जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. जब 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाया गया था, तब जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लिए 24 सीटें आरक्षित की गई थीं.

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अब एक नए विधेयक के जरिए सरकार ने यह साफ कर दिया है कि ये 24 सीटें खाली रहेंगी, लेकिन भविष्य में जब ये इलाके भारत में वापस आएंगे, तब चुनाव आयोग वहां परिसीमन का काम करेगा. डिलिमिटेशन बिल 2026 में यह प्रावधान किया गया है, जो भारत की पुरानी स्थिति को और मजबूत करता है.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

पीओके के लिए 24 सीटें आरक्षित, लेकिन खाली रहेंगी

डिलिमिटेशन बिल 2026 के तहत भारत के चुनाव आयोग को यह अधिकार दिया जा रहा है कि जब कभी पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के इलाके भारत में शामिल हों, तब वहां निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करे. फिलहाल पीओके के लिए आरक्षित 24 सीटें खाली रहेंगी और विधानसभा की प्रभावी ताकत में इन्हें शामिल नहीं किया जाएगा. एक बड़ी बात यह भी है कि इस प्रस्तावित कानून के तहत विधानसभा की कुल सीटें 114 से कम नहीं होंगी. 2019 के जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में यह प्रावधान था कि परिसीमन के समय पीओके के क्षेत्रों को शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन नए विधेयक ने उस प्रावधान को पलट दिया है.

महिलाओं के प्रतिनिधित्व में भी होगा बदलाव

इस विधेयक में एक और अहम संशोधन किया गया है. पुनर्गठन अधिनियम की धारा 15 में बदलाव करते हुए उपराज्यपाल द्वारा नामित की जाने वाली महिला सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन करने का प्रस्ताव रखा गया है. हालांकि यह बदलाव तभी प्रभावी होगा जब परिसीमन का अगला दौर पूरा हो जाएगा. इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 के तहत डिलिमिटेशन कमीशन को यह तय करने का अधिकार दिया गया है कि विधानसभा का आकार क्या होगा, लेकिन यह साफ है कि यह 114 सीटों से नीचे नहीं जा सकता.

संवैधानिक ढांचे के अनुरूप लाए जा रहे कानून

सरकार का कहना है कि ये संशोधन केंद्र शासित प्रदेशों को नियंत्रित करने वाले कानूनों (जैसे 1963 का केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1991 का दिल्ली सरकार कानून और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम) को संशोधित संवैधानिक ढांचे के अनुरूप लाने की कोशिश हैं. नए ढांचे के तहत संसद यह तय करेगी कि जनसंख्या के आंकड़े, सीटों का बंटवारा और निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किस जनगणना के आधार पर होगा. यह पूरा अभ्यास डिलिमिटेशन कमीशन द्वारा किया जाएगा. यह कदम महिला आरक्षण को नई चुनावी संरचना में शामिल करने की बड़ी पहल के तहत भी देखा जा रहा है.


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