

SIR का असर सभी पार्टियों पर है। जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) असहज है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी पूरी तरह सहज नहीं दिख रही।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार मुकाबला सीधा TMC और BJP के बीच संगठन, बूथ मैनेजमेंट और नैरेटिव की लड़ाई बनता दिख रहा है। ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ सीमित एंटी-इनकम्बेंसी है, लेकिन सरकारी योजनाओं का लाभ TMC की ताकत बना हुआ है। वहीं SIR ने फर्जी मतदाता और घुसपैठ के मुद्दे को हवा दी है, जिससे BJP का कोर वोट मजबूत हुआ है। बंगाली अस्मिता बनाम बाहरी का मुद्दा भी चुनावी परिणाम तय कर सकता है।
बूथ मैनेजमेंट अहम
पश्चिम बंगाल में पिछले 15 बरसों से ममता बनर्जी की सरकार है। इसलिए, स्वाभाविक तौर पर एंटी-इनकम्बेंसी का असर दिख रहा है। सभी जगह बदलाव की बात करने वाले लोग भी मिले। कुछ लोगों ने राजनीतिक हिंसा का जिक्र किया और माहौल को लेकर डर भी जताया। रोजगार के मौके ना मिलने को लेकर भी अंसतोष दिखा, लेकिन कोई गंभीर नाराजगी नहीं दिखी। मुझे बड़ी संख्या में यहां ऐसे लोग मिले, जिन्होंने सरकारी योजनाओं के फायदे का जिक्र किया। लक्ष्मी भंडार योजना के तहत महिलाओं को हर महीने मिल रहे 1,500 रुपये का असर जमीन पर दिखता है। स्वास्थ्य साथी योजना भी लोगों को फायदा दे रही है। BJP भले ही आयुष्मान भारत योजना के राज्य में लागू नहीं होने का मुद्दा बनाती है, लेकिन यहां लोगों से बात कर लगा कि उन्हें इसकी कमी महसूस नहीं होती। स्वास्थ्य साथी योजना के तहत भी 5 लाख रुपये तक का इलाज नि:शुल्क किया जाता है।
ममता के खिलाफ लोगों में ज्यादा नाराजगी नहीं
एंटी-इनकम्बेंसी के बावजूद ममता के खिलाफ लोगों में ज्यादा नाराजगी नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि BJP के पक्ष में कोई लहर चल रही हो। ऐसे में चुनाव का परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि किस दल ने अपने संगठन और बूथ स्तर के नेटवर्क को बेहतर तरीके से संभाला है। BJP भले ही इस काम में खुद को माहिर मानती हो, लेकिन पश्चिम बंगाल में TMC का बूथ लेवल मैनेजमेंट बीजेपी के मुकाबले मजबूत है। BJP इसे कैसे मैनेज करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का असर इस बार के विधानसभा चुनावों पर काफी है। BJP जहां SIR को घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं को हटाने की कवायद बता रही है, वहीं TMC लगातार इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है।
बीजेपी का कोर वोटर मजबूत हुआ
SIR से BJP को ये फायदा दिख रहा है कि उसका कोर वोटर मजबूत हुआ है। लेकिन, सवाल है कि इससे क्या वे मतदाता BJP के साथ आएंगे, जो पहले उसके साथ नहीं थे। दूसरी तरफ, TMC ने इसका विरोध करते हुए काउंटर नैरेटिव बनाया है, जिससे उसका पारंपरिक वोट बैंक भी मजबूत हुआ है। पश्चिम बंगाल में लाखों परिवार ऐसे हैं, जिनके किसी एक सदस्य का नाम मतदाता सूची से हटाया गया है। ऐसी स्थिति में उस परिवार के बाकी मतदाताओं की नाराजगी किस पर भारी पड़ेगी यह देखना दिलचस्प रहेगा। SIR के कारण लोगों को होने वाली असुविधा का असर भी दिख सकता है।
बंगाली अस्मिता बनाम बाहरी
इसके अलावा, बंगाली अस्मिता बनाम बाहरी का मुद्दा भी इस बार चुनाव में हावी है। TMC लोगों को यह समझा रही है कि अगर BJP यहां सत्ता में आ जाती है, तो पश्चिम बंगाल की मूल प्रकृति ही बदल देगी। जबकि, BJP लोगों को यह बताने में जुटी है कि वह बाहरी नहीं है। अंतत: जो पार्टी अपनी बात समझा पाएगी, चुनाव में बाजी वही मारेगी।




