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गुरुग्राम में साहित्यिक सचेतना का तृतीय वार्षिकोत्सव “सनातन साहित्य सम्मान एवं समागम” संपन्न

250 से अधिक साहित्यकारों, विचारकों और सनातन प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थितिगुरुग्राम की पावन भूमि पर…

महापौर विकास शर्मा ने देवेंद्र शाही व विक्रांत फुटेला के साथ मेट्रोपोलिस सिटी गेट नंबर-1 का किया उद्घाटन?मेयर विकास शर्मा ने मेट्रोपोलिस सिटी के गेट नंबर-1 का किया उद्घाटन, कॉलोनीवासियों में उत्साह

रुद्रपुर। शहर की प्रतिष्ठित आवासीय कॉलोनी मेट्रोपोलिस सिटी में रविवार को एक भव्य समारोह के…

मेट्रोपोलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव 20 मार्च तक कराने के निर्देश, तहसीलदार रुद्रपुर होंगे निर्वाचन अधिकारी

रुद्रपुर।जिला मजिस्ट्रेट उधम सिंह नगर ने मेट्रोपोलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण…

“फूलदेई का लोकसंदेश: नन्हे कदमों से खिलती संस्कृति, पर्वतीय समाज में प्रकृति और परंपरा का उत्सव”

रुद्रपुर।उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं का प्रतीक लोकपर्व फूलदेई इस वर्ष…

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पंतनगर एयरपोर्ट पर पूर्व विधायक Rajesh Shukla ने किया स्वागत, किच्छा की विकास योजनाओं को वित्तीय स्वीकृति देने पर Pushkar Singh Dhami को सौंपा आभार पत्र”

पंतनगर। प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी के पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचने पर किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने उनका…

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पंतनगर में 119वां अखिल भारतीय किसान मेला शुरू, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया उद्घाटन, प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित

रुद्रपुर/पंतनगर, 14 मार्च 2026।Pushkar Singh Dhami ने Govind Ballabh Pant University of Agriculture and Technology, पंतनगर में आयोजित 119वें अखिल…

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डिजिटल इंडिया की हकीकत—रसोई गैस संकट में लौटते कदम 80 के दशक की ओर”

रुद्रपुर में 16 मार्च को शिवसेना का पैदल मार्च: UGC नियम और जातिगत आरक्षण पर उठे सवालसंपादकीय / विशेष रिपोर्ट – अवतार सिंह बिष्टरुद्रपुर।

फूलदेई पर्व पर पंडित त्रिलोचन पनेरु की ज्योतिषीय व्याख्या, रामदत्त पंचांग का हवालाफूलदेई : उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, प्रकृति और मासूमियत का अनोखा उत्सव

14 March 2026: 14 मार्च की सुबह ब्रह्मांड में एक बड़े बदलाव की गवाह बन रही है. चंद्रदेव का मकर राशि में प्रवेश हमें आलस्य त्यागकर कर्तव्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है.

गुरुग्राम में साहित्यिक सचेतना का तृतीय वार्षिकोत्सव “सनातन साहित्य सम्मान एवं समागम” संपन्न

250 से अधिक साहित्यकारों, विचारकों और सनातन प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थितिगुरुग्राम की पावन भूमि पर रविवार, 15 मार्च 2026 को साहित्यिक सचेतना एवं स्वास्तिक मासिक पत्रिका के तत्वावधान में “सचेतना…

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महापौर विकास शर्मा ने देवेंद्र शाही व विक्रांत फुटेला के साथ मेट्रोपोलिस सिटी गेट नंबर-1 का किया उद्घाटन?मेयर विकास शर्मा ने मेट्रोपोलिस सिटी के गेट नंबर-1 का किया उद्घाटन, कॉलोनीवासियों में उत्साह

रुद्रपुर। शहर की प्रतिष्ठित आवासीय कॉलोनी मेट्रोपोलिस सिटी में रविवार को एक भव्य समारोह के बीच मुख्य प्रवेश द्वार गेट नंबर-1 का उद्घाटन संपन्न हो गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि…

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मेट्रोपोलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव 20 मार्च तक कराने के निर्देश, तहसीलदार रुद्रपुर होंगे निर्वाचन अधिकारी

रुद्रपुर।जिला मजिस्ट्रेट उधम सिंह नगर ने मेट्रोपोलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार एसोसिएशन के चुनाव अब पूर्व में नामित…

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“फूलदेई का लोकसंदेश: नन्हे कदमों से खिलती संस्कृति, पर्वतीय समाज में प्रकृति और परंपरा का उत्सव”

रुद्रपुर।उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं का प्रतीक लोकपर्व फूलदेई इस वर्ष भी पूरे प्रदेश में उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों के साथ मनाया गया। कुमाऊं से…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी का 54वां आरआर (2022-24 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम) के भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह बुधवार को आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगी।

वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के परिसर में आयोजित होने वाले समारोह में 2022-24 सत्र के 99 भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थी और मित्र देश भूटान के दो भी प्रशिक्षु अधिकारी पासआउट […]

रूद्रपुर  23 अप्रैल 2024  जनसंख्या  दिनों दिन बढ़ती  जा रही है बढ़ते  हुए शहरीकरण एवं आद्यौगिकरण, विकास कार्यों में तेजी  तथा कृषि क्षेत्रों में अधिक जल खपत के कारण पानी की मॉग भी बढ़ रही है। भू-जल का  अधिक  दोहन  के  कारण  भू-जल का स्तर प्रतिवर्ष 4  से  5  फीट गिरता  जा रहा है। ऐसे में वर्षा जल का संग्रहण कर अधिकाधिक उपयोग अति आवश्यक हो जाता है। जिलाधिकारी उदयराज सिंह के निर्देशन में अधिशासी अभियन्ता लघु सिंचाई सुशील कुमार द्वारा वर्ष 2023-2024 में 148 रिचार्ज शाफ्ट का निर्माण किया गया जिससे 6000 लाख लीटर पानी प्रति हेक्टयर जल रिचार्ज होगा।अधिशासी अभियन्ता सुशील कुमार ने बताया कि वर्षा के समय वर्षा जल का  कुछ भाग भूमि सतह  के नीचे रिसकर प्राकृतिक रूप से भू-जल में मिल जाता है। जिससे भू-जल भण्डार में वृद्धि होती है। यह  एक धीमी प्रक्रिया है  और अधिकांश  वर्षा  का  जल  व्यर्थ  बह  जाता  है।  बहते  हुए  जल  को  संग्रहित  करके भू-जल स्तर को जल संवर्द्धन, जल सम्भरण आदि के द्वारा बढ़ाया जा  सकता है। इसके लिए  रिचार्ज  शाफ्ट  रिचार्ज  कूप,  हार्वेस्टिंग  टैंक  आदि  का  निर्माण  कार्य  कराया  जाना  अति आवश्यक है। एक रिचार्ज शाफ्ट द्वारा  एक वर्ष बरसात का  मौसम में एक हेक्टेयर क्षेत्रफल वर्षा के  जल  को  संगृहीत कर  52.20  लाख  ली0  जल  रिचार्ज  करता  है।  इस  प्रकार  कई रिचार्ज शाफ्ट का निर्माण करके भू-जल स्तर को बढ़ाया  जायेगा। वर्ष  2023-24   में   निर्मित   रिचार्ज   शाफ्ट  नाबार्ड   के   अर्न्तगत   (विकास  खण्ड काशीपुर-27  एवं  बाजपुर-121)  148  रिचार्ज  शाफ्ट  का  निर्माण  कार्य  कर  208  लाख  का व्यय किया गया। जनपद में 148 रिचार्ज शाफ्ट द्वारा एक वर्ष में बरसात के मौसम में वर्षा  के  जल  को  संग्रह  कर  लगभग  6000  लाख  लीटर  प्रति  हेक्टयर  जल  रिचार्ज  किया जायेगा।नार्बाड के RIDF योजना के अन्तर्गत (विकास खण्ड काशीपुर-4 एवं बाजपुर-5) 09 वियर का जीर्णोद्धार किया गया है, जिससे  सिंचाई पुनर्स्थापित कर 434.85 है0 क्षमता बढ़ायी गयी है। उन्होंने बताया कि ऐसे स्थान जहॉ पर प्राकृतिक बारहमासी स्थायी स्रोत हैं उनका पानी रोक कर तथा उसका  स्तर  ऊॅचा  करने  से  अधिक  मात्रा  में  खेतों  की  सिंचाई  सम्भव  हो  जाती  है  परन्तु स्थायी रूप से उसका स्तर ऊॅचा करने पर ऊपर के खेतों के लिए बरसात में जल भराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इससे निपटने के लिए गेटेड स्ट्रक्चर का निर्माण किया जाता है।  यह  योजना  काफी  लाभप्रद  सिद्ध  हुई  है।  यह  कार्य  भी  लघु  सिंचाई  द्वारा  भी  किया जा रहा है।

हनुमान जयंती 23 अप्रैल यानी आज मनाई जा रही है. हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जयंती का त्योहार मनाया जाता है. हनुमान जयंती पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. ज्योतिषियों की मानें तो, हनुमान जयंती के दिन हनुमान स्तुति का पाठ करना चाहिए, जिससे जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और हर मनोकामना पूरी होती है. तो आइए जानते हैं उस शक्तिशाली स्तुति के बारे में. 

आज चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है और आज रामभक्त हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। हनुमानजी कलयुग के देवता हैं और जल्द प्रसन्न होने वाले […]

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार से उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर होंगी और इस दौरान वह ऋषिकेश में गंगा आरती और अन्य कार्यक्रमों में शामिल होंगी। राष्ट्रपति भवन ने यह जानकारी दी।

राष्ट्रपति भवन ने सोमवार को एक बयान में कहा कि मुर्मू मंगलवार को एम्स-ऋषिकेश के चौथे दीक्षांत समारोह में भी शामिल होंगी। बयान में कहा गया है, “उसी शाम, वह […]

Uttrakhand  में बिजली इस सप्ताह से महंगी हो सकती है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग नई विद्युत दरें जारी करने जा रहा, जो एक अप्रैल से लागू मानी जाएंगी। आचार संहिता के बीच चुनाव आयोग ने नियामक आयोग को इसकी अनुमति दे दी है।

27 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के लिए ये दरें जारी होंगी। दरअसल, यूपीसीएल को राज्य की मांग पूरी करने के लिए बिजली खरीद पर 1281 करोड़ ज्यादा देने पड़ रहे […]

रूद्रपुर। उत्तराखंड की पांचो सीटों पर घटे मतदान के प्रतिशत ने जहां उम्मीदवारों के माथे पर चिंता की लकीरें पैदा कर दी हैं, वहीं दूसरी ओर सियासी हलकों में जीत-हार को लेकर गुणा-भाग शुरू हो गया है और अब यह आकलन करने की कोशिश की जा रही है कि कम मतदान से किसी राजनीतिक दल की राह आसान होगी ? कम मतदान के बावजूद भाजपा और कांग्रेस अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। भाजपा के राज्य अध्यक्ष ने जहां गत दिवस देहरादून में भाजपा की हैट्रिक लगने का पूरा विश्वास जाताया ,वही कांग्रेस अपने पक्ष में अंडर करंट मानकर चल रही है। जातिगत आंकड़ों, कैडर वोट के आधार पर लगाए जा रहे इन अनुमानों के बीच यह मतदान प्रतिशत में आई बड़ी गिरावट को लेकर चिंता भी सामने आई है और यह अनुमान लगाना लगाया जा रहा है कि किसके मतदाताओं के मतदान केंद्र तक न पहुंचने से मतदान के प्रतिशत में अच्छी खासी गिरावट आई है? खासतौर पर पहाड़ की संसदीय सीटों के 21 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत 50 फीसदी से भी कम रहा है। अल्मोड़ा की सल्ट सीट पर प्रदेश में सबसे कम 32 फीसदी मतदान रहा, जबकि हरिद्वार ग्रामीण में सबसे अधिक 73.21 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया , लेकिन श्रीनगर गढ़वाल विधानसभा को छोड़कर प्रदेश की बाकी सभी सीटों पर मतदान प्रतिशत 2019 की तुलना में घटा है और दोनों ही रावत अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। दोनों ही उम्मीदवारों के अपनी जीत के पक्ष में अपने-अपने तर्क हैं।भाजपा कब्जे वाली इस सीट पर 2014 में यह 71.57 प्रतिशत था। 2019 में यह 68.92 प्रतिशत था लेकिन इस चुनाव में यह घटकर 62.36 प्रतिशत पहुंच गया। मतदान प्रतिशत के आंकड़ों के विश्लेषण से जो तस्वीर उभर कर सामने आ रही है, वह बता रही कि संसदीय क्षेत्र में जिन विस सीटों पर कांग्रेस व विपक्षी विधायक काबिज हैं, उनमें भाजपा कब्जे वाली विधानसभा सीटों से अधिक मतदान हुआ है । भाजपा शासित धर्मपुर, ऋषिकेश, डोईवाला, हरिद्वार, रुड़की में 60 फीसदी से कम मतदान हुआ है और केवल भेल रानीपुर सीट पर ही 60 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया है ,वहीं, कांग्रेस शासित सीटों भगवानपुर, हरिद्वार ग्रामीण, झबरेड़ा, ज्वालापुर, पिरान कलियर सीट पर मतदान 60 फीसदी से लेकर 73.21 फीसदी तक दर्ज किया गया ।इन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी अच्छी-खासी तादाद में है। इसके अलावा मंगलौर, लक्सर व खानपुर सीट पर भी मतदान 60 फीसदी से अधिक रहा है। दूसरी ओर टिहरी लोकसभा में मतदान प्रतिशत पहली बार गिर गया और यहां 2019 के मुकाबले मतदान प्रतिशत में 5।73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस लोकसभा में वर्तमान में 14 में से 11 विधानसभा सीटों पर भाजपा, दो पर कांग्रेस और एक पर निर्दलीय विधायक हैं।पिछले चार चुनावों के हिसाब से टिहरी लोकसभा पर नजर डालें तो वर्ष 2009 के चुनाव में यहां 50.38 प्रतिशत मतदान हुआ था। 2014 में यह आंकड़ा बढ़कर 57.44 प्रतिशत और 2019 में 58.30 प्रतिशत पर पहुंच गया था, लेकिन इस बार मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई है। इस साल के चुनाव में टिहरी लोकसभा में 52.57 प्रतिशत मतदान हुआ है। यहां भाजपा से माला राज्य लक्ष्मी शाह, कांग्रेस से जोत सिंह गुनसोला के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी बॉबी पंवार के बीच त्रिकोणीय संघर्ष था। साथ ही नैनीताल-ऊधम सिंह नगर लोकसभा सीट पर इस बार 7.57 प्रतिशत तक मतदान घट गया है।मतदान में आई इस गिरावट ने सभी प्रत्याशियों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। ऐसा इसलिए कि 2009 के बाद इसी सीट पर मतदान प्रतिशत ने 9.73 प्रतिशत की छलांग लगाई थी। 2009 में 58.69 प्रतिशत वोट पड़े थे। 2014 में प्रचंड मोदी लहर में यह बढ़कर 68.41 प्रतिशत हो गए और 2019 में यह मतदान प्रतिशत 68.92 तक रहा, लेकिन 2024 के चुनाव में यह घटकर 61.35 प्रतिशत रह गया। इसके बावजूद भाजपा इस सीट पर हैट्रिक का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस भी इस सीट पर अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। 2019 के चुनाव में छह सीटों पर 70 फीसदी से अधिक मतदान हुआ था, लेकिन इस बार केवल सितारगंज सीट पर ही 70।15 मतदान हुआ। भाजपा के कब्जे वाली भीमताल, नैनीताल, काशीपुर सीटों पर जहां 60 फीसदी से कम मतदान हुआ ,वही लालकुआं, जसपुर व काशीपुर सीटों पर मतदान में नौ फीसद तक गिरावट रही। इसके बावजूद भाजपा इस सीट पर हैट्रिक लगाने का दावा कर रही, जबकि कांग्रेस भी इस सीट पर अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिख रही है । उधर गढ़वाल लोकसभा सीट पर लगातार दूसरे चुनाव में मतदान प्रतिशत की गिरावट सामने आई है ।यह सीट पिछले 10 साल से बीजेपी के पास है। वर्तमान में इस लोकसभा की 14 में से 13 सीटें भी भाजपा के पास हैं। 14वीं बदरीनाथ विधानसभा के कांग्रेस विधायक भी चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए थे। पिछले तीन चुनावों के ट्रेंड से गढ़वाल लोकसभा की तस्वीर काफी हद तक समझ में आती है। 2009 के लोकसभा चुनाव में यहां 48।87 प्रतिशत मतदान हुआ था, तब कांग्रेस से सतपाल महाराज सांसद चुने गए थे लेकिन 2014 में तस्वीर पलट गई तथा इस सीट पर मतदान प्रतिशत बढ़कर 53.98 प्रतिशत हो गया और भाजपा के मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी यहां से सांसद निर्वाचित हुए ।2019 में मतदान प्रतिशत बढ़कर 54.47 प्रतिशत दर्ज किया गया और भाजपा के तीरथ सिंह रावत यहां सांसद चुने गए, लेकिन अबकी बार मतदान प्रतिशत में करीब 3.63 प्रतिशत गिरकर 50.84 पर पहुंच गया है। 2022 के विस चुनाव में इस लोकसभा की 14 में से 13 विधानसभा सीटों पर भाजपा विजयी हुई थी। बदरीनाथ विस सीट पर कांग्रेस के राजेंद्र भंडारी विधायक थे, जो लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हो गए थे और वर्तमान में ये सीट खाली है। इस बार यहां भाजपा के अनिल बलूनी और कांग्रेस के गणेश गोदियाल मैदान में थे।दोनों ही अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं। राज्य की पांचों सीटों में सबसे कम मतदान अल्मोड़ा लोकसभा सीट पर हुआ है। पिछले चुनाव की तुलना में इस सीट पर 4।88 प्रतिशत मतदान कम हुआ। 2009 में इस सीट पर 45।86 प्रतिशत मतदान हुआ था। 2014 में प्रचंड मोदी लहर के बावजूद यहां 52.41 फीसदी ही वोट पड़े और 2019 में 51.82 मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया था । इस बार यह घटकर 46.94 प्रतिशत ही रह गया । इस संसदीय क्षेत्र की अल्मोड़ा विस सीट पर गत चुनाव की तुलना में सबसे अधिक 10.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। संसदीय क्षेत्र की 14 विधानसभा सीटों में से नौ सीटों पर 50 फीसदी से कम मतदान हुआ है। सल्ट सीट पर एक बार फिर सबसे कम 32 फीसदी मतदान हुआ

प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा, कम मतदान और इसके बहिष्कार के मामलों का सरकार ने संज्ञान लिया है। उन्होंने यह बात भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से वार्ता के दौरान कही।

दावा किया कि कुल मतदान का 75 प्रतिशत मत भाजपा के पक्ष में हुआ। कम मतदान की एक वजह उन्होंने कांग्रेस की निराशा को बताया। कहा, प्रतिस्पर्धा के अभाव में […]

रूद्रपुर, 22 अप्रैल, 2024/ जिला निर्वाचन अधिकारी उदय राज सिंह ने बताया कि लोकसभा सामान्य निर्वाचन-2024 प्रक्रिया अन्तर्गत शान्तिपूर्ण मतदान सम्पन्न होने के पश्चात समस्त ई.वी.एम. एवं वी.वी.पी.ए.टी व अन्य अभिलेखों को विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रवार नवीन मण्डी स्थल बगवाड़ा, रूद्रपुर में स्थापित स्ट्रांग रूम में रखा गया है,

आगामी 04 जून, मतगणना दिवस तक अर्द्धसैनिक बलों व पुलिस अभिरक्षा में रहेंगी।जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि सभी सील्डयुक्त ईवीएम स्ट्रंाग रूम में पूर्णतः सी.सी.टी.वी. व सुरक्षा बलों की […]

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले पैसे बांटे.

इस वीडियो को एक्स यूजर आदर्श कातिया (@AdarshKatiyaINC) ने शेयर किया है. आदर्श ने वीडियो के थंबनेल में बताया है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खुलेआम पैसे बांटते हुए […]

रुद्रपुर। सिडकुल में अवैध वसूली के मामला गरमा गया है। मामले में दोनों पक्षों ने पुलिस को तहरीर सौंपकर गंभीर आरोप लगाये हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर पुलिस जल्द ही मामले में क्रास केस दर्ज कर सकती है। बता दें बीते दिनों एक ऑडियो वायरल हुआ था जिसमें विधायक का करीबी किरन विर्क सिडकुल के ठेकेदार राजेश सिह से 33 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग कर रहा है। इस मामले में ठेकेदार राजेश सिंह ने डाक से पंतनगर थाने में तहरीर दी है जिसमें उन्होंने कहा है कि उसने औद्यौगिक इकाई, मै० इण्डिया फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड, स्थित सेक्टर 11 सिडकुल, पंतनगर, के स्क्रैप ठेकेदार पवन शर्मा से स्क्रैप का तौल के हिसाब से क्रय विक्रय करने का सौदा तय किया, जिसका भुगतान भी तौल के हिसाब से होना था। 10 अप्रैल 2024 को प्रातः लगभग 11 बजे उसने स्क्रैप उठाने के लिए अपने सहयोगी मनीष यादव पुत्र वीरम सिंह यादव निवासी भदईपुरा रूद्रपुर को श्रमिकों सहित ट्रक पंजीयन संख्या यूके 06-सीबी -9141 सहित उक्त कम्पनी- मै० इण्डिया फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड में भेजा, लेकिन मनीष यादव के कम्पनी में पहुँचने के कुछ समय पश्चात ही वहाँ पर एक स्कॉपियो, और दिनेश सैनी की वरना कार एवं एक अस्थाई पंजीयन संख्या की स्विफ्ट कार में मोहन कबाडी स्वामी नानक ट्रेडर्स, आकाश यादव,आशीष यादव पुत्रगण अनिल यादव, अभिषेक यादव पुत्र दान बहादुर यादव, संजय दास उर्फ विशाल पुत्र निवासीगण भदईपुरा, रुद्रपुर, दिनेश सैनी पुत्र व 5 अन्य व्यक्ति आ धमके तथा आते ही सभी लोगों ने मनीष यादव व उसके श्रमिकों को अभद्र गालियाँ देते हुए धमकी दी। कहा कि इस कम्पनी से जो भी स्क्रैप उठाता है वह स्क्रैप उठाने से पहले रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा को उनका 33 प्रतिशत हिस्सा देता है, तभी वह इस कम्पनी से माल उठा सकता है। उक्त लोगों ने मनीष यादव से विधायक शिव अरोरा या उनके साथी किरन विर्क से बात करने के लिए कहा और यह भी कहा कि उन्हें विधायक जी ने ही यहाँ पर भेजा है। राजेश के मुताबिक इस समस्त प्रकरण से मनीष यादव ने उसे फोन पर जानकारी दी। जिस पर उन्होंने किरन विर्क निवासी बिगवाडा से मोबाइल पर बात कर उक्त हिस्सेदारी की जानकारी चाही तो किरन विर्क ने फोन पर बताया कि मै० इण्डिया फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड से रुद्रपुर विधायक का 33 प्रतिशत का हिस्सा पूर्व से जाता है और आगे जो भी काम करेगा वह भी 33 प्रतिशत का हिस्सा विधायक जी को देगा। राजेश ने तहरीर में आगे बताया है कि जब वह साथी मनीष गंगवार व नन्द किशोर, उक्त मै० इण्डिया फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड, सिडकुल पंतनगर पहुँचे तोवहाँ पर किरन विक व मोहन कबाडी आदि मौजूद थे और किरन विर्क ने कहा कि हम विधायक जी के काम देखते है। हमें पूर्व की भाँति ही तुमसे भी बचत का 33 प्रतिशत का हिस्सा चाहिए। बिना हिस्सा दिये तुम यहाँ काम नहीं कर सकते हो। हमारी बिना हिस्सेदारी के स्क्रैपउठाने की कोशिश की तो विधायक जी तुम लोगों को किसी भी फर्जी मामले में जेल भिजवा देंगे या आयकर विभाग से तुम्हारा माल पकडवा कर काम बन्द करा देंगे। काम करना है तो पहले विधायक जी का हिस्सा पहुँचा दो।

वहीं दूसरे पक्ष ने भी रविवार को इस मामले में पंतनगर थाने में तहरीर सौंपी है। ओमेक्स कालोनी निवासी मोहन स्वरूप पुत्र मेवाराम की ओर से सौंपी गयी तहरीर में […]