उत्तराखंड समेत पूरे देश में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। रसोई से लेकर परिवहन तक हर चीज महंगी होती जा रही है। ऐसे समय में सोशल मीडिया पर कुछ जनप्रतिनिधि साइकिल चलाते, स्कूटी पर हेलमेट पहनकर निकलते और गले में माला डालकर “ईंधन बचाओ” का संदेश देते दिखाई दे रहे हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
लेकिन जनता अब केवल तस्वीरें नहीं, तस्वीरों के पीछे की सच्चाई भी देखने लगी है। जिन नेताओं की सोशल मीडिया पोस्ट में सादगी दिखाई जाती है, उन्हीं के पीछे कई लग्जरी गाड़ियों का लंबा काफिला चलता नजर आता है। इससे सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह वास्तव में देशहित की चिंता है या केवल कैमरे और सोशल मीडिया के लिए बनाई गई राजनीतिक छवि?
महंगाई से जूझ रही जनता आज पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम, महंगे राशन, बढ़ते किराए और परिवहन खर्च से परेशान है। ऐसे समय में नेताओं से केवल प्रतीकात्मक साइकिल यात्रा नहीं, बल्कि वास्तविक सादगी और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि सच में ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना चाहते हैं तो उन्हें वीआईपी संस्कृति, अनावश्यक सरकारी काफिलों और फिजूल खर्ची पर रोक लगाने की पहल करनी चाहिए।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में जहां आम लोग आज भी कई किलोमीटर पैदल चलते हैं, वहां जनता दिखावे और वास्तविकता का अंतर अच्छी तरह समझती है।
देशभक्ति केवल सोशल मीडिया पोस्ट से नहीं, बल्कि व्यवहार और नीतियों से दिखाई देती है।
