नितिन गडकरी ने बड़े दावे के साथ कहा था कि एथेनॉल वाले ईंधन से गाड़ी खराब होने का एक भी पीड़ित सामने लाकर दिखाया जाए। इस पर पलटवार करते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि वे गडकरी के सामने 1 नहीं, बल्कि पूरे 6 ऐसे पीड़ितों को खड़ा करने के लिए तैयार हैं जिनकी गाड़ियां इस नए ईंधन की वजह से पूरी तरह कबाड़ हो चुकी हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
पूनावाला ने रखी बड़ी शर्त
इस पूरे आंदोलन की अगुवाई कर रहे मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और उद्योगपति तहसीन पूनावाला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की चुनौती को सीधे स्वीकार किया है। हालांकि, पूनावाला ने इस मुलाकात के लिए गडकरी के सामने एक बेहद सख्त शर्त भी रख दी है। उन्होंने दोटूक कहा है कि केंद्रीय मंत्री इन सभी 6 पीड़ितों से किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि सीधे देश की मीडिया के कैमरों के सामने मुलाकात करें। इतना ही नहीं, देश की जनता के सामने इस पूरी बातचीत और बहस का सीधा प्रसारण यानी लाइव-स्ट्रीम होना चाहिए ताकि सच सबके सामने आ सके।
दिल्ली पुलिस की सख्त हिदायत
तहसीन पूनावाला ने खुलासा किया कि ‘टीम भारत’ के बैनर तले पिछले रविवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर E20 फ्यूल के खिलाफ देश का पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया था। उन्होंने बताया कि वे इन सभी प्रभावित पीड़ितों को साथ लेकर सीधे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सरकारी आवास पर जाने की तैयारी में थे। लेकिन ऐन वक्त पर दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें मंत्री के घर की तरफ न बढ़ने की सख्त हिदायत दी।
गिरफ्तारी का सता रहा डर
पूनावाला ने अपने वीडियो संदेश में साफ कहा कि उनके पास पुख्ता सबूतों के साथ ऐसे 6 लोग मौजूद हैं जिनकी गाड़ियों के इंजन में E20 फ्यूल डलवाने के बाद भारी तकनीकी खराबी आई है। उन्होंने कहा कि वे खुद गडकरी के बंगले पर जाने से कतरा रहे हैं क्योंकि वहां जाने पर दिल्ली पुलिस उन्हें हिरासत में ले सकती है या सीधे गिरफ्तार कर सकती है। पूनावाला ने मांग की है कि या तो दिल्ली पुलिस खुद इस अहम बैठक की व्यवस्था कराए या फिर केंद्रीय मंत्री खुद उन्हें मिलने का समय और तारीख तय करके दें।
क्या है असली विवाद?
दरअसल, भारत सरकार ने देशभर में 20% एथेनॉल मिले हुए पेट्रोल (E20) की बिक्री को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 के तहत साल 2030 तक इस लक्ष्य को पूरा करने का प्लान बनाया था। मगर इस काम को समय से 5 साल पहले ही यानी दिसंबर 2025 में हासिल कर लिया गया। अब साल 2026 में देश के सभी पेट्रोल पंपों पर सिर्फ यही तेल मिल रहा है। विरोध कर रहे लोगों का बड़ा दावा है कि भारत की लगभग 80% गाड़ियां सिर्फ पुराने E10 ईंधन के ही लायक हैं। नए तेल से गाड़ियों का माइलेज घट रहा है और उनके कीमती इंजन पार्ट्स तेजी से गल रहे हैं।
मंत्रालय का अपना दावा
दूसरी तरफ, केंद्र सरकार और ऑटो सेक्टर के विशेषज्ञ इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। नितिन गडकरी ने अपने एक हालिया इंटरव्यू में साफ कहा था कि एथेनॉल वाले पेट्रोल से किसी भी गाड़ी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। उन्होंने जनता को भरोसा दिया था कि अगर किसी को कोई परेशानी आती है, तो वे सीधे अपने डीलर या सीधे मंत्रालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसकी पूरी जांच कराकर राहत दी जाएगी। फिलहाल इस नई चुनौती ने 2026 के इस सियासी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।
