वैदिक पंचांग के अनुसार, 04 अगस्त को सावन महीने का अंतिम सोमवार होगा। इसके अगले दिन यानी 05 अगस्त को सावन माह की पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। सावन माह के अंतिम सोमवार पर देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा की जाएगी।

वहीं, पूजा के समय देवों के देव महादेव का अभिषेक किया जाएगा। साथ ही सावन सोमवार का व्रत रखा जाएगा।✍️ अवतार सिंह बिष्ट | संपादक, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स

ज्योतिषियों की मानें तो सावन महीने में भगवान शिव की पूजा करने से साधक को जीवन में समस्त प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही साधक की मनचाही मुराद भी पूरी होती है। इस शुभ अवसर पर कालसर्प और पितृ दोष का निवारण भी किया जाता है।

साथ ही अशुभ ग्रहों की शांति पूजा भी की जाती है। अगर आप भी देवों के देव महादेव की कृपा पाना चाहते हैं, तो सावन माह के अंतिम सोमवार के दिन भक्ति भाव से देवों के देव महादेव की पूजा करें। वहीं, पूजा के समय भगवान शिव के नामों का मंत्र जप करें।

आज पूरा दिन पूरी रात पार करके कल सुबह 7 बजकर 24 मिनट तक इंद्र योग रहेगा। आज श्रावण 2025 के आखिरी सोमवार के दिन अगर आप नीचे दिए गए उपायों को करते हैं तो आपको जीवन के विभिन्न पक्षों में सफलता मिल सकती है।

सावन सोमवार उपाय

  • अगर बहुत कोशिशों के बावजूद भी आप अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में खुद को असहज महसूस कर रहे हैं, तो सावन के आखिरी सोमवार के दिन आपको शिव मन्दिर में जाकर भगवान को बेल का फल अर्पित करना चाहिए। साथ ही शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी कोशिशें सफल होंगी और आप अपने परिवार की जरूरतों को अच्छे से पूरा कर पायेंगे।
  • अगर आप अपनी धन-सम्पत्ति में वृद्धि करना चाहते हैं, तो सावन के आखिरी सोमवार के दिन इंद्र योग के दौरान स्नान आदि से निवृत्त होकर एक एकाक्षी नारियल लें और उसे अपने मन्दिर में रखें। अब भगवान की पूजा करें। भगवान को पहले पुष्प चढ़ाएं, भोग लगाएं और फिर अच्छे से धूप-दीप दिखाएं। भगवान की पूजा के बाद ठीक इसी प्रकार एकाक्षी नारियल की भी पूजा करें। पूजा के बाद उस एकाक्षी नारियल को मन्दिर में ही रखा रहनें दें। ये उपाय करने से आपके धन में बढ़ोत्तरी होगी।
  • अगर आप अपने मानसिक उलझन से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो सावन के आखिरी सोमवार के दिनदो मुखी रूद्राक्ष की पूजा करके उसे गले में धारण करें। साथ ही शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करें। ऐसा करने से आपको मानसिक उलझनों से मुक्ति मिलेगी और आपका मन प्रसन्न रहेगा।
  • अगर आप अपने बिजनेस की समृद्धि को बनाये रखना चाहते हैं, तो आज के दिन 11 कौड़ियों को मन्दिर में रखकर, उनकी उचित प्रकार से पूजा करें। पूजा के बाद उन्हें एक लाल कपड़े में बांधकर अपने ऑफिस के कैश बॉक्स में रख लें। साथ ही जो गृहणियां अपनी जमा-पूंजी में बढ़ोतरी करना चाहती हैं, वो भी ये उपाय कर सकती हैं। आप कौड़ियों की पूजा करके उन्हें अपने पैसे रखने वाले स्थान पर रख सकती हैं। ऐसा करने से आपके बिजनेस की समृद्धि बनी रहेगी। लिहाजा आपके बिजनेस में बढ़ोतरी होगी।
  • अगर आप अपने जीवन को बेहतर और सुखी बनाना चाहते हैं, तो सावन के आखिरी सोमवार के दिन शाम के समय घर में किसी एकांत जगह पर आसन बिछाकर बैठ जायें और शिव जी के इस मंत्र का 11 बार जप करें। मंत्र इस प्रकार है- ‘ऊँ शिवाय नमः ऊँ’ मंत्र जप के बाद भगवान शिव के दर्शन करें और उनका आशीर्वाद लें। ये उपाय करने से आपका जीवन बेहतर और सुखी बनेगा।
  • अगर आप समाज में अपना प्रभाव या रूतबा कायम करना चाहते हैं, तो आज शिवलिंग पर ‘ऊँ नमः शिवाय’ बोलते हुए धतूरा चढ़ाएं। साथ ही बेल पत्र भी चढ़ाएं। सावन के आखिरी सोमवार के दिन ऐसा करने से आप समाज में अपना प्रभाव और रूतबा कायम करने में कामयाब रहेंगे।
  • अगर आपकी शादी हो गयी है और आप अपने रिश्ते में प्यार को बरकरार रखना चाहते हैं, तो आज दूध में थोड़ा-सा केसर और फूल डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। सावन के आखिरी सोमवार के दिन ऐसा करने से आपके रिश्ते में प्यार बना रहेगा। इस उपाय को शादीशुदा लोगों के साथ ही वो लोग भी कर सकते हैं, जिनकी शादी अभी तक नहीं हुई है।
  • अगर आप बुरी नजर से अपना बचाव करना चाहते हैं, तो इसके लिये आज के दिन जौ के आटे की रोटियां बनाकर गाय के बछड़े को खिला दें और हाथ जोड़कर उसे प्रणाम करें। ऐसा करने से आपको बुरी नजर से मुक्ति मिलेगी।
  • अगर आप अपने लवमेट के साथ रिश्ते को मजबूत करना चाहते हैं तो सावन के आखिरी सोमवार के दिन दो गोमती चक्र लेकर मन्दिर में स्थापित करके, उनकी धूप-दीप, पुष्प आदि से पूजा करें और भगवान से अपने लवमेट के साथ रिश्ते को मजबूत करने के लिये प्रार्थना करें। इसके बाद गोमती चक्र को उठाकर एक लाल रंग की पोटली में बांधकर अपने पास रख लें। ऐसा करने से लवमेट के साथ आपके रिश्ते मजबूत होंगे।
  • अगर आपका मन हर समय किसी न किसी बात को लेकर अशांत रहता है, तो इसके लिये सावन के आखिरी सोमवार के दिन शाम के समय भगवान शिव की प्रतिमा के आगे दीपक जलाकर, आसन बिछाकर बैठ जाएं और रुद्राक्ष की माला से “ऊँ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जप करें, लेकिन अगर आपके पास रुद्राक्ष की माला उपलब्ध ना हो, तो आप करमाला पर गिनकर 108 बार मंत्र का जप कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके मन से सारी अशांति दूर हो जायेगी, लिहाजा आपका मन प्रफुल्लित रहेगा।

भगवान शिव के 108 नाम

  1. ॐ महाकाल नमः
  2. ॐ रुद्रनाथ नमः
  3. ॐ भीमशंकर नमः
  4. ॐ नटराज नमः
  5. ॐ प्रलेयन्कार नमः
  6. ॐ चंद्रमोली नमः
  7. ॐ डमरूधारी नमः
  8. ॐ चंद्रधारी नमः
  9. ॐ भोलेनाथ नमः
  10. ॐ कैलाश पति नमः
  11. ॐ भूतनाथ नमः
  12. ॐ नंदराज नमः
  13. ॐ नन्दी की सवारी नमः
  14. ॐ ज्योतिलिंग नमः
  15. ॐ मलिकार्जुन नमः
  16. ॐ भीमेश्वर नमः
  17. ॐ विषधारी नमः
  18. ॐ बम भोले नमः
  19. ॐ विश्वनाथ नमः
  20. ॐ अनादिदेव नमः
  21. ॐ उमापति नमः
  22. ॐ गोरापति नमः
  23. ॐ गणपिता नमः
  24. ॐ ओंकार स्वामी नमः
  25. ॐ ओंकारेश्वर नमः
  26. ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः
  27. ॐ भोले बाबा नमः
  28. ॐ शिवजी नमः
  29. ॐ शम्भु नमः
  30. ॐ नीलकंठ नमः
  31. ॐ महाकालेश्वर नमः
  32. ॐ त्रिपुरारी नमः
  33. ॐ त्रिलोकनाथ नमः
  34. ॐ त्रिनेत्रधारी नमः
  35. ॐ बर्फानी बाबा नमः
  36. ॐ लंकेश्वर नमः
  37. ॐ अमरनाथ नमः
  38. ॐ केदारनाथ नमः
  39. ॐ मंगलेश्वर नमः
  40. ॐ अर्धनारीश्वर नमः
  41. ॐ नागार्जुन नमः
  42. ॐ जटाधारी नमः
  43. ॐ नीलेश्वर नमः
  44. ॐ जगतपिता नमः
  45. ॐ मृत्युन्जन नमः
  46. ॐ नागधारी नमः
  47. ॐ रामेश्वर नमः
  48. ॐ गलसर्पमाला नमः
  49. ॐ दीनानाथ नमः
  50. ॐ सोमनाथ नमः
  51. ॐ जोगी नमः
  52. ॐ भंडारी बाबा नमः
  53. ॐ बमलेहरी नमः
  54. ॐ गोरीशंकर नमः
  55. ॐ शिवाकांत नमः
  56. ॐ महेश्वराए नमः
  57. ॐ महेश नमः
  58. ॐ संकटहारी नमः
  59. ॐ महेश्वर नमः
  60. ॐ रुंडमालाधारी नमः
  61. ॐ जगपालनकर्ता नमः
  62. ॐ पशुपति नमः
  63. ॐ संगमेश्वर नमः
  64. ॐ दक्षेश्वर नमः
  65. ॐ घ्रेनश्वर नमः
  66. ॐ मणिमहेश नमः
  67. ॐ अनादी नमः
  68. ॐ अमर नमः
  69. ॐ आशुतोष महाराज नमः
  70. ॐ विलवकेश्वर नमः
  71. ॐ अचलेश्वर नमः
  72. ॐ ओलोकानाथ नमः
  73. ॐ आदिनाथ नमः
  74. ॐ देवदेवेश्वर नमः
  75. ॐ प्राणनाथ नमः
  76. ॐ शिवम् नमः
  77. ॐ महादानी नमः
  78. ॐ शिवदानी नमः
  79. ॐ अभयंकर नमः
  80. ॐ पातालेश्वर नमः
  81. ॐ धूधेश्वर नमः
  82. ॐ सर्पधारी नमः
  83. ॐ त्रिलोकिनरेश नमः
  84. ॐ हठ योगी नमः
  85. ॐ विश्लेश्वर नमः
  86. ॐ नागाधिराज नमः
  87. ॐ सर्वेश्वर नमः
  88. ॐ उमाकांत नमः
  89. ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः
  90. ॐ त्रिकालदर्शी नमः
  91. ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः
  92. ॐ महादेव नमः
  93. ॐ गढ़शंकर नमः
  94. ॐ मुक्तेश्वर नमः
  95. ॐ नटेषर नमः
  96. ॐ गिरजापति नमः
  97. ॐ भद्रेश्वर नमः
  98. ॐ त्रिपुनाशक नमः
  99. ॐ निर्जेश्वर नमः
  100. ॐ किरातेश्वर नमः
  101. ॐ जागेश्वर नमः
  102. ॐ अबधूतपति नमः
  103. ॐ भीलपति नमः
  104. ॐ जितनाथ नमः
  105. ॐ वृषेश्वर नमः
  106. ॐ भूतेश्वर नमः
  107. ॐ बैजूनाथ नमः
  108. ॐ नागेश्वर नमः