उत्तराखंड की सियासत में अंकिता हत्याकांड से लेकर बजट तक उबाल, मिशन 2027 से पहले धामी सरकार की अग्निपरीक्षाविशेष रिपोर्ट | अवतार सिंह बिष्ट, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर


उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कई मुद्दे एक साथ चर्चा के केंद्र में हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान और जवाबदेही का सवाल, गैरसैंण विधानसभा सत्र में धामी सरकार का बजट, महंगाई-बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, सीमित सत्र अवधि को लेकर विपक्ष की नाराजगी और देहरादून में स्टार्टअप सुविधाओं का विस्तार—ये सभी घटनाक्रम राज्य की राजनीतिक दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के सामने एक ओर विकास योजनाओं को गति देने की चुनौती है, तो दूसरी ओर विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांग रहा है। ऐसे में सवाल है कि क्या सरकार बजट और विकास योजनाओं के दम पर जनता का भरोसा मजबूत कर पाएगी? क्या अंकिता भंडारी हत्याकांड में उठ रहे सवालों का संतोषजनक जवाब सामने आएगा? और क्या चुनाव से पहले बेरोजगारी, महंगाई तथा क्षेत्रीय असमानता जैसे मुद्दों पर ठोस कार्रवाई दिखाई देगी?
1. अंकिता भंडारी हत्याकांड: सीबीआई की जांच और कथित वीआईपी का सवाल फिर चर्चा में
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई की जांच को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने मामले से जुड़े याचिकाकर्ता और पत्रकार आशुतोष नेगी को पूछताछ के लिए बुलाया है। हालांकि, पूछताछ की तारीख, स्थान और सवालों के आधिकारिक विवरण की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
सितंबर 2022 में ऋषिकेश के निकट एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। मामले में दोषियों को सजा दिलाने के साथ-साथ कथित वीआईपी की भूमिका और पहचान को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं।
इस प्रकरण में अभिनेत्री उर्मिला सनावर का नाम भी एक वायरल ऑडियो क्लिप और कथित वीआईपी के उल्लेख के कारण चर्चा में आया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, उन्होंने सीबीआई से संबंधित पूछताछ और नार्को-एनालिसिस परीक्षण के लिए सहमति देने संबंधी नोटिस मिलने की बात कही थी। हालांकि, किसी ऑडियो क्लिप में नाम आने अथवा किसी व्यक्ति द्वारा आरोप लगाए जाने से किसी की संलिप्तता अपने आप साबित नहीं होती।
उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई थी। यह कार्रवाई पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की बेटी दीपिका राठौर की शिकायत के संदर्भ में बताई गई, जिसमें सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों का आरोप था। इस शिकायत से संबंधित कार्रवाई और अंकिता हत्याकांड की जांच को अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के रूप में देखना जरूरी है।
दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद भी इस प्रकरण से जुड़ी राजनीतिक चर्चाएं फिर तेज हुई हैं। लेकिन किसी नियुक्ति या राजनीतिक चर्चा को किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
जनता की मुख्य मांग यही है कि जांच निष्पक्ष हो, साक्ष्यों के आधार पर सभी पहलुओं की पड़ताल की जाए और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका के प्रमाण मिलते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई हो। चुनाव से पहले यह मुद्दा सरकार की पारदर्शिता और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता की कसौटी बना रह सकता है।
2. उत्तराखंड का बजट: 1.19 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े के बीच विकास और राहत की परीक्षा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट और अनुपूरक प्रावधानों को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 7,844.18 करोड़ रुपये के पूरक परिव्यय के बाद कुल बजट का आंकड़ा 1,19,547.39 करोड़ रुपये बताया गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। मूल बजट और अनुपूरक बजट अलग-अलग वित्तीय प्रावधान हैं। इसलिए 1.19 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पूरे वित्तीय वर्ष के बजट के रूप में प्रस्तुत करते समय मूल बजट तथा अनुपूरक आवंटन का आधिकारिक मिलान देखना आवश्यक है। विधानसभा में पेश किए गए दस्तावेज ही अंतिम प्रमाण होंगे।
बताए गए अनुपूरक प्रावधानों में 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय और 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व व्यय के लिए रखे गए हैं। पूंजीगत व्यय का उद्देश्य आधारभूत संरचनाओं और परिसंपत्तियों का विकास करना है, जबकि राजस्व व्यय में सरकारी सेवाओं तथा अन्य नियमित खर्चों का प्रावधान होता है।
स्थानीय निकायों के लिए राज्य कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीण और शहरी निकायों के लिए 721 करोड़ रुपये का आवंटन भी बताया गया है। यदि इन प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो स्थानीय स्तर पर सफाई, सड़क, पेयजल और दूसरी बुनियादी सेवाओं को मजबूती मिल सकती है।
कृषि क्षेत्र के लिए धान और गेहूं खरीद पर 1,100 करोड़ रुपये का प्रावधान, वर्षा आधारित कृषि परियोजना के लिए 70 करोड़ रुपये, दीनदयाल उपाध्याय सहकारी किसान कल्याण योजना के लिए 20 करोड़ रुपये तथा किसान पेंशन के लिए 9 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की जानकारी दी गई है। गौ सदनों के निर्माण के लिए भी 9 करोड़ रुपये बताए गए हैं।
बुनियादी ढांचे में जल जीवन मिशन के लिए 300 करोड़ रुपये, गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए 122 करोड़ रुपये और जोशीमठ भू-धंसाव से संबंधित उपचार के लिए 48 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में अटल आयुष्मान योजना के लिए 100 करोड़ और कर्मचारी गोल्डन कार्ड योजना के लिए 125 करोड़ रुपये रखे जाने की जानकारी है। डिजिटल शिक्षा के लिए 200 करोड़ तथा खेल विश्वविद्यालय के लिए 35 करोड़ रुपये का उल्लेख भी किया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन घोषणाओं का लाभ धरातल पर कब और कितना पहुंचेगा। किसानों को समय पर भुगतान, गांवों में पेयजल, अस्पतालों में सुविधाएं और युवाओं को रोजगार जैसे परिणाम ही बजट की वास्तविक सफलता तय करेंगे।
3. महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, पुलिस ने किया पानी की बौछारों का इस्तेमाल
गैरसैंण के भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस ने महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विधानसभा की ओर मार्च कर रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में पार्टी ने भाजपा सरकार पर जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि बढ़ती महंगाई और रोजगार के सीमित अवसरों ने आम परिवारों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। पार्टी ने 14 जनहित के मुद्दों को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
दूसरी ओर, सरकार ने विधानसभा सत्र और बजटीय प्रावधानों को विकास तथा नई योजनाओं से जोड़कर पेश किया। मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष से सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा सदन के भीतर होनी चाहिए।
राजनीतिक दृष्टि से यह टकराव महत्वपूर्ण है। कांग्रेस जहां सरकार को महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर घेरने की रणनीति अपना रही है, वहीं भाजपा सरकार विकास योजनाओं और वित्तीय प्रावधानों के माध्यम से अपनी उपलब्धियां सामने रख रही है।
लेकिन जनता के लिए असली सवाल आरोप-प्रत्यारोप से आगे का है। युवाओं को रोजगार, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, महंगाई से राहत और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलना जरूरी है। यदि इन क्षेत्रों में ठोस सुधार दिखाई नहीं देता तो विधानसभा के भीतर और बाहर होने वाली राजनीतिक बहस चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है।
4. गैरसैंण विधानसभा सत्र: दो दिन की अवधि पर विपक्ष के सवाल, 445 प्रश्नों का दबाव
भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में आयोजित दो दिवसीय सत्र को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्र की शुरुआत दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। उपलब्ध विवरण में पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का उल्लेख है।
सत्र के दौरान लगभग 7,412 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट का उल्लेख सामने आया है। यह आंकड़ा अन्य उपलब्ध विवरणों में बताए गए 7,844.18 करोड़ रुपये के पूरक परिव्यय से अलग है। इसलिए अंतिम रिपोर्ट में विधानसभा के आधिकारिक बजट दस्तावेज के आधार पर सही राशि की पुष्टि आवश्यक है।
बताया गया कि 31 विधायकों ने कुल 445 सवाल लगाए। इतने प्रश्नों के बीच सत्र की अवधि केवल दो दिन होने पर विपक्ष ने आपत्ति जताई और कार्यवाही का समय बढ़ाने की मांग उठाई। विपक्ष का तर्क है कि जनता से जुड़े सवालों पर पर्याप्त चर्चा के लिए ज्यादा समय मिलना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सदन की अवधि, गैरसैंण के विकास और स्थानीय जरूरतों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, चिकित्सा ढांचे और विधानसभा की कार्यवाही से संबंधित व्यवस्थाओं पर भी चिंता जताई।
आर्य ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जवाबदेही का मुद्दा उठाया और कथित वीआईपी प्रकरण पर सवाल किए। यह मामला राजनीतिक बहस में महत्वपूर्ण बना हुआ है, लेकिन आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
विधानसभा सत्र का उद्देश्य केवल बजट पारित करना नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के सवालों के जवाब देना और सरकार की नीतियों की समीक्षा करना भी है। ऐसे में सीमित समय के भीतर कितने प्रश्नों पर सार्थक चर्चा हो पाती है, यह लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिहाज से अहम होगा।
5. देहरादून आईटी पार्क में स्टार्टअप सुविधा: युवाओं के लिए रोजगार और नवाचार की उम्मीद
उत्तराखंड में तकनीक आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में देहरादून के सहस्रधारा रोड स्थित आईटी पार्क में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) की नई इन्क्यूबेशन सुविधा शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि लगभग 30 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में फैली चार मंजिला इमारत में आईटी और आईटीईएस कंपनियों तथा स्टार्टअप्स को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस केंद्र का उद्देश्य युवाओं के व्यावसायिक विचारों को उत्पादों और सफल उद्यमों में बदलने में मदद करना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, डेटा साइंस, गेमिंग, फिनटेक और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले उद्यमियों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नेक्स्ट जनरेशन इन्क्यूबेशन स्कीम के तहत 52 स्टार्टअप्स का चयन किया गया है। इनमें से 17 को कुल 4.25 करोड़ रुपये की सीड फंडिंग तथा 26 से अधिक स्टार्टअप्स को प्रति स्टार्टअप 90 हजार रुपये का स्टाइपेंड दिए जाने का उल्लेख है।
उद्योग सचिव विनय शंकर पांडेय के अनुसार, ऐसी पहलें प्रदेश में प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार और उद्यमिता को गति दे सकती हैं। हालांकि, किसी भी इन्क्यूबेशन सेंटर की वास्तविक सफलता इस बात से मापी जाएगी कि वहां से कितने सफल कारोबार निकलते हैं, कितने स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता है और कितने उद्यम लंबे समय तक टिक पाते हैं।
उत्तराखंड के युवाओं के लिए यह एक अवसर है कि वे नौकरी खोजने के साथ-साथ तकनीक, कृषि, पर्यटन और स्थानीय जरूरतों पर आधारित उद्यम भी विकसित करें। इसके लिए प्रशिक्षण, बाजार तक पहुंच, निवेश और अनुभवी मार्गदर्शन की निरंतर उपलब्धता जरूरी होगी।
6. मिशन 2027: विकास के दावों और जनसमस्याओं के बीच जनता करेगी फैसला
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सामने आ रहे ये मुद्दे सरकार और विपक्ष दोनों के लिए चुनौती हैं। धामी सरकार के सामने बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, स्थानीय निकायों को मजबूत करने और विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है।
वहीं कांग्रेस के सामने केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित न रहकर जनता के सामने ठोस विकल्प, स्पष्ट नीतियां और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने की चुनौती है। अंकिता भंडारी हत्याकांड में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही, विधानसभा में जनहित के प्रश्नों पर चर्चा, किसानों की आय, महंगाई, बेरोजगारी तथा गैरसैंण के विकास जैसे विषय चुनावी विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं।
राजनीति में घोषणाएं और आरोप सुर्खियां बनाते हैं, लेकिन जनता का भरोसा काम के परिणामों से बनता है। यदि बजट से सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की स्थिति में सुधार आता है तो सरकार को इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है। यदि अपेक्षाएं अधूरी रहती हैं तो विपक्ष को सरकार को घेरने का अवसर मिलेगा।
मिशन 2027 का सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या उत्तराखंड में विकास के दावे आम जनता के जीवन में वास्तविक बदलाव ला पाएंगे, या महंगाई, बेरोजगारी, क्षेत्रीय असमानता और जवाबदेही के सवाल चुनावी राजनीति के केंद्र में बने रहेंगे? इसका जवाब अंततः जनता के अनुभव और सरकार के कामकाज से तय होगा।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
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