उत्तराखंड/देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों में पराजय का सामना कर रही कांग्रेस अब मिशन-2027 के लिए सीटवार राजनीतिक गणित साधने में जुट गई है। वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने भी संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करते हुए आगामी चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। दोनों प्रमुख दलों की तैयारियों से साफ है कि विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा से काफी पहले ही उत्तराखंड की राजनीति में चुनावी माहौल बनने लगा है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
कांग्रेस नेतृत्व इस बार प्रत्याशी चयन को लेकर पहले से अधिक सतर्क नजर आ रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश नेतृत्व की सहमति से पार्टी हाईकमान की ओर से विधानसभा क्षेत्रों को लेकर सर्वे कराया जा रहा है। इस सर्वे में संभावित प्रत्याशियों की जमीनी पकड़, क्षेत्र में सक्रियता, संगठन के साथ तालमेल, जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता तथा स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का आकलन किया जा रहा है।
कांग्रेस की रणनीति फिलहाल करीब 40 विधानसभा सीटों को लेकर अपेक्षाकृत जल्दी स्थिति स्पष्ट करने की है। सूत्रों के अनुसार नवंबर के आखिर तक इन सीटों पर मौजूदा विधायकों और संभावित प्रत्याशियों में से चुनावी तैयारी के लिहाज से मजबूत चेहरों को संकेत दिए जा सकते हैं। शेष 30 सीटों को अधिक संघर्ष वाली अथवा अटकी हुई सीटों के रूप में देखते हुए उन पर बाद में विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी।
70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस के वर्तमान में 20 विधायक हैं। इनमें दो सीटें पार्टी ने उपचुनाव के माध्यम से हासिल की हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मौजूदा विधायकों वाली सीटों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उन विधानसभा क्षेत्रों में वापसी करने की है, जहां पिछले चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
पार्टी इसके लिए विधानसभा क्षेत्रवार राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन कर रही है। बेरोजगारी, पलायन, भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे, महिला सुरक्षा, कानून व्यवस्था और स्थानीय विकास जैसे विषयों को चुनावी रणनीति का आधार बनाने की तैयारी है। इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में जातीय एवं सामाजिक समीकरण, मतदाताओं का रुझान, पार्टी संगठन की स्थिति और संभावित दावेदारों की सक्रियता को भी सर्वे में शामिल किया जा रहा है।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार कुछ समय पहले राज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों की स्थिति को लेकर भी सर्वे कराया गया था। इसमें कांग्रेस को बढ़त के संकेत मिलने का दावा किया गया है। इसी के बाद पार्टी नेतृत्व ने प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। हालांकि इस बार पार्टी का लक्ष्य केवल अधिक संख्या में टिकट के दावेदारों को मैदान में उतारना नहीं, बल्कि ऐसे उम्मीदवारों की तलाश करना है जिनके पास चुनाव जीतने की वास्तविक क्षमता हो।
इसी रणनीति के तहत मौजूदा कांग्रेस विधायकों के प्रदर्शन का भी आकलन कराया जा रहा है। जिन विधानसभा क्षेत्रों में वर्तमान विधायक की स्थिति मजबूत मानी जाएगी, वहां उन्हें आगे बढ़ाया जा सकता है, जबकि कमजोर प्रदर्शन वाली सीटों पर नए विकल्प तलाशे जाएंगे। इसी तरह पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके नेताओं की मौजूदा सक्रियता और जनता के बीच उनकी पकड़ को भी परखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार नवंबर के अंत तक मौजूदा 20 विधायकों के साथ ही पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे सक्रिय नेताओं में से लगभग 20 नेताओं को चुनावी तैयारी में जुटने के संकेत दिए जा सकते हैं। हालांकि अंतिम टिकट वितरण पार्टी की चुनावी प्रक्रिया और केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय के बाद ही होगा।
भाजपा ने संगठन को चुनावी मोड में किया सक्रिय
दूसरी ओर भाजपा ने भी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक गतिविधियों को गति दे दी है। पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं, जिला स्तर के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और विभिन्न अभियानों से जुड़े नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में उत्तराखंड प्रभारी राम माधव और सह-प्रभारी अरविंद मेनन की मौजूदगी ने इसे चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण बना दिया।
बैठक में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने, विभिन्न अभियानों की प्रगति की समीक्षा करने तथा प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से लगातार जनता के संपर्क में रहने और सरकार की योजनाओं तथा पार्टी के अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया।
बैठक के दौरान भाजपा नेता बांसुरी स्वराज ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत को लेकर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की मेहनत को चुनावी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। भाजपा नेतृत्व का जोर फिलहाल संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने और चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क तैयार करने पर दिखाई दे रहा है।
उत्तराखंड में भाजपा जहां सत्ता में वापसी की चुनौती के बजाय लगातार दूसरी बार सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए सीटवार कमजोरियों को दूर करने और जिताऊ प्रत्याशियों की तलाश में जुटी है। दोनों दलों के लिए अगले विधानसभा चुनाव में संगठन, प्रत्याशी चयन और स्थानीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
कुल मिलाकर मिशन-2027 की शुरुआती तस्वीर अब सामने आने लगी है। कांग्रेस सर्वे के जरिए संभावित उम्मीदवारों और विधानसभा सीटों की स्थिति का आकलन कर रही है, जबकि भाजपा अपने संगठन और कार्यकर्ताओं को चुनावी अभियान के लिए तैयार करने में जुटी है। आने वाले महीनों में टिकट के दावेदारों की सक्रियता, विधानसभा क्षेत्रवार राजनीतिक समीकरण और दोनों दलों की रणनीति उत्तराखंड की चुनावी राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
