प्रवचन से नहीं, डर से याद आया भगवान—उत्तराखंड ड्राइवर ने मार ली बाज़ी!”

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एक बार एक ब्राह्मण मर गया और स्वर्ग की वेटिंग लाइन में खड़ा था।
उसके आगे काला चश्मा, जींस और लेदर जैकेट पहने एक ड्राइवर खड़ा था।
धर्मराज ने ड्राइवर से पूछा: कौन हो तुम?
ड्राइवर बोला: मैं उत्तराखंड टैक्सी रोडवेज का ड्राइवर हूँ।
धर्मराज: ये लो सोने की शाल, और अंदर जाकर गोल्डन रूम में आराम करो!
फिर धर्मराज ने ब्राह्मण से पूछा: तुम कौन हो?
ब्राह्मण बोला: मैं ब्राह्मण हूँ, 40 साल से लोगों को भगवान का ज्ञान दे रहा था।
धर्मराज: ये लो सूती वस्त्र, और अंदर जाओ।
ब्राह्मण नाराज़ होकर बोला: ये कैसा न्याय है? जो आदमी तेज गाड़ी चलाता है, उसे सोने की शाल… और मैं, जिसने पूरी जिंदगी भगवान का नाम सिखाया, मुझे सूती कपड़े?
धर्मराज मुस्कुराए और बोले:
“परिणाम देखे जाते हैं, पद नहीं!”
ब्राह्मण हैरान: कैसे?
धर्मराज बोले:
“जब तुम प्रवचन देते थे, लोग सो जाते थे…
लेकिन ये ड्राइवर जब दारू पीकर तेज गाड़ी चलाता है, तो इसकी गाड़ी में बैठे सारे लोग सच्चे दिल से भगवान का नाम लेने लगते हैं…
और जब तक मंजिल नहीं आ जाती, कोई सोता नहीं—सब ‘हे भगवान’ ही जपते रहते हैं!”
इसलिए याद रखो:
यहाँ पर Performance देखी जाती है… Position नहीं!

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


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