
कभी स्टूडेंट वीजा पर कनाडा जाने वाला गोल्डी बराड़ धीरे-धीरे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क से जुड़ा और उस पर हत्या, रंगदारी, हथियारोंd की तस्करी, ड्रग्स और आतंकी गतिविधियों से जुड़े कई गंभीर आरोप लगे।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
29 मई 2022 को पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद गोल्डी बराड़ का नाम देशभर में चर्चा में आया। भारतीय जांच एजेंसियों ने उसे इस हत्याकांड की साजिश से जोड़ा। इसके बाद भारत सरकार ने उसे यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया और एनआईए ने कई मामलों में उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
अब अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने गोल्डी बराड़ को अपनी टेन मोस्ट वांटेड भगोड़े की लिस्ट में शामिल किया है। एफबीआई के मुताबिक, वह लॉरेंस बिश्नोई ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप का उत्तरी अमेरिका में कथित प्रमुख है। उसकी गिरफ्तारी तक पहुंचाने वाली जानकारी देने वाले को 10 लाख डॉलर तक का इनाम देने का ऐलान किया गया है।
गोल्डी बराड़ पर टारगेट किलिंग, फायरिंग, हत्या, अपहरण, एक्सटॉर्शन और नारकोटिक्स ट्रैफिकिंग जैसी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। तो आखिर गोल्डी बराड़ कौन है? उसकी अपराध की दुनिया में एंट्री कैसे हुई? उसका लॉरेंस बिश्नोई से कनेक्शन कैसे बना? सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में उसका नाम क्यों आया? और भारत का एक गैंगस्टर अमेरिका की एफबीआई की सबसे चर्चित मोस्ट वांटेड लिस्ट तक कैसे पहुंच गया? आइए, परत दर परत पूरी कहानी समझते हैं।
पुलिस अधिकारी के परिवार से आता है गोल्डी बराड़
गोल्डी बराड़ का असली नाम सतिंदरजीत सिंह है। उसका जन्म पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में हुआ था। उसके पिता पुलिस विभाग में अधिकारी थे। यानी जिस परिवार से गोल्डी आता था, वहां कानून और पुलिस व्यवस्था से परिचय पहले से था। लेकिन बाद में उसी परिवार का नाम पंजाब के सबसे चर्चित गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े एक ऐसे व्यक्ति के साथ जुड़ा, जिसे भारत सरकार ने आतंकवादी घोषित किया। गोल्डी के अपराध की दुनिया में आने की कहानी के पीछे उसके परिवार से जुड़े एक घटनाक्रम का भी जिक्र मिलता है।
चचेरे भाई की हत्या के बाद बदले की कहानी

रिपोर्टों के मुताबिक, गोल्डी बराड़ के चचेरे भाई गुरलाल बराड़ की अक्टूबर 2020 में चंडीगढ़ में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद गोल्डी ने कथित तौर पर अपने भाई की हत्या का बदला लेने की राह पकड़ी। इसी दौरान उसका संपर्क लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क से बढ़ा।
हालांकि, किसी व्यक्ति के अपराध की शुरुआत के पीछे व्यक्तिगत बदला कितना महत्वपूर्ण कारण था, इसे लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में अलग-अलग कहानियां हैं। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के बजाय उसके अपराधी नेटवर्क में प्रवेश से जुड़ी रिपोर्टेड कहानी के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके बाद गोल्डी का नाम एक के बाद एक आपराधिक मामलों में सामने आने लगा।
जब लॉरेंस बिश्नोई गैंग के संपर्क में आया बराड़
चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान गोल्डी बराड़ की पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति से जुड़े लोगों से जान-पहचान हुई। इसी दौरान वह SOPU (स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पंजाब यूनिवर्सिटी) से जुड़े छात्रों के संपर्क में आया और बाद में उसकी पहचान लॉरेंस बिश्नोई से हुई। उस समय बिश्नोई छात्र राजनीति में सक्रिय था और अपना प्रभाव बढ़ा रहा था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसी दौर में दोनों के बीच संपर्क मजबूत हुआ और आगे चलकर यह रिश्ता अपराध की दुनिया में चर्चित साझेदारी के रूप में सामने आया।
अमेरिका के न्याय विभाग के मुताबिक, 2026 में सामने आई संघीय अभियोग प्रक्रिया में गोल्डी बराड़ को बिश्नोई एंटरप्राइज का लीडर बताया गया है। अमेरिकी अभियोजन के मुताबिक, बिश्नोई और उसके सहयोगियों पर हत्या, शूटिंग, रंगदारी, अपहरण, ड्रग्स और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चलाने के आरोप हैं।
2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा गया
गोल्डी बराड़ 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा गया था। कनाडा पहुंचने के बाद उसका नाम भारत में सक्रिय बिश्नोई गैंग के विदेशी नेटवर्क के साथ जुड़ता गया। भारत में पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए वह धीरे-धीरे ऐसा आरोपी बन गया, जो देश से बाहर रहकर कथित तौर पर नेटवर्क को संचालित करता था। विदेश में बैठकर काम करने से उसे भारत की पुलिस से बचने और विदेश में मौजूद नेटवर्क का इस्तेमाल करने का फायदा मिला। जांच एजेंसियों ने अलग-अलग मामलों में इसी तरह की भूमिका के आरोप लगाए हैं।
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड ने पूरे देश में चर्चा में ला दिया

गोल्डी बराड़ का नाम सबसे ज्यादा सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद चर्चा में आया। 29 मई 2022 को पंजाब के मानसा जिले में पंजाबी गायक और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद गोल्डी बराड़ की ओर से सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने वाला पोस्ट सामने आया। इसके बाद पंजाब पुलिस और जांच एजेंसियों की जांच में उसका नाम प्रमुखता से सामने आया।
मामले की जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े कई लोगों की भूमिका सामने आई और गोल्डी बराड़ को विदेश से इस नेटवर्क का अहम हिस्सा बताया गया।
यहीं से गोल्डी बराड़ का नाम सिर्फ पंजाब के गैंगस्टर नेटवर्क तक सीमित नहीं रहा। राष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहचान एक ऐसे वांटेड गैंगस्टर के रूप में बनने लगी, जो विदेश में रहकर कथित तौर पर भारत में अपराधों को अंजाम देने वाले नेटवर्क से जुड़ा था।
मूसेवाला के बाद क्यों बढ़ी एजेंसियों की नजर?
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद जांच एजेंसियों का फोकस सिर्फ हत्या की साजिश तक सीमित नहीं रहा। जांच में गैंग के फाइनेंस, हथियारों की सप्लाई, विदेश में बैठे हैंडलर्स, शूटरों की भर्ती और रंगदारी जैसे पहलुओं की भी पड़ताल हुई।
भारतीय एजेंसियों के मुताबिक, विदेश में बैठे गैंगस्टर कथित तौर पर भारत में मौजूद युवाओं को शूटर के तौर पर इस्तेमाल करते थे। इस मॉडल में सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, हवाला और अन्य वित्तीय चैनल तथा हथियारों की सप्लाई जैसे माध्यमों की भूमिका जांच के दायरे में आई।
सलमान खान धमकी मामले में भी सामने आया नाम
गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई का नाम अभिनेता सलमान खान को मिली धमकियों से जुड़े मामलों में भी सामने आया है। जांच एजेंसियों ने ईमेल के जरिए भेजी गई धमकियों, सोशल मीडिया पर किए गए संदेशों और मुंबई में हुई कुछ घटनाओं की जांच की थी। इन मामलों की जांच के दौरान लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े सिंडिकेट का नाम भी सामने आया।
गैंगस्टर से आतंकवादी घोषित होने तक का सफर
गोल्डी बराड़ के खिलाफ सबसे बड़ा कानूनी कदम तब उठा, जब केंद्र सरकार ने उसे यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया। गृह मंत्रालय ने 1 जनवरी 2024 की अधिसूचना के जरिए उसे यूएपीए की चौथी अनुसूची में आतंकवादी के रूप में शामिल किया।
सरकार की अधिसूचना में आरोप लगाया गया कि गोल्डी बराड़ प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल यानी BKI से जुड़ा था। उस पर हत्या, धमकी, रंगदारी और सोशल मीडिया के जरिए हत्याओं की जिम्मेदारी लेने जैसे आरोपों के साथ-साथ सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक मंगाने तथा शूटरों को उपलब्ध कराने के आरोप भी लगाए गए। यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
गैंगस्टर और आतंकवादी घोषित किया जाना एक ही बात नहीं है। भारत में यूएपीए के तहत किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित किए जाने का मतलब है कि केंद्र सरकार ने कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे आतंकवादी की श्रेणी में रखा है। गोल्डी बराड़ के मामले में यह कार्रवाई 1 जनवरी 2024 को हुई।
बीकेआई से क्या है बराड़ का कनेक्शन?
बब्बर खालसा इंटरनेशनल यानी BKI भारत में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है। सरकारी एजेंसियों का आरोप है कि गोल्डी बराड़ और उसके सहयोगियों ने गैंगस्टर नेटवर्क और BKI जैसे आतंकी नेटवर्क के बीच कनेक्शन बनाया।
एनआईए की जांच में भी लॉरेंस बिश्नोई गैंग और BKI के बीच कथित आतंकी-गैंगस्टर गठजोड़ की जांच की गई है। 2025 में NIA ने इसी नेटवर्क से जुड़े एक मामले में 22वें आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। 2026 में मई महीने में इसी केस में 23वें आरोपी के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गई। NIA के मुताबिक, यह मामला लॉरेंस बिश्नोई गैंग और BKI की कथित आतंकी साजिश से जुड़ा है।
करणी सेना प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड में भी नाम
गोल्डी बराड़ का नाम सिर्फ सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में ही नहीं आया। दिसंबर 2023 में राजस्थान में करणी सेना प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एनआईए ने जून 2024 में इस मामले में गोल्डी बराड़ समेत 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
एनआईए के मुताबिक, रोहित गोदारा को इस साजिश का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया और गोल्डी बराड़ समेत अन्य लोगों की भूमिका का भी आरोप लगाया गया। एजेंसी ने यह भी कहा कि हत्या के बाद रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ ने इसकी जिम्मेदारी स्वीकार कर अन्य लोगों को धमकाने और रंगदारी वसूलने के लिए इसका इस्तेमाल किया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जांच एजेंसियों की नजर में गैंगस्टर नेटवर्क की कार्यप्रणाली का एक और पहलू सामने आया। पहले टारगेट किलिंग और उसके बाद उस घटना के नाम का इस्तेमाल कर धमकी और रंगदारी।
भारत के बाद अमेरिका में भी बढ़ा दबाव
अब कहानी भारत से निकलकर अमेरिका तक पहुंच गई है। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क की जांच शुरू की और 2026 में इसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई।
अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, बिश्नोई एंटरप्राइज से जुड़े मामलों में हत्या, रंगदारी, अपहरण, ड्रग तस्करी और हिंसक अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।
10 लाख डॉलर का इनाम
गोल्डी बराड़ को पकड़ने के लिए एफबीआई ने 10 लाख डॉलर तक का इनाम घोषित किया है। एफबीआई के मुताबिक, यह इनाम ऐसी सूचना देने वाले को दिया जा सकता है, जिससे उसकी गिरफ्तारी हो सके। एफबीआई ने यह भी कहा कि गोल्डी बराड़ को पकड़ना एजेंसी और उसके सहयोगियों की प्राथमिकताओं में शामिल है।
यानी जिस व्यक्ति की तलाश भारत में लंबे समय से हो रही थी, अब उसे पकड़ने के लिए अमेरिका की सबसे बड़ी संघीय जांच एजेंसी भी अपनी ताकत लगा रही है। जो लड़का 2017 में पढ़ने के लिए कनाडा गया था, आज दो देशों की बड़ी जांच एजेंसियों की तलाश में है। भारत में एनआईए की चार्जशीट, अमेरिका में FBI की वांटेड लिस्ट और सिर पर 1 मिलियन डॉलर का इनाम है। गोल्डी बराड़ कहां छिपा है, इसकी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं है, लेकिन अमेरिकी जांच एजेंसी उसकी तलाश कर रही है।
