नाबार्ड पोषित पॉलीहाउस योजना में घोटाले का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग

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रुद्रपुर। कुमाऊं मंडल शिवसेना प्रमुख पूरन चन्द्र भट्ट ने नाबार्ड पोषित पॉलीहाउस योजना में बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने शपथ पत्र के माध्यम से आरोप लगाया कि उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में संलिप्त हैं और किसानों की जमा धनराशि अब तक वापस नहीं हो सकी है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
शपथ पत्र के अनुसार योजना में करीब 450 किसानों ने धनराशि जमा की थी। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए पूरन चन्द्र भट्ट ने दावा किया कि विभागीय अधिकारियों, निदेशक स्तर के अधिकारियों तथा अन्य जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि किसानों ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
भट्ट ने आरोप लगाया कि बाद में केवल कार्यदायी संस्था से पॉलीहाउस निर्माण कार्य वापस लिया गया, जबकि किसानों को उनकी जमा राशि नहीं मिली। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की जांच मजिस्ट्रेट या सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को पदों से हटाया जाए।
शपथ पत्र के साथ आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज, प्रथम अपील पत्र, विभागीय पत्राचार तथा नोटरी सत्यापित प्रतियां भी संलग्न की गई हैं। मामले को लेकर किसानों में नाराजगी बताई जा रही है।


शपथ पत्र के अनुसार योजना में करीब 450 किसानों ने धनराशि जमा की थी। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए पूरन चन्द्र भट्ट ने दावा किया कि विभागीय अधिकारियों, निदेशक स्तर के अधिकारियों तथा अन्य जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि किसानों ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
भट्ट ने आरोप लगाया कि बाद में केवल कार्यदायी संस्था से पॉलीहाउस निर्माण कार्य वापस लिया गया, जबकि किसानों को उनकी जमा राशि नहीं मिली। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की जांच मजिस्ट्रेट या सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को पदों से हटाया जाए।
शपथ पत्र के साथ आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज, प्रथम अपील पत्र, विभागीय पत्राचार तथा नोटरी सत्यापित प्रतियां भी संलग्न की गई हैं। मामले को लेकर किसानों में नाराजगी बताई जा रही है।

नाबार्ड पोषित पॉलीहाउस योजना में सामने आए कथित घोटाले ने किसानों की उम्मीदों और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरटीआई दस्तावेजों और शपथ पत्र में लगाए गए आरोप सही हैं, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि किसानों के विश्वास के साथ बड़ा छल है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि शिकायतों के बावजूद किसानों को राहत नहीं मिली। सरकार को चाहिए कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। दोषियों पर कठोर कार्रवाई और प्रभावित किसानों को शीघ्र न्याय व धनवापसी सुनिश्चित करना अब प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।


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