

औढरदानी कहलाने वाले भगवान शिव के इस पावन धाम के कपाट कल 22 अप्रैल को खोल दिये जाएंगे. इसके बाद श्रद्धालु इस चमत्कारी ज्योतिर्लिंग का दर्शन और पूजन पूरे छह महीने तक कर सकेंगे. यदि आप भी केदारनाथ मंदिर में जाकर भगवान शिव के सामने अपनी हाजिरी लगाने की सोच रहे हैं तो आपको यहां जाने से पहले इसके धार्मिक महत्व को जरूर जानना चाहिए.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
1. भगवान शिव के इस दिव्य धाम के बारे में मान्यता है कि कभी इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने नर और नारायण रूप में अवतार लिया था. पौराणिक मान्यता के अनुसार नर और नारायण दोनों ने कठिन तप करके भगवान शिव को प्रसन्न किया और उनसे उसी स्थान लिंग रूप में स्थापित होने का वरदान मांगा. जिसके बाद भगवान शिव वहीं स्थापित हो गये. मान्यता है कि जिस स्थान पर शिव स्थापित हुए थे, वह क्षेत्र राजा केदार का था. ऐसे में भगवान शिव के इस पावन धाम का नाम केदारनाथ पड़ा.
2. शैव परंपरा से जुड़े लोगों के लिए केदारनाथ धाम की तीर्थ यात्रा कैलाश मानसरोवर यात्रा की तरह महत्वपूर्ण मानी जाती है. हिंदू मान्यता के अनुसार केदारनाथ धाम के दर्शन और पूजन के बगैर बद्रीनाथ धाम की यात्रा अधूरी मानी जाती है.
3. पौराणिक मान्यता के अनुसार केदारनाथ अर्द्धज्योतिर्लिंग हैं. उत्तराखंड स्थित केदारनाथ और नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ के मिलने पर एक पूर्ण शिवलिंग बनता है.
4. महाभारत की कथा के अनुसार पांडवों ने स्वर्ग की यात्रा करते समय पुण्य की प्राप्ति और पाप से मुक्ति के लिए शिव दर्शन के लिए प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद उन्हें महादेव के दर्शन नहीं हो पा रहे थे. मान्यता है कि पांडवों को जब महादेव भैंसे के रूप में दिखाई दिये तो उन्होंने उसे पकड़ना चाहा, लेकिन उनके हाथ में सिर्फ उसका कूबड़ आया है. यही कूबड़ यहां पर पर केदारनाथ धाम के रूप में स्थित है.
5. हिंदू मान्यता के अनुसार पांडवों द्वारा बनवाया गया केदारनाथ भगवान का मंदिर करीब 400 साल तक हिमालय में बर्फ के नीचे दबा रहा. जिसका बाद में आदि शंकराचार्य ने जीर्णोद्धार करवाया था.
6. सर्दियों में जब केदारनाथ धाम के कपाट 6 महीनों के लिए बंद होते हैं तो मंदिर के भीतर एक बड़ा सा दीया जलाया जाता है, जो मंदिर के बंद होने के बाद पूरे 6 महीने तक जलता रहता है. मंदिर के पट बंद होने के बाद भगवान केदारनाथ की चल प्रतिमा को उखीमठ लाकर स्थापित किया जाता है. जिसके बाद यहीं पर उनकी पूजा-अर्चना पूरे 6 महीने तक चलती है.
7. पौराणिक मान्यता के अनुसार भविष्य में एक समय ऐसा आएगा जब नर और नारायण नाम के पर्वत एक हो जाएंगे और बद्रीनाथ धाम का रास्ता पूरा बंद हो जाएगा. इसके बाद बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ धाम लुप्त हो जाएंगें. फिर भगवान शिव की पूजा जोशीमठ के पास स्थित ‘भविष्य केदार’ नामक स्थान पर होगी.
8. इस साल केदारनाथ मंदिर के कपार्ट 22 अप्रैल 2026, बुधवार के दिन आम लोगों के दर्शन और पूजन के लिए खोल दिये जाएंगे. केदारनाथ धाम की इस पावन यात्रा की शुरुआत के लिए इस दिव्य धाम को करीब 51 क्विंटल फूलों से सजाया गया है, जिन्हें वहां तक 75 खच्चरों पर लादकर पहुंचाया गया है.
9. केदारनाथ धाम पर पहुंचने से पहले शिवभक्त गौरीकुंड में स्नान करते हैं. भगवान शिव के इस दिव्य धाम पर ज्योतिर्लिंग को प्रतिदिन पवित्र जल से स्नान कराया जाता है. फिर उस पर शुद्ध घी का लेप लगाया जाता है. फिर विधि-विधान से धूप-दीप आदि से पूजा एवं आरती होती है. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग में हर शाम को भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है.
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10. केदारनाथ धाम जाने के लिए मई से अक्टूबर महीने का समय उत्तम माना जाता है. यहां ऋषिकेश से कार या बस के जरिए फिर बाद में पैदल यात्रा करनी होती है. साथ ही साथ यहां पर मौसम भी अचानक से बिगड़ सकता है. ऐसे में सेहत सही रहने पर ही यह कठिन यात्रा करें. केदारनाथ की यात्रा पर निकलने से पहले अपने खाने-पीने, रहने-पहनने के लिए सामान के साथ अपनी दवा जरूर रखें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट इसकी पुष्टि नहीं करता है.)✧ धार्मिक और अध्यात्मिक




