फर्जी प्रमाणपत्रों से MBBS दाखिले की जांच तेज, बामणी में छाछनी पर थिरके धामी; इंदौर में मोदी की मिमिक्री पर सियासी घमासान

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उत्तराखंड,देहरादून/चमोली/इंदौर। उत्तराखंड में एमबीबीएस दाखिले से जुड़े कथित फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र मामले की जांच अब और विस्तृत हो गई है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चमोली दौरे के दौरान बामणी गांव में स्थानीय महिलाओं के साथ पारंपरिक छाछनी नृत्य का दृश्य चर्चा में रहा। वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तीनों घटनाओं ने रविवार को अलग-अलग कारणों से सुर्खियां बटोरीं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


MBBS दाखिला प्रकरण में SIT ने मेडिकल कॉलेजों से दस्तावेज कब्जे में लिए
एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रेणी के कथित फर्जी प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल कर आरक्षण का लाभ लेने के मामले में विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। रविवार को एसआईटी की दो टीमें मेडिकल कॉलेज श्रीनगर और मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी पहुंचीं। छुट्टी के दिन भी दोनों संस्थानों के संबंधित कार्यालय खुलवाकर प्रवेश के समय जमा किए गए दस्तावेजों को जांच के लिए अपने कब्जे में लिया गया।
जांच के दौरान छात्राओं की ओर से अलग-अलग दस्तावेजों में दिए गए पतों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दस्तावेजों में रिश्तेदारों के पते, जबकि कुछ में किराये के पते दर्ज हैं। ऐसे में एसआईटी संबंधित अभ्यर्थियों के मूल निवास और दस्तावेजों में दर्ज जानकारियों का सत्यापन करा रही है।
एसआईटी ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रेणी का प्रमाण-पत्र हासिल करने के लिए एसडीएम कार्यालयों में लगाए गए दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए हैं। इन दस्तावेजों की जांच के साथ ही प्रवेश के समय संबंधित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लगाए गए शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों का भी सत्यापन कराया जा रहा है। जांच एजेंसी इस पहलू को भी देख रही है कि कहीं प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े अन्य दस्तावेजों में भी अनियमितता तो नहीं हुई।
मामले में पुलिस के अनुसार तृप्ति, उसकी मां उमा रानी तथा खुशी, परी और स्वाति के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं और उनकी तलाश की जा रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। व्यापक स्तर पर करीब 350 वर्तमान और पूर्व एमबीबीएस छात्रों के दस्तावेजों की जांच की बात भी सामने आई है।
इस प्रकरण ने मेडिकल दाखिला प्रक्रिया में आरक्षित श्रेणियों के प्रमाण-पत्रों के सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। सरकार की ओर से सभी आरक्षित श्रेणियों के प्रमाण-पत्रों की गहन जांच की दिशा में कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बामणी में लोक संस्कृति के रंग में रंगे मुख्यमंत्री धामी
इधर चमोली दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को बदरीनाथ के निकट बामणी गांव पहुंचे। यहां उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने लोकगीतों के बीच छाछनी नृत्य प्रस्तुत किया।
महिलाओं की प्रस्तुति के बीच मुख्यमंत्री धामी भी उनके साथ नृत्य में शामिल हो गए। महिलाओं ने लोकगीतों के माध्यम से मां नंदा देवी का स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने लोक संस्कृति की इस प्रस्तुति के लिए महिलाओं का आभार जताया।
बदरीनाथ यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं से भी संवाद किया। उन्होंने बदरीनाथ धाम में पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री के बामणी गांव पहुंचने और स्थानीय महिलाओं के साथ छाछनी नृत्य में शामिल होने का वीडियो भी सामने आया, जिसे सोशल मीडिया पर लोगों ने साझा किया।
यह प्रसंग उत्तराखंड की पर्वतीय लोक परंपराओं और ग्रामीण जीवन से जुड़ा रहा। बामणी में महिलाओं की पारंपरिक प्रस्तुति के बीच मुख्यमंत्री का शामिल होना दौरे का सांस्कृतिक पक्ष बन गया।
इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ के मंच से शुरू हुआ सियासी विवाद
मध्य प्रदेश के इंदौर में 19 सितंबर को आयोजित कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी शुरू हो गई। कार्यक्रम के दौरान स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बोलने के अंदाज और हाव-भाव की नकल की। प्रदर्शन में प्रधानमंत्री के विदेशी नेताओं से संवाद और विदेश नीति सहित कुछ सार्वजनिक घटनाओं का संदर्भ लिया गया। सामने आए वीडियो में राहुल गांधी को प्रस्तुति के दौरान हंसते हुए देखा गया।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने इस प्रस्तुति की आलोचना की और आरोप लगाया कि मंच पर प्रधानमंत्री की दिवंगत मां को लेकर आपत्तिजनक संदर्भ दिया गया। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी मामले को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मां को राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
भाजपा नेताओं की ओर से कार्यक्रम के इस हिस्से को लेकर आपत्ति जताई गई, जबकि दूसरी ओर कार्यक्रम का मुख्य फोकस छात्रों से जुड़े मुद्दों पर था। राहुल गांधी ने शिक्षा, रोजगार, भर्ती में देरी और पेपर लीक जैसे विषयों पर छात्रों से संवाद किया तथा उन्हें अपनी बात रखने और सवाल पूछने की अपील की।
इस विवाद पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे राजनीतिक हास्य और मिमिक्री के संदर्भ में देखा है, जबकि भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत मां से जुड़े कथित संदर्भों पर आपत्ति दर्ज कराई है। इसलिए इस पूरे प्रकरण में मंच पर कही गई बातों और वीडियो के संदर्भ को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं।
एक ओर उत्तराखंड में एमबीबीएस दाखिले से जुड़े दस्तावेजों की जांच अब मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच चुकी है, दूसरी ओर चमोली में लोक संस्कृति की छाछनी ने मुख्यमंत्री के दौरे को सांस्कृतिक रंग दिया। वहीं इंदौर में छात्रों के मुद्दों पर आयोजित कार्यक्रम प्रधानमंत्री की मिमिक्री को लेकर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। तीनों घटनाएं शिक्षा व्यवस्था, उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं।


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