कुमाऊं द्वार महोत्सव में मैथिली ठाकुर ने पहाड़ी गीतों से बांधा समां, उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के रंग में रंगे दर्शक


हल्द्वानी। कुमाऊं द्वार महोत्सव में प्रसिद्ध लोकगायिका मैथिली ठाकुर की पहाड़ी गीतों पर आधारित प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। अपनी मधुर आवाज और शानदार गायकी से उन्होंने दर्शकों का मन मोह लिया। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और संगीत की मिठास से सजी इस प्रस्तुति ने महोत्सव के माहौल को खास बना दिया।
मैथिली ठाकुर ने पहाड़ी गीतों के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के प्रति अपनी प्रस्तुति दी। उनकी गायकी में लोकसंगीत की मिठास और सुरों का आकर्षण देखने को मिला। कार्यक्रम में मौजूद संगीत प्रेमियों के लिए यह प्रस्तुति यादगार पल बन गई। लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध, कुमाऊँ द्वार महोत्सव में बोले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
हल्द्वानी, नैनीताल। कुमाऊँ द्वार महोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान और गौरव का प्रतीक है। इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने महोत्सव में सहभागिता करते हुए लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और उपस्थित जनता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन प्रदेश की परंपराओं, लोकगीतों और क्षेत्रीय पहचान को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
महोत्सव में लोकगायिका मैथिली ठाकुर की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। पहाड़ी गीतों, भजनों और लोकसंगीत ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिए।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया।
कार्यक्रम में नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद दिनेश आर्य, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक सविता हरबंस कपूर, विधायक सुरेश गढ़िया और जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | अवतार सिंह बिष्ट, रुद्रपुर


कुमाऊं द्वार महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों की संगीत परंपराओं के साथ पहाड़ की संस्कृति को मंच मिलना उत्तराखंड की समृद्ध लोकविरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, परंपराओं और लोकगीतों से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
मैथिली ठाकुर की पहाड़ी गीतों की प्रस्तुति ने महोत्सव में सांस्कृतिक उत्साह बढ़ाया और उत्तराखंड के लोकसंगीत की खूबसूरती को एक बार फिर सामने रखा।

✍️  हल्द्वानी-कुमाऊं
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | अवतार सिंह बिष्ट, रुद्रपुर