देहरादून। मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाने के लिए उत्तराखंड में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर ने देहरादून की मतदाता सूची से जुड़े कई स्तरों की विसंगतियां सामने ला दी हैं।

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देहरादून जिले में भी इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता रिकार्ड की जांच की गई। जिसमें सबसे चौंकाने वाली गड़बड़ी यह पकड़ी गई कि नेपाली और बांग्लादेशी नागरिकों के नाम भारतीय मतदाता सूची में दर्ज थे। जिन्हें तत्काल हटा भी दिया गया, लेकिन विदेशी नागरिकों के भारतीय मतदाता बने होने से सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

उत्तराखंड में एसआईआर की प्रक्रिया बीते आठ जून से शुरू हुई। बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ ने घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए और उनसे संबंधित विवरण एकत्र किए। सात जुलाई तक गणना प्रपत्रों के वितरण, संग्रह और उनके डिजिटाइजेशन का काम किया गया।

इसके बाद रिकार्ड की जांच कर ड्राफ्ट मतदाता सूची तैयार की गई। एसआईआर इआर के तहत केवल मतदाता का नाम देखना ही उद्देश्य नहीं था, बल्कि उसके निवास, पारिवारिक विवरण, पूर्व मतदाता सूची से संबंध और पात्रता समेत विभिन्न स्तरों पर रिकार्ड का सत्यापन किया गया।

विसंगति मिलने पर संबंधित मतदाता को नोटिस देकर जवाब देने का अवसर भी दिया गया। मैदानी क्षेत्रों में तहसील, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाने की व्यवस्था की गई थी।

दून में 1.86 लाख नाम हटाए गए

एसआईआर के बाद देहरादून जिले की ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जिले में पहले 13,76,813 मतदाता दर्ज थे। सत्यापन के बाद 1,86,008 नाम हटाए गए, जिसके बाद ड्राफ्ट सूची में 11,90,805 मतदाता रह गए।

हटाए गए नामों में 18,538 मृतक, 1,00,477 स्थानांतरित, 50,287 सत्यापन के दौरान अनुपस्थित और 2,585 ऐसे मतदाता शामिल थे जिनका नाम दूसरी जगह भी दर्ज पाया गया। अन्य कारणों से भी 14,121 नाम हटाए गए।

विदेशी नागरिकों के नाम पर सबसे बड़ा सवाल

देहरादून में नेपाली और बांग्लादेशी नागरिकों के नाम भारतीय मतदाता सूची में होने की जानकारी सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है। सूत्रों के अनुसार, ऐसे कई मामले पकड़े गए और उनके नाम तत्काल हटा दिए गए।

विदेशी नागरिक भारतीय मतदाता के रूप में दर्ज पाए जाने के बाद ऐसे मामलों में गलती दस्तावेजी सत्यापन, स्थानीय स्तर की जांच, डेटा एंट्री या किसी अन्य चरण पर होने की आशंका तो बनती ही है, वोट बैंक के नाम पर राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों की संलिप्तता की ओर भी इशारा करती है। हालांकि, एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची तीन अक्टूबर को सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।


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