श्रावण के प्रथम सोमवार की दिव्य महिमा: चंद्रशेखर महादेव की आराधना से मिलता है मन की शांति और समृद्धि

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श्रावण के प्रथम सोमवार की दिव्य महिमा: चंद्रशेखर महादेव की आराधना से मिलता है मन की शांति और समृद्धि
पंडित श्री श्री 1008 त्रिलोचन पनेरु ने बताया श्रावण सोमवार का आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व
रुद्रपुर। कर्क संक्रांति के अनुसार श्रावण मास के प्रथम सोमवार का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इस पावन अवसर पर प्रसिद्ध धर्माचार्य पंडित श्री श्री 1008 त्रिलोचन पनेरु ने श्रद्धालुओं को श्रावण मास की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना का श्रेष्ठ अवसर है। श्रद्धा, संयम और भक्ति से की गई उपासना मन, बुद्धि और आत्मा को नई ऊर्जा प्रदान करती है।
पंडित श्री श्री 1008 त्रिलोचन पनेरु ने बताया कि सोमवार को संस्कृत में ‘चंद्रवार’ भी कहा जाता है, क्योंकि ‘सोम’ का अर्थ चंद्रमा है। शास्त्रों के अनुसार “उमया सहितः इति सोमः” अर्थात जो माता उमा के साथ विराजमान हैं, वही भगवान शिव ‘सोम’ कहलाते हैं। इसलिए सोमवार शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का पवित्र दिवस माना जाता है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


उन्होंने बताया कि भगवान शिव को चंद्रशेखर और सोमेश्वर इसलिए कहा जाता है क्योंकि प्रजापति दक्ष के श्राप से क्षीण हो रहे चंद्रदेव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें अपने मस्तक पर धारण कर लिया। तभी से भगवान शिव चंद्रशेखर नाम से पूजे जाते हैं और भक्तों को मानसिक शांति, आरोग्य तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
पंडित श्री श्री 1008 त्रिलोचन पनेरु ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। जिन लोगों को मानसिक तनाव, अशांति या चंद्र संबंधी दोषों का सामना करना पड़ रहा हो, उन्हें श्रावण सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करना चाहिए। इससे मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को भगवान भोलेनाथ के चंद्रशेखर स्वरूप का ध्यान करें, शिव परिवार की पूजा करें तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और सेवा का संदेश फैलाएं।
हर-हर महादेव! जय शिव शंभू!


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