2026: साल 2025 अब अपनी विदाई की ओर है और महज पांच दिनों बाद 2026 का सूरज नई चुनौतियों के साथ दस्तक देने वाला है। लेकिन यह नया साल देश के छह कद्दावर केंद्रीय मंत्रियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होने वाला।

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दिल्ली के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज है कि 2026 में मोदी सरकार के आधे दर्जन मंत्रियों की ‘अग्निपरीक्षा’ होने वाली है।

मामला केवल राज्यसभा सीटों का नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर मोदी कैबिनेट में उनकी कुर्सी और वजूद का है। 2026 में राज्यसभा की 75 सीटों पर चुनावी घमासान होगा, जिससे न केवल संसद का समीकरण बदलेगा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल का चेहरा भी पूरी तरह बदल सकता है। आखिर वो कौन से मंत्री हैं जिनकी धड़कनें इस वक्त तेज हैं? क्या पीएम मोदी अपने इन पुराने साथियों पर फिर भरोसा जताएंगे या फिर नए चेहरों के लिए रास्ता साफ होगा? आइए जानते हैं उन 6 मंत्रियों की पूरी कुंडली, जिनकी किस्मत का फैसला अब आलाकमान के हाथों में है।

इन 6 दिग्गजों की सांसें अटकीं

मोदी सरकार के जिन आधा दर्जन मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल 2026 में समाप्त हो रहा है, उनमें बड़े नाम शामिल हैं। फेहरिश्त में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, रवनीत सिंह बिट्टू, जॉर्ज कुरियन, रामदास अठावले और रामनाथ ठाकुर का नाम है। इनमें से चार भाजपा के कोटे से हैं, एक जेडीयू के और एक सहयोगी दल आरपीआई (ए) के। अप्रैल, जून और नवंबर 2026 के महीनों में इन सबकी राज्यसभा सदस्यता खत्म हो जाएगी। नियम साफ है-यदि पार्टी इन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजती, तो मंत्रिमंडल से इनकी छुट्टी होना तय है। सबसे पहले 2 अप्रैल को रामदास अठावले और 9 अप्रैल को रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल खत्म होगा। इसके बाद जून में बिट्टू और कुरियन, जबकि साल के अंत में हरदीप पुरी और बीएल वर्मा का नंबर आएगा।

रामदास अठावले और रामनाथ ठाकुर

महाराष्ट्र और बिहार की सियासत में 2026 की शुरुआत काफी हलचल भरी होगी। महाराष्ट्र की सात सीटों में से एक पर रामदास अठावले का कब्जा है। बीजेपी उन्हें दो बार मौका दे चुकी है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी का प्रदर्शन शून्य रहा। ऐसे में क्या बीजेपी अपनी मजबूत स्थिति का फायदा उठाकर अठावले को फिर मौका देगी या किसी अपने कार्यकर्ता को भेजेगी? वहीं बिहार में जेडीयू नेता और कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। नीतीश कुमार उन्हें दो बार राज्यसभा भेज चुके हैं। बिहार के बदलते समीकरणों के बीच क्या नीतीश फिर से रामनाथ ठाकुर पर दांव लगाएंगे? अगर नहीं, तो केंद्र में जेडीयू का एक मंत्री पद खतरे में पड़ सकता है।

बिट्टू और कुरियन: ‘विशेष’ कोटे वाले मंत्रियों का क्या होगा?

रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को पीएम मोदी ने 2024 में हार के बावजूद अपनी कैबिनेट में जगह दी थी। बिट्टू पंजाब से अपनी सीट हार गए थे, फिर भी उन्हें राजस्थान से राज्यसभा भेजा गया। अब जून 2026 में उनकी यह सदस्यता खत्म हो रही है। राजस्थान की तीन सीटों में से दो बीजेपी जीत सकती है, लेकिन क्या बिट्टू को फिर मौका मिलेगा? यही हाल जॉर्ज कुरियन का है, जो मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया की खाली हुई सीट पर आए कुरियन का कार्यकाल भी जून में खत्म हो रहा है। अगर बीजेपी ने इन दोनों को फिर से संसद नहीं भेजा, तो इन्हें अपने मंत्री पद से हाथ धोना पड़ेगा।

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा की कुर्सी पर खतरा?

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर नवंबर 2026 में चुनाव होने हैं। यहां से मोदी सरकार के दो दिग्गज मंत्री-हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा सांसद हैं। इनका 6 साल का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है। यूपी विधानसभा में बीजेपी इतनी मजबूत है कि वह 8 सीटें आसानी से जीत सकती है, लेकिन रिटायर होने वाले बीजेपी सांसदों की लंबी लिस्ट (बृजलाल, नीरज शेखर, अरुण सिंह आदि) को देखते हुए हाईकमान के लिए फैसला लेना आसान नहीं होगा। क्या अनुभव के आधार पर हरदीप पुरी की कुर्सी बचेगी या फिर संगठन में पकड़ रखने वाले बीएल वर्मा बाजी मारेंगे?


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