B MC Mumbai mayor seat dispute: 227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है। एनडीए गठबंधन के पास कुल 117 सीटें हैं, जिससे बहुमत का आंकड़ा पार हो गया है। हालांकि, इस जीत के बीच एक अहम पेच भी सामने आया है।

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बीजेपी ने 88 वार्डों में जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है। वहीं शिवसेना (एकनाथ शिंदे) ने 29 वार्डों में जीत हासिल की है। ऐसे में शिवसेना (शिंदे गुट) के समर्थन के बिना बीजेपी के लिए बीएमसी में सत्ता संभालना आसान नहीं माना जा रहा।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

शिंदे गुट दिखा सकता है सख्ती

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, इस स्थिति का फायदा एकनाथ शिंदे उठा सकते हैं। माना जा रहा है कि वे मेयर पद के लिए बीजेपी पर दबाव बना सकते हैं। शिंदे गुट के नेताओं ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि मुंबई का मेयर उनकी पार्टी से होना चाहिए।

शिंदे गुट का तर्क है कि बीएमसी लंबे समय तक अविभाजित शिवसेना के पास रही है और यह बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत से जुड़ा विषय है।

मेयर पर सवाल, शिंदे का संभला हुआ जवाब

नतीजे आने के बाद एकनाथ शिंदे ने मेयर पद को लेकर कोई साफ बयान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता विकास है और महायुति के सभी सहयोगी मिलकर मुंबई के हित में फैसला करेंगे।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीच का रास्ता निकाला जा सकता है। चर्चा है कि मेयर का कार्यकाल आपस में बांटने का फॉर्मूला सामने आ सकता है, जिसमें कुछ समय के लिए शिंदे गुट और बाकी समय के लिए बीजेपी को मौका दिया जाए।

ठाणे फैक्टर से बदलेगा खेल?

इस पूरे समीकरण में ठाणे का फैक्टर भी अहम माना जा रहा है। शिंदे के गढ़ ठाणे में उनकी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है। 131 सदस्यीय ठाणे नगर निगम में शिंदे गुट 70 से ज्यादा सीटों के साथ बहुमत में है, जबकि बीजेपी वहां काफी पीछे है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर शिंदे बिना शर्त मेयर पद बीजेपी को दे देते हैं, तो इससे उनके कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जा सकता है। इसलिए डिप्टी मेयर, स्टैंडिंग कमेटी और अहम समितियों को लेकर पर्दे के पीछे बातचीत तय मानी जा रही है।

आने वाले दिन होंगे अहम

बीएमसी में सत्ता तो एनडीए के पास है, लेकिन मेयर पद को लेकर खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि मुंबई की कमान किसके हाथ में जाती है।


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