बरेली/देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की ओर से अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद मामला लगातार सुर्खियों में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने के बाद से पप्पू गिरधारी का मोबाइल फोन बंद बताया जा रहा है और पुलिस उसकी लोकेशन का पता लगाने में जुटी है। इस बीच बरेली में उसके खिलाफ पूर्व में दर्ज रहे करीब 39 मुकदमों का रिकॉर्ड भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
पुलिस की तलाश के बीच बरेली तक पहुंची जांच की चर्चा
रिपोर्टों के मुताबिक, पप्पू गिरधारी की तलाश के सिलसिले में देहरादून पुलिस की टीम बरेली पहुंची थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। स्थानीय पुलिस के स्तर पर भी उसके पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारियों की चर्चा है। हालांकि, उसकी वर्तमान लोकेशन, पुलिस की कार्रवाई और तलाश की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित एजेंसियों से होना जरूरी है।
39 मुकदमों का रिकॉर्ड फिर सुर्खियों में
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बरेली के जोगी नवादा निवासी गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ अतीत में करीब 39 मुकदमे दर्ज रहे हैं। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित मामले शामिल बताए जाते हैं।
रिपोर्ट में वर्ष 1990 के जैन दंपती हत्याकांड से जुड़े मुकदमे का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2008 में धोखाधड़ी के एक मामले के बाद गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, मुकदमा दर्ज होना किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध होना नहीं है। इन मामलों में प्रत्येक प्रकरण की स्थिति और न्यायिक परिणाम को अलग-अलग देखना आवश्यक है।
वर्ष 2014 में हिस्ट्रीशीट की निगरानी बंद होने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, बरेली पुलिस ने बेहतर चाल-चलन के आधार पर वर्ष 2014 में पप्पू गिरधारी की हिस्ट्रीशीट की निगरानी बंद कर दी थी। एसपी सिटी चिराग जैन के हवाले से बताया गया है कि फिलहाल उसकी निगरानी नहीं की जा रही है। नए मामले में आरोपपत्र दाखिल होने की स्थिति में नियमानुसार निगरानी दोबारा शुरू करने पर विचार किया जा सकता है।
यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मौजूदा प्रकरण की जांच के दौरान पुराने पुलिस रिकॉर्ड और वर्तमान मामले से संबंधित साक्ष्यों की भूमिका पर नजर रहेगी।
15 अक्टूबर को दर्ज हुई थी शिकायत
रिपोर्टों के मुताबिक, 15 अक्टूबर को कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने देहरादून में अपने पति के खिलाफ उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद दोनों से जुड़े विवाद और पप्पू गिरधारी के पुराने रिकॉर्ड को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
इससे पहले वर्ष 2022 में बारादरी थाने में रेखा आर्य की ओर से पप्पू गिरधारी की पूर्व मैनेजर कल्पना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने का भी उल्लेख मिलता है। हालांकि, इन अलग-अलग घटनाओं के तथ्यों और कानूनी स्थिति को संबंधित अभिलेखों के आधार पर ही समझा जाना चाहिए।
एसआईटी की जांच पर टिकी निगाहें
मौजूदा मामले की जांच देहरादून एसआईटी कर रही है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि एसआईटी की टीम बरेली पहुंचकर जानकारी और दस्तावेज जुटा चुकी है। दूसरी ओर, बरेली पुलिस के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि एसआईटी की ओर से उनसे आधिकारिक संपर्क नहीं किया गया।
जांच एजेंसियों के बीच समन्वय, उपलब्ध दस्तावेज और संबंधित पक्षों के बयान आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। फिलहाल जांच से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि और कानूनी प्रक्रिया के निष्कर्ष का इंतजार है।
कथित ऑडियो में 25 लाख रुपये का जिक्र
मामले से जुड़ा एक कथित ऑडियो भी चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑडियो में पप्पू गिरधारी और एक महिला के बीच बातचीत होने तथा रिंकू की ओर से सहयोग और जमानत में मदद का जिक्र किए जाने का दावा किया जा रहा है। महिला की मदद के लिए 25 लाख रुपये देने की बात भी कथित तौर पर सामने आई है।
हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता, बातचीत का पूरा संदर्भ और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय जांच के दायरे में आने वाला दावा समझना उचित होगा।
अब आगे क्या?
रेखा आर्य की शिकायत, पप्पू गिरधारी की तलाश से जुड़ी खबरें, पुराने मुकदमों का रिकॉर्ड और कथित ऑडियो—इन सभी पहलुओं ने इस मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पुलिस उसकी वर्तमान स्थिति का पता लगाने में कब सफल होती है और जांच में कौन-से तथ्य सामने आते हैं।
मामले में किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी और दोष का अंतिम निर्धारण जांच में सामने आए साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | अवतार सिंह बिष्ट, रुद्रपुर
