक और ज्योतिषीय, दोनों ही दृष्टिकोणों से एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन होने वाला है। इसका कारण यह है कि इस एक ही दिन कई प्रमुख त्योहार, व्रत और दुर्लभ खगोलीय संयोग एक साथ घटित हो रहे हैं; परिणामस्वरूप, 19 मार्च को ‘सुपर कंजंक्शन’ या ‘महा संयोग’ (*Maha Samyog*) के दिन के रूप में सराहा जा रहा है।

19 मार्च वास्तव में एक विशेष दिन होगा, जब विविध त्योहारों और परंपराओं का एक अनूठा संगम, वह भी केवल 24 घंटों की अवधि के भीतर, देखने को मिलेगा। परिणामस्वरूप,…

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ईरान के एकमात्र एक्टिव न्यू्क्लियर पावर प्लांट बुशहर के पास मंगलवार (17 मार्च 2026) की शाम प्रोजेक्टाइल मिसाइल से हमला किया गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया. हालांकि राहत की बात यह है कि प्लांट को कोई नुकसान नहीं हुआ और कोई भी कर्मचारी घायल नहीं हुआ.

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जंग तीसरे हफ्ते में पहुंच चुकी है. इस वजह से परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़…

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पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इज़रायल ने अमेरिका को गुप्त रूप से चेतावनी दी है कि ईरान की सत्ता पर पकड़ अभी भी बेहद मज़बूत है। जहाँ एक ओर इज़रायल सार्वजनिक रूप से ईरानी जनता को विद्रोह के लिए उकसा रहा है, वहीं निजी तौर पर उसका मानना है कि किसी भी बड़े जन-आंदोलन का अंत भयानक ‘नरसंहार’ (Massacre) के रूप में हो सकता है।

इज़रायल के शीर्ष अधिकारियों की एक कड़ी चेतावनी ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के केंद्र में मौजूद एक गंभीर विरोधाभास को उजागर किया है। जहाँ एक ओर वह…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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रुद्रपुर  पूर्व विधायक राजकुमार तथा व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा ने आज भगत सिंह चौक स्थित बत्रा स्पोर्ट के पास डॉक्टर डोगरा वाली गली में परगाई होम्योपैथिक क्लीनिक का धार्मिक […]

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) संसदीय दल की बैठक में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने भारत के संविधान को अपने माथे से लगाया।

इसके बाद उन्हें सर्वसम्मति से राजग संसदीय दल का नेता चुन लिया गया। इसके बाद राजग के नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इसके […]

मेरा पति समलैंगिक है। वह रात में आईने के सामने खड़े होकर शृंगार करता है। लिपस्टिक और नेल पॉलिश लगाता है। एक दिन रात को नींद खुली तो उसे शृंगार करता देख हतप्रभ रह गई। ससुराल वालों ने शादी से पहले उसके समलैंगिक होने की बात छिपाई थी।

ये कहना है शादी में धोखा खाई हरिद्वार निवासी युवती का। युवती ने महिला आयोग में शिकायत की है। हरिद्वार निवासी युवती का कहना है कि उसकी शादी फरवरी में […]

उत्तराखंड में 10 मई से शुरु हुई चारधाम यात्रा में स्वास्थ्य कारणों से अब तक 86 लोगों की मौत हो चुकी है।राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अब तक हुई 86 मौतों में से बद्रीनाथ धाम में 18, केदारनाथ धाम में 42, गंगोत्री धाम में 7 और यमुनोत्री धाम में 19 मौतें हुईं।

2023 में चारधाम यात्रा के दौरान कुल मिलाकर 245 तीर्थयात्रियों की मौत हुई थी। स्वास्थ्य विभाग के सचिव आर राजेश कुमार ने बताया कि 2023 की चार धाम यात्रा के […]

किच्छा:- भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने क्षेत्रीय विधायक तिलक राज बेहड़ के मलसा बूथ पर हुई हार की नैतिक जिम्मेदारी लेने वाले बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि नैतिक जिम्मेदारी लेना तब माना जाता है जब वह व्यक्ति अपने पद से इस्तीफा दे, वरना नैतिक जिम्मेदारी का क्या मतलब है?शुक्ला ने कहा कि किसी ने बेहड़ से नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग या आरोप नहीं लगाया उन्होंने खुद यह बयान दिया कि मैं अपने गांव मलसा में हार की नैतिक जिम्मेदारी लेता हूं, जबकि उन्होंने किच्छा विधानसभा के बूथ नंबर 80 की हार की जिम्मेदारी नहीं ली जहां उनका कैंप कार्यालय एवं परिवार सहित वोट है, यहां उन्हें 101 मत मिले और बीजेपी को 431 मत मिले, इसी प्रकार रुद्रपुर के आवास विकास स्थित बूथ नंबर 48 जहां वह वर्षों से रह रहे हैं वहां भी कांग्रेस की बड़ी हार हुई है वहां कांग्रेस को 81 तथा भाजपा को 312 को मत मिले, किच्छा विधानसभा में मात्र ढाई वर्षो में ही कांग्रेस व बेहड़ से जनता का मोह भंग हो गया है तथा 160 बूथों में से 98 बूथों पर कांग्रेस की हार हुई है जिन 62 बूथों पर कांग्रेस भाजपा से आगे रही उनमें अधिकांश मुस्लिम आबादी के बूथ हैं, पर मुस्लिम बूथों पर भी 7 से 15% तक वोट भाजपा को पड़े हैं, यह साबित करता है कि किच्छा विधानसभा क्षेत्र की जनता तिलक राज बेहड़ के प्रदर्शन से निराशा है व उसका मोह भंग हो गया है।शुक्ला ने कहा कि जनता स्पष्ट कह रही है कि किच्छा में डिग्री कॉलेज, एम्स, हाईटेक बस अड्डा सहित तमाम जो विकास के कार्य भाजपा के विधायक रहते हो रहे थे नए कांग्रेस विधायक बेहड़ उसमें कोई नई चीज नहीं जोड़ पाए। लोग कह रहे हैं कि विधानसभा में किच्छा के विकास पुरुष राजेश शुक्ला को हराकर भारी गलती हुई है हमने गलती से व भ्रम में आकर विवाद पुरुष को चुन लिया जो रोज अपने बयानों से विवाद खड़ा करते हैं।शुक्ला ने कहा कि 2022 में लगभग 10 हजार वोटो से पिछड़े भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं के दम पर तथा नरेंद्र मोदी जी व पुष्कर सिंह धामी जी के कुशल विजन व गुड गवर्नेंस के दम पर जबरदस्त वापसी की है तथा लगभग 20 हजार वोट मात्र ढाई वर्षो में बढ़े हैं, 10 हजार जो रुख हुए थे वे और 10 हजार जो आगे निकले हैं वो। शुक्ला ने कहा कि इसे 8500 की जीत न माना जाए क्योंकि पंतनगर विश्वविद्यालय व टीडीसी के लगभग 2000 कर्मचारी लोकसभा के चुनाव में जहां भी इलेक्शन ड्यूटी में थे उन्होंने वहीं EVM में अपना वोट कर दिया।शुक्ला ने कहा कि उत्तराखंड की पांचो सीटें भारी अंतर से जीताकर जनता ने धामी जी की सरकार के ढाई वर्षो के कार्यकाल को 100% नंबर दिए तथा लगातार तीसरी बार (हैट्रिक) पांच सांसद देकर मोदी जी के विजन पर पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में भारतीय लोकतंत्र एवं चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता की सराहना होती है परंतु लगातार हार रहे विपक्ष ने लोकतंत्र को कलंकित करते हुए गिनती से पूर्व EVM में ही भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और इस बार भी चुनाव परिणाम में जब उनकी सीट कुछ प्रांतों में अधिक आई तो निर्लज्जता से जश्न मना रहे हैं उनसे पूछना है कि उनकी जो सीटें आई हैं वह EVM ने दी है या जनता ने?पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि किच्छा की जनता ने लोकसभा चुनाव में अजय भट्ट जी को जीतकर मेरा भी मान बढ़ाया है मैं इस विधानसभा का संयोजक था तथा जिस तरह 160 में से लगभग 100 बूथों पर भाजपा की जीत हुई है उसमें मेरा किच्छा का आवास विकास का बूथ नंबर 84 भी है जहां हमने कांग्रेस को 409 मतों से हराया उन्हें 126 तथा भाजपा को 535 मत मिले तथा रुद्रपुर के औद्योगिक क्षेत्र शुक्ला फॉर्म के बूथ नंबर 78 पर जहां हमारा परिवार रहता है वहां भी 471 भाजपा को व 161 कांग्रेस को मत मिले तथा मेरा रामनगर गांव जहां के हम मूल निवासी हैं उस बूथ नंबर तीन पर भी भाजपा की जीत हुई है जहां भाजपा 299 तथा कांग्रेस को 189 मत मिले हैं।शुक्ला ने कहा कि बेहड़ के मुंह से नैतिकता की बात अच्छी नहीं लगती और न ही उन्हें नैतिक जिम्मेदारी का पता है यदि वास्तव में वे नैतिक जिम्मेदारी ले रहे हैं तो उन्हें इस्तीफा देकर पुनः जनादेश लेना चाहिए। जब प्रदेश की पांचो सीटों पर कांग्रेस की हार पर वे अपने प्रदेश नेतृत्व को बदलने की मांग अखबार में सार्वजनिक रूप से स्वयं कर रहे हैं तो किच्छा विधानसभा में हुई हार पर अपने पद से इस्तीफा देकर इसकी शुरुआत करनी चाहिए ताकि जनता को लगे कि वास्तव में वे नैतिक जिम्मेदारी ले रहे हैं और प्रदेश में अपनी पार्टी के प्रदर्शन पर नेतृत्व की बदलाव संजीदगी से कर रहे हैं।शुक्ला ने कहा कि अपने पुत्र को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर विधायक प्रतिनिधि बनाने से कांग्रेस के कार्यकर्ता भी निराश हैं तथा इसी कारण उनके बेहद करीबी कांग्रेसी भी मोह भंग होने से भाजपा में लगातार ज्वाइन कर रहे हैं तथा कांग्रेस में अपना भविष्य टटोलने गए गत् चुनाव में भाजपा कार्यकर्ता भी अपनी पार्टी में वापसी कर रहे हैं।श्री शुक्ला ने कहा कि आने वाले नगर निकाय, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तथा सहकारिता के चुनाव के लिए कार्यकर्ता इस जीत से उत्साहित होकर और अधिक ऊर्जा से भाजपा का परचम लहराएंगे तथा एकजुट होकर सभी चुनाव जीतेंगे।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /प्रिंटिंग मीडिया शैल ग्लोबल टाइम्स /संपादक अवतार सिंह बिष्ट , रूद्रपुर, उत्तराखंड

लोकसभा चुनाव खत्म होते ही उत्तराखंड वासियों को बिजली ने महंगाई को एक और झटका लगा है। ऊर्जा निगम ने जून महीने के लिए फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट की दरों का ऐलान कर दिया है।

जून महीने के लिए बिजली दरों में 12 पैसे से लेकर 45 पैसे प्रति यूनिट तक का इजाफा किया गया है। ऊर्जा निगम की ओर से उपभोक्ताओं को लगातार 11 […]

राज्य के कुशल खिलाडिय़ों को सरकारी सेवाओं में चार प्रतिशत आरक्षण मिलने का रास्ता साफ हो गया है। राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद अब इसका शासनादेश जारी हो गया है।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया है। साथ ही उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उत्तराखंड लोक सेवा (कुशल खिलाडिय़ों के लिए […]

मंडी सांसद कंगना रनौत को एयरपोर्ट पर थप्पड़ मारने वाली सीआईएसएफ आरोपी महिला जवान इस वजह से एक्ट्रेस से थी नाराज, देखिए Videoकुलविंदर को नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया है। घटना के तुरंत बाद उन्हें हिरासत ले लिया गया था। उनसे पूछताछ की जा रही है।

मंडी सांसद कंगना रनौत आज चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए विस्तारा एयरलाइंस से जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंची वहां एक सीआईएसएफ महिला जवान ने कंगना रनौत को थप्पड़ जड़ दिया, […]

गोल्फ टूर्नामेंट की पहचान उत्तराखंड में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में होनी चाहिए।गुरमीत सिंह

रिपोर्ट ललित जोशी / हर्षित जोशी। नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने राजभवन गोल्फ कोर्स में आयोजित कर्टेन रेजर कार्यक्रम में मीडिया से […]

अ खिलेश यादव के दलित चेहरे ने बीजेपी के धुरंधर ठाकुर चेहरे को हराकर दिखा दिया कि अयोध्या पर कमंडल नहीं मंडल भारी है. क्या ये जातीय समीकरणों का चमत्कार है या फिर लोगों को रास नहीं आया कम मुआवजे का विकास!

अयोध्या जिसे फैजाबाद लोकसभा सीट कहा जाता है उसकी हारने पर दिल्ली से लेकर लखनऊ तक और बीजेपी से लेकर संघ परिवार तक सभी को सदमे में डाल दिया है. […]