इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य वर्तमान वेतन ढांचे को आसान बनाना और कर्मचारियों की सैलरी विसंगतियों को दूर करना है। इसके लिए पे स्केल मर्जर (Pay Scale Merger) का एक नया फॉर्मूला सुझाया गया है।
वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए पे मैट्रिक्स का होगा विलय
NC-JCM द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार, मौजूदा पे मैट्रिक्स के कई स्तरों (Levels) को आपस में मिलाया जा सकता है। इस योजना के तहत लोअर और मिडिल लेवल (जैसे लेवल 2 और 3, लेवल 4 और 5, लेवल 7 और 8, तथा लेवल 9 और 10) को एक करने की बात कही गई है। इस बदलाव से न केवल प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी, बल्कि कर्मचारियों को पदोन्नति (Promotion) और सालाना वेतन वृद्धि का लाभ अधिक स्पष्टता के साथ मिल सकेगा। इसके अलावा, अलग-अलग पदों के बीच सैलरी के बड़े अंतर को कम करके समान कार्य के लिए उचित वेतन संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
बेसिक सैलरी 18 हजार से बढ़कर हो सकती है 69 हजार रुपये
इस नए प्रस्ताव में कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन को लेकर भी एक बड़ा दावा किया गया है। संगठनों ने सरकार से 3.83 फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) लागू करने की पुरजोर मांग की है। यदि सरकार इस सिफारिश को स्वीकार कर लेती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी मौजूदा 18,000 रुपये से सीधे बढ़कर 69,000 रुपये प्रति माह हो जाएगी। इस ऐतिहासिक बढ़ोतरी का सीधा लाभ देश के लाखों सेवारत कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनभोगियों को भी मिलेगा, जिससे उनके कुल वेतन (CTC) में बंपर उछाल आएगा।
सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग
प्रस्ताव में सिर्फ शुरुआती वेतन बढ़ाने पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि कर्मचारियों की वार्षिक आय में तेजी से बढ़ोतरी के लिए भी खाका तैयार किया गया है। इसके तहत वर्तमान में मिलने वाले 3 फीसदी सालाना इंक्रीमेंट (Yearly Increment) को दोगुना करके 6 फीसदी करने का सुझाव दिया गया है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि इस कदम से बाजार में बढ़ती महंगाई के असर को बेअसर करने और कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
क्यों पड़ी इस बड़े बदलाव की जरूरत?
प्रतिनिधिमंडलों का तर्क है कि वर्तमान वेतन प्रणाली काफी उलझी हुई है और विभिन्न पे-लेवल्स के बीच का फासला बहुत ज्यादा है। आज के समय में बढ़ती जीवन-यापन लागत और महंगाई सूचकांक को देखते हुए वेतनमान में व्यापक सुधार अपरिहार्य हो चुका है। यही वजह है कि पे स्केल मर्जर, उच्च फिटमेंट फैक्टर और बेहतर वार्षिक इंक्रीमेंट जैसे क्रांतिकारी बदलावों की वकालत की जा रही है।
महत्वपूर्ण नोट:ध्यान रहे कि ये सभी बिंदु फिलहाल कर्मचारी संगठनों द्वारा सरकार को भेजे गए प्रस्ताव का हिस्सा हैं। इन पर अंतिम मुहर 8वें वेतन आयोग के गठन, उसकी आधिकारिक सिफारिशों और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही लगेगी। यदि सरकार इन मांगों पर अपनी सहमति देती है, तो यह 7वें वेतन आयोग के बाद का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक वेतन सुधार माना जाएगा।
