शारदीय नवरात्रि का पहला दिन: मां शैलपुत्री को सफेद फूल, खीर और मोती की माला प्रिय, जानिए पूजा की विधि


शारदीय नवरात्रि का पहला दिन: मां शैलपुत्री को सफेद फूल, खीर और मोती की माला प्रिय, जानिए पूजा की विधि
रुद्रपुर। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री और देवी पार्वती का स्वरूप हैं। भक्त घटस्थापना कर माता की आराधना करते हैं और सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना करते हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन माता को प्रिय भोग अर्पित करने, मंत्र जाप करने और विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | अवतार सिंह बिष्ट, उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर
मां शैलपुत्री को प्रिय हैं सफेद फूल और गाय के दूध की खीर
आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की पूजा में सफेद फूल अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में बताया कि माता को गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाया जा सकता है। खीर में केसर के स्थान पर गुड़ या मिश्री का प्रयोग करने की सलाह भी उन्होंने दी। विशेष रूप से सूत वाली मिश्री का उल्लेख किया गया।
माता को भोग अर्पित करते समय श्रद्धा, पवित्रता और संयम का ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि भोग की मात्रा से अधिक महत्व भक्त की भावना और समर्पण का होता है। इसलिए थोड़ी मात्रा में तैयार खीर भी श्रद्धापूर्वक अर्पित की जा सकती है।
बिना पूजा सामग्री के भी कर सकते हैं माता की आराधना
यदि किसी व्यक्ति के पास पूजा की सामग्री उपलब्ध नहीं है या वह कामकाज में व्यस्त है, तो वह मानसिक पूजा के माध्यम से भी मां शैलपुत्री का स्मरण कर सकता है। मानसिक पूजा में आंखें बंद करके माता का ध्यान किया जाता है और मन ही मन उन्हें जल, फूल, वस्त्र, चंदन, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करने की कल्पना की जाती है।
इसके बाद मन में माता का श्रृंगार, आरती, पुष्पांजलि और प्रार्थना की जाती है। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस प्रकार की पूजा में मन की एकाग्रता, श्रद्धा और भक्ति को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसका उद्देश्य बाहरी सामग्री के अभाव में भी भक्त को अपनी उपासना से जोड़े रखना है।
सफेद-पीले वस्त्र और मोती की माला का विशेष महत्व
स्वामी कैलाशानंद गिरि के अनुसार, मां शैलपुत्री को सफेद और पीले रंग के वस्त्र अर्पित किए जा सकते हैं। माता को सफेद मोतियों की माला पहनाने और कोमल बेलपत्र चढ़ाने का भी उल्लेख किया गया है।
बेलपत्र अर्पित करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, ताकि पूजा के दौरान माता के कोमल स्वरूप के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव बना रहे। भक्त अपनी सामर्थ्य और उपलब्ध सामग्री के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
दुर्गा सप्तशती का पाठ और देवी स्तुति करें
मां शैलपुत्री की आराधना में दुर्गा सप्तशती के पाठ को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। स्वामी कैलाशानंद गिरि ने दुर्गा सप्तशती के प्रथम अध्याय और चौथे अध्याय में वर्णित देवी स्तुति के पाठ का उल्लेख किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी स्तुति में देवताओं द्वारा संकट के समय भगवती की आराधना का वर्णन मिलता है।
जो श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ नहीं कर पाते, वे अपनी श्रद्धा के अनुसार माता के मंत्रों का जाप, ध्यान और प्रार्थना कर सकते हैं। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करते हुए भक्त परिवार की सुख-शांति, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मकता की कामना करते हैं।
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