देहरादून, 19 जुलाई। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर रविवार को देहरादून स्थित शहीद स्मारक में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण, 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, पुरानी नियुक्तियों, आयु सीमा में छूट तथा अन्य लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सरकार की ओर से अब तक ठोस निर्णय न होने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए शीघ्र समाधान की मांग की गई।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
बैठक का संचालन पूरण सिंह लिंगवाल ने किया, जबकि अध्यक्षता केशव उनियाल ने की। इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारियों ने भाग लेकर अपने विचार रखे और सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग दोहराई।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती तथा यशोदा रावत ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया पिछले सात महीनों से ठप पड़ी हुई है। इस कारण अनेक वास्तविक आंदोलनकारी आज भी सरकारी मान्यता से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों को आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन अब तक नहीं हो पाया है। इससे अनेक राज्य आंदोलनकारी परिवारों के युवाओं को रोजगार के अवसरों से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि आरक्षण व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए तथा जिन नियुक्तियों में आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया है, उनकी भी समीक्षा कर न्याय सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल की पहल की सराहना करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने शासन स्तर पर राज्य आंदोलनकारियों के मुद्दों को गंभीरता से उठाया है। विशेष रूप से राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण, 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, पुरानी नियुक्तियों और आयु सीमा जैसे महत्वपूर्ण विषयों के समाधान के लिए कैबिनेट स्तर पर उपसमिति गठन का प्रस्ताव स्वागत योग्य कदम है। आंदोलनकारियों ने विश्वास जताया कि यदि यह उपसमिति शीघ्र गठित होती है तो वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान निकल सकता है।
महासचिव रामलाल खंडूड़ी, हरी सिंह मेहर तथा विशम्भर दत्त बौठियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री से अपेक्षा है कि वे राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए जल्द से जल्द कैबिनेट उपसमिति का गठन करें। उनका कहना था कि यदि सरकार समयबद्ध तरीके से निर्णय लेती है तो इससे प्रदेशभर के आंदोलनकारियों में सकारात्मक संदेश जाएगा और लंबे समय से चला आ रहा असंतोष समाप्त होगा।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए केशव उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच शीघ्र ही एक प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित करेगा। इस सम्मेलन में राज्यभर से आंदोलनकारी भाग लेंगे तथा भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की तिथि कार्यकारिणी की बैठक में अंतिम रूप देकर जल्द घोषित की जाएगी। यदि सरकार ने समय रहते मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलनकारी लोकतांत्रिक तरीके से आगे की लड़ाई लड़ने के लिए बाध्य होंगे।
बैठक में पुष्पलता सिलमाणा, राधा तिवारी तथा अरुणा थपलियाल ने देहरादून के जिलाधिकारी से मांग की कि राज्य की अस्थायी राजधानी होने के कारण देहरादून में चिन्हीकरण समिति की बैठक शीघ्र आयोजित कर पात्र आंदोलनकारियों की सूची जारी की जाए। उनका कहना था कि चिन्हीकरण में हो रही देरी से अनेक आंदोलनकारी और उनके परिवार मानसिक एवं सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण लंबे संघर्ष, त्याग और बलिदान के बाद संभव हुआ था। राज्य आंदोलन में भाग लेने वाले अनेक लोगों ने अपनी नौकरी, शिक्षा और पारिवारिक जीवन तक दांव पर लगाया था। इसलिए राज्य निर्माण सेनानियों को सम्मान देना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं का समाधान केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि उत्तराखंड के गौरव और इतिहास से जुड़ा विषय है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि सरकार द्वारा शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो प्रदेशभर के आंदोलनकारियों को एकजुट कर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा तथा आवश्यक होने पर लोकतांत्रिक आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।
बैठक में सुभाष बड़थ्वाल, केशव उनियाल, जगमोहन सिंह नेगी, रामलाल खंडूड़ी, विशम्भर दत्त बौठियाल, प्रदीप कुकरेती, मोहन सिंह रावत, गणेश डंगवाल, पुष्पलता उनियाल, प्रभात डंडरियाल, अरुणा थपलियाल, सुधीर नारायण शर्मा, दुर्गा प्रसाद क्षेत्री, रेणुका पंत, क्रांति अभिषेक, मनोज नौटियाल, यशोदा रावत, रेवती बिष्ट, द्वारिका बिष्ट, सुशील बीरमानी, वीरेंद्र रावत, सुशील चमोली, कमल सिंह गुसाईं, उमा दत्त जुगरान, राजेंद्र प्रसाद डिमरी, भगवती प्रसाद, कंडारी जी, विनोद असवाल, मनमोहन सिंह नेगी, रतन अमोली, मान सिंह रावत, सूरत सिंह रावत, प्रताप सिंह रावत, मोहन खत्री, चंद्र किरण सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में सभी आंदोलनकारियों ने एक स्वर में सरकार से मांग की कि राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान, अधिकारों और लंबित समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र प्रभावी निर्णय लिए जाएं, ताकि उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में योगदान देने वाले सेनानियों को न्याय और सम्मान मिल सके।
