हल्द्वानी। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया द्वारा कुमाऊँ परिक्षेत्र पुलिस मुख्यालय, नैनीताल से मांगी गई सूचनाओं में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) कार्यालय ने 10 बिंदुओं में मांगी गई जानकारी के जवाब में अधिकांश सूचनाओं को “इस कार्यालय में धारित नहीं है” बताकर उपलब्ध कराने से इंकार किया, जबकि सीमित जानकारी साझा की गई।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
आरटीआई आवेदन 9 मार्च 2026 को प्रस्तुत किया गया था, जो 12 मार्च को आईजी कार्यालय में प्राप्त हुआ। लोक सूचना अधिकारी एवं प्रधान लिपिक पवन बोरा ने 24 मार्च 2026 को पत्र संख्या सीओके-सू.अ.-27/2026 एवं सीओके-सू.अ.-28/2026 के माध्यम से उत्तर भेजा। विभाग ने कहा कि मांगी गई कई सूचनाएं कुमाऊँ परिक्षेत्र के विभिन्न जनपदों से संबंधित हैं, इसलिए संबंधित जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालयों से अलग-अलग सूचना प्राप्त की जा सकती है।
772 हिस्ट्रीशीटरों का रिकॉर्ड सार्वजनिक
पुलिस मुख्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तक कुमाऊँ परिक्षेत्र में कुल 772 हिस्ट्रीशीटर दर्ज हैं। इनमें सबसे अधिक ऊधमसिंहनगर में 473, नैनीताल में 154, पिथौरागढ़ में 56, चम्पावत में 41, तथा अल्मोड़ा और बागेश्वर में 24-24 हिस्ट्रीशीटर दर्ज हैं।
विभागीय चार्ट के अनुसार वर्ष की शुरुआत में 706 सक्रिय, 66 निष्क्रिय, 190 श्रेणी ‘अ’ और 1 श्रेणी ‘ब’ का हिस्ट्रीशीटर दर्ज था। वर्ष के दौरान केवल एक निरोधात्मक कार्रवाई दर्ज की गई, जबकि नए हिस्ट्रीशीटर खाते खोलने, खाता नष्ट करने, हस्तांतरण या पुनः बंदी जैसे कॉलम में शून्य प्रविष्टि दर्ज की गई।
गैंगस्टर एक्ट से जुड़ी सूचना उपलब्ध नहीं
आरटीआई के उत्तर में पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया कि गैंगस्टर एक्ट के तहत चिन्हित अभियुक्तों की संख्या संबंधी सूचना आईजी कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। दूसरे प्रकरण में भी विभाग ने बिंदु 1 से 3 तथा 5 से 10 तक की सूचनाएं कार्यालय में उपलब्ध न होने की बात कही, जबकि केवल बिंदु 4 की आंशिक जानकारी दी गई।
प्रथम अपील दायर
आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया ने विभाग द्वारा दी गई जानकारी को अधूरी बताते हुए प्रथम अपील दायर कर दी है। उनका कहना है कि 10 बिंदुओं पर मांगी गई सूचना का बिंदुवार उत्तर नहीं दिया गया और कई मामलों में केवल “सूचना कार्यालय में धारित नहीं है” लिखकर जवाब दे दिया गया।
आरटीआई उत्तर पर उठे सवाल
प्रथम अपील में यह भी उल्लेख किया गया है कि:
10 बिंदुओं पर प्रश्नवार उत्तर उपलब्ध नहीं कराया गया।
अधिकांश सूचनाओं को “कार्यालय में धारित नहीं” बताकर टाल दिया गया।
सूचना न देने के लिए आरटीआई अधिनियम की किसी धारा का उल्लेख नहीं किया गया।
मूल आरटीआई आवेदन की प्रति उत्तर के साथ संलग्न नहीं की गई।
आवेदक को अलग-अलग जनपदों में अलग आरटीआई लगाने की सलाह दी गई।
सभी सूचनाएं प्रमाणित एवं पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं कराई गईं।
हेमंत सिंह गौनिया ने प्रथम अपील में मांग की है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अनुरूप सभी 10 बिंदुओं की संपूर्ण, प्रमाणित एवं बिंदुवार सूचना उपलब्ध कराई जाए तथा जिन सूचनाओं को रोका गया है, उनके संबंध में विधिसम्मत कारण स्पष्ट किए जाएं।
