रंगदारी और भू-माफिया का काला खेल उजागर, कांग्रेस पर संरक्षण देने के गंभीर आरोप

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रुद्रपुर,काशीपुर जबरन कब्जा किए गए फ्लैट को छोड़ने के एवज में 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद काशीपुर में भू-माफिया नेटवर्क पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस ने बिल्डर शक्ति प्रकाश अग्रवाल एवं उसके साथी सत्यम अग्रवाल के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


स्टेडियम रोड, विनायक विला निवासी मनोज जैन द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार वर्ष 2022 में उनकी पत्नी रितु जैन ने वेदांत हाइट्स, कटोराताल स्थित एक 3 बीएचके फ्लैट खरीदा था। आपसी व्यवसायिक संबंधों के कारण फ्लैट की मूल सेल डीड व चाबी आरोपी के पास रखी गई, जिसका फायदा उठाकर बाद में फ्लैट पर अवैध कब्जा करा दिया गया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी और उसी फ्लैट में दफन करने जैसे गंभीर आरोप भी शिकायत में दर्ज हैं।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि फ्लैट की रजिस्ट्री व कब्जा देने के नाम पर 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगी जा रही है। पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच प्रारंभ कर दी है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी पूर्व पालिका अध्यक्ष शमशुद्दीन ने पत्रकार वार्ता में शक्ति अग्रवाल पर अवैध कब्जा, तोड़फोड़ और जान से मारने की धमकी जैसे आरोप लगाए थे। रामनगर रोड प्रतापपुर स्थित भूमि पर रात के अंधेरे में सैकड़ों लोगों व भारी मशीनरी के जरिए चहारदीवारी गिराने का आरोप भी सामने आ चुका है।
कांग्रेस पर जोरदार हमला, भू-माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप
इस पूरे प्रकरण को लेकर रुद्रपुर और काशीपुर क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी पर जबरदस्त हमला बोला जा रहा है। आरोप है कि कांग्रेस के कुछ नेता खुलेआम भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं और कलेक्ट्रेट परिसर जैसे संवेदनशील प्रशासनिक स्थल पर अधिकारियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग कर दबाव बना रहे हैं।
प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के उल्लंघन पर ही कॉलोनाइजरों की रजिस्ट्री पर रोक लगाई गई है, लेकिन कांग्रेस नेता भू-माफियाओं के साथ खड़े होकर गलत नक्शे, भ्रामक दस्तावेज और झूठी जानकारियों के आधार पर अधिकारियों को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।
गरीबों के नाम पर जुलूस निकालकर जो “कांग्रेसी रोना” रोया जा रहा है, उसे प्रशासनिक सूत्र सीधे तौर पर भू-माफियाओं की साजिश बता रहे हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि जो लोग वर्षों से अवैध कॉलोनियां काटते रहे, वही आज खुद को गरीबों का मसीहा बताकर प्राधिकरण पर दबाव बना रहे हैं।
जिला विकास प्राधिकरण की कार्रवाई की सराहना
इस पूरे घटनाक्रम में जिला विकास प्राधिकरण की कार्यवाही की व्यापक प्रशंसा हो रही है। प्राधिकरण ने बिना दबाव में आए नियमों के अनुसार अवैध कॉलोनियों, गलत रजिस्ट्री और फर्जी नक्शों पर सख्ती दिखाई है। प्रशासन का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे उसके पीछे कितना ही राजनीतिक संरक्षण क्यों न हो।
स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भू-माफियाओं, उनके राजनीतिक संरक्षकों और दबाव बनाने वाले तत्वों के आगे प्रशासन झुकने वाला नहीं है और उत्तराखंड की मूल भावना के अनुरूप कानून का राज कायम रहेगा।
सवाल यही है—
क्या यही वह उत्तराखंड है, जिसकी कल्पना राज्य आंदोलनकारियों ने की थी?
या फिर भू-माफियाओं और उनके राजनीतिक संरक्षकों का दबाव ही अब राजनीति की पहचान बन चुका है?
जनता अब जवाब मांग रही है।


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