कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई राजनीतिक दुकान खोलने वाले या अलग राह चुनने वाले देश के पुराने और कद्दावर नेताओं की मुख्य पार्टी में फिर से ‘घर वापसी’ होने जा रही है? पिछले कुछ समय से सियासी गलियारों में चल रही इन तमाम गरमा-गरम चर्चाओं के बीच अब खुद कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।
क्या कांग्रेस में वापस मिलेंगी TMC और NCP? शरद पवार के फॉर्मूले की क्यों उठी दोबारा चर्चा
देश के राजनीतिक परिदृश्य में क्षेत्रीय विपक्षी दलों का दायरा जिस तेजी से सिकुड़ रहा है, उसे देखते हुए महाराष्ट्र के सबसे बड़े और चाणक्य माने जाने वाले दिग्गज नेता शरद पवार का वह पुराना विचार एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। इस विचार में शरद पवार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) जैसे कद्दावर क्षेत्रीय दलों के भविष्य में कांग्रेस के साथ विलय करने या पूरी तरह एक साथ आने की एक बड़ी भविष्यवाणी की थी।
साल 2024 के चुनाव के दौरान शरद पवार ने की थी वो बड़ी भविष्यवाणी
याद दिला दें कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सतारा में देर रात दिए गए एक खास इंटरव्यू में शरद पवार ने देश के सामने एक बड़ी राजनीतिक भविष्यवाणी की थी। उन्होंने बहुत नपे-तुले शब्दों में कहा था कि आने वाले एक या दो सालों के भीतर ‘देश के कई प्रमुख क्षेत्रीय दल कांग्रेस के साथ बहुत ज्यादा करीब से जुड़ेंगे या फिर वे पूरी तरह से कांग्रेस में विलय करने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर सकते हैं।’ उस वक्त जब पत्रकारों ने उनसे खुद की पार्टी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – शरदचंद्र पवार) के भविष्य को लेकर सीधा सवाल दागा था, तो उन्होंने बेहद बेबाकी से कहा था कि उन्हें अपनी पार्टी की नीतियों और कांग्रेस की विचारधारा के बीच कोई बड़ा अंतर नजर नहीं आता है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया जानने के लिए शरद पवार ने उछाला था यह बड़ा आइडिया
भारतीय राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी शरद पवार के शब्द हमेशा बहुत गहरे और नपे-तुले होते हैं और वे कभी भी बिना किसी बड़ी रणनीति के कोई बयान नहीं देते। राजनीतिक पंडितों का मानना था कि पवार ने उस समय यह बयान जानबूझकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया को आंकने और उनका मूड समझने के लिए हवा में उछाला था। दरअसल, उस बयान से करीब एक साल पहले ही उनकी पार्टी एनसीपी (NCP) में एक बड़ी और ऐतिहासिक टूट हो गई थी, जहां पार्टी का एक बहुत बड़ा धड़ा उनके सगे भतीजे अजित पवार के साथ सरकार में शामिल हो गया था। ऐसे में सीनियर पवार को पूरी उम्मीद थी कि इस नए फॉर्मूले और कदम से उन्हें राज्य के चुनावों में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने में मदद मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर भी वे एक बड़ी भूमिका में नजर आ सकेंगे।
तब कांग्रेस की तरफ से नहीं मिला था पवार को कोई खास भाव
लेकिन इस बहुचर्चित फॉर्मूले का बाद में क्या हश्र हुआ? इस घटना के कुछ महीनों बाद जब शरद पवार से इस विषय पर करीब से बात करने वाले एक अंदरूनी सूत्र से पूछा गया, तो बड़ा ही चौंकाने वाला जवाब मिला। सूत्र ने बताया कि ‘शरद पवार के इस बड़े आइडिया पर उस समय कांग्रेस आलाकमान की तरफ से कोई खास उत्साहजनक प्रतिक्रिया या भाव नहीं आया था।’
अब शरद पवार के इस पुराने फॉर्मूले की चर्चा ऐसे नाजुक वक्त में एक बार फिर से बेहद प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो गई है, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय राष्ट्रीय स्तर पर एक भारी संकट और आंतरिक टूट के दौर से गुजर रही है। आपको बता दें कि टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने अपनी ही पार्टी आलाकमान के खिलाफ खुला विद्रोह और बगावत कर दी है। बारासात की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के मजबूत नेतृत्व में इन सभी 20 बागी सांसदों ने टीएमसी से अपना नाता पूरी तरह तोड़ लिया है और वे अलग होकर ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) नाम के एक बहुत ही कम चर्चित दल में शामिल हो गए हैं। इस बड़े घटनाक्रम के बाद अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये बागी गुट आने वाले दिनों में कांग्रेस के इस खुले आमंत्रण का फायदा उठाते हैं या देश की राजनीति कोई नया मोड़ लेती है।s
