पिथौरागढ़ में निजी स्कूलों पर सख्ती: एनसीईआरटी से इतर महंगी किताबों का पैसा लौटाने या फीस में समायोजित करने के आदेश

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पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर महंगी और अतिरिक्त पुस्तकें खरीदने का दबाव बनाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी, पिथौरागढ़ की ओर से जारी आदेश में जिले के सभी सीबीएसई एवं निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि विद्यालयों ने एनसीईआरटी से इतर ऐसी पुस्तकें लगाई हैं जिनकी कीमत एनसीईआरटी की निर्धारित पुस्तकों से अधिक है, तो अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस की जाए अथवा आगामी तीन माह की फीस में समायोजित की जाए।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


यह निर्देश मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पत्रांक पीए/6571-74/निजी वि./2026-27, दिनांक 21 जुलाई 2026 के माध्यम से जारी किए गए हैं। आदेश के अनुसार विद्यालयों को एक सप्ताह के भीतर अपने यहां संचालित सभी पुस्तकों की सूची तथा उनका मूल्य भी मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
जनता मिलन कार्यक्रम में उठा मामला
जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला 20 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम में सामने आया। इस दौरान जाग उठा पहाड़ संगठन के प्रदेश संयोजक गोपू महर ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि जिले के कई निजी विद्यालय अभिभावकों पर एनसीईआरटी के बजाय अन्य प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें खरीदने का दबाव बना रहे हैं। शिकायत में कहा गया कि विद्यालयों द्वारा निजी लाभ के उद्देश्य से निर्धारित दुकानों से पुस्तकें खरीदवाई जाती हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
जिलाधिकारी कार्यालय में जनसुनवाई पंजिका संख्या 04, दिनांक 20 जुलाई 2026 के तहत दर्ज इस शिकायत को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजा गया। शिकायत का परीक्षण करने के बाद शिक्षा विभाग ने सभी निजी विद्यालयों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए।
अतिरिक्त राशि लौटानी होगी
मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यदि विद्यालयों ने एनसीईआरटी की पुस्तकों के स्थान पर या उनके अतिरिक्त अन्य पुस्तकें लगाई हैं और उनका मूल्य एनसीईआरटी की पुस्तकों के बराबर नहीं है, तो जितनी अतिरिक्त राशि अभिभावकों से ली गई है, उसे वापस करना होगा। यदि तत्काल धनराशि वापस करना संभव न हो तो आगामी तीन माह के विद्यालय शुल्क में उसका समायोजन किया जाए।
इस आदेश का उद्देश्य अभिभावकों को आर्थिक राहत प्रदान करना और विद्यालयों द्वारा मनमानी पर रोक लगाना बताया गया है।
पुस्तकों की सूची भी देनी होगी
शिक्षा विभाग ने सभी निजी विद्यालयों को निर्देशित किया है कि वे विद्यालय में संचालित सभी पुस्तकों की सूची, उनके प्रकाशक तथा मूल्य सहित एक सप्ताह के भीतर मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करें। यह सूची वाहक के माध्यम से उपलब्ध करानी होगी ताकि विभाग यह जांच कर सके कि विद्यालयों द्वारा निर्धारित पुस्तकें शासन और शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं या नहीं।
विभाग का मानना है कि इस प्रक्रिया से विद्यालयों में चल रही पुस्तक व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी तथा भविष्य में अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
आदेश की अवहेलना पर होगी कार्रवाई
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। ऐसी स्थिति में संबंधित विद्यालय के प्रबंधक एवं प्रधानाचार्य व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।
शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर विद्यालयों के अभिलेखों की जांच भी कराई जा सकती है तथा नियमों के उल्लंघन पर मान्यता संबंधी कार्रवाई सहित अन्य प्रशासनिक कदम भी उठाए जा सकते हैं।
अभिभावकों को मिल सकती है बड़ी राहत
पिछले कई वर्षों से अभिभावक संगठन लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि अनेक निजी विद्यालय एनसीईआरटी की पुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें अनिवार्य कर देते हैं। कई मामलों में विद्यालय विशेष दुकानों से ही पुस्तकें खरीदने का दबाव भी बनाया जाता है। इससे एक छात्र की पुस्तक सामग्री पर हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं।
शिक्षा विभाग के इस आदेश को अभिभावकों के हित में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि सभी विद्यालय इसका पालन करते हैं तो अनेक परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
गोपू महर की शिकायत पर हुई कार्रवाई
इस मामले में शिकायतकर्ता एवं जाग उठा पहाड़ के प्रदेश संयोजक गोपू महर ने कहा था कि शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों के लिए समान होना चाहिए और निजी विद्यालयों द्वारा अनावश्यक महंगी पुस्तकें थोपना उचित नहीं है। उनकी शिकायत के आधार पर प्रशासन द्वारा त्वरित संज्ञान लेकर शिक्षा विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जिसके बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने सभी निजी विद्यालयों को आदेश जारी कर दिए।
पूरे जिले में होगा अनुपालन
मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी पिथौरागढ़, जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों एवं उप शिक्षा अधिकारियों के साथ-साथ शिकायतकर्ता गोपू महर को भी भेजी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराएं और आवश्यकता पड़ने पर विद्यालयों की जांच भी करें।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को निजी विद्यालयों में पुस्तकों की खरीद-फरोख्त को लेकर पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि जिले के निजी विद्यालय निर्धारित समय सीमा के भीतर अभिभावकों को अतिरिक्त राशि लौटाते हैं या आगामी फीस में उसका समायोजन करते हैं तथा विभाग को मांगी गई पुस्तकों की सूची उपलब्ध कराते हैं। आने वाले दिनों में इस आदेश के प्रभाव का सीधा असर जिले के हजारों अभिभावकों और विद्यार्थियों पर देखने को मिल सकता है।


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