उत्तराखंड की तीन बड़ी खबरें: ऋषिकेश में रिजॉर्ट संचालक लापता, विधायकों के आपराधिक मामलों में गिरावट और गैरसैंण विधानसभा सत्र में 10 विधेयक पारित


उत्तराखंड/ऋषिकेश में रिजॉर्ट संचालक की तलाश तेज, गंगा किनारे मिली घड़ी-चप्पल; ADR के आंकड़ों में विधायकों के घोषित आपराधिक मामलों में कमी, गैरसैंण में हंगामे के बीच आठ घंटे चार मिनट चला विधानसभा सत्र
अवतार सिंह बिष्ट हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड,अवतार सिंह बिष्ट हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर
उत्तराखंड में एक ओर ऋषिकेश के गंगा भोगपुर क्षेत्र से रिजॉर्ट संचालक के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने का मामला सामने आया है, वहीं दूसरी ओर चुनावी राजनीति में जनप्रतिनिधियों की आपराधिक पृष्ठभूमि और विधानसभा में जनहित के मुद्दों पर चर्चा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऋषिकेश में लापता रिजॉर्ट संचालक की तलाश जारी है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और उत्तराखंड इलेक्शन वॉच के आंकड़े 2017 तथा 2022 के विधानसभा चुनावों में आपराधिक मामलों की घोषणा करने वाले विधायकों की संख्या में कमी दर्शाते हैं। उधर, गैरसैंण में आयोजित पांचवीं विधानसभा के अंतिम सत्र में 10 विधेयक पारित किए गए, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के कारण कई महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो सकी।
1. ऋषिकेश: रिजॉर्ट संचालक लापता, गंगा किनारे मिली घड़ी और चप्पल
पत्नी की शिकायत पर दो नामजद व्यक्तियों समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी, पुलिस जुटी तलाश में
ऋषिकेश। उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र में गंगा भोगपुर तल्ला स्थित पनाम्बी रिजॉर्ट एंड स्पा के संचालक नीरज गुप्ता के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने से चिंता का माहौल है। उनकी तलाश में जुटी पुलिस को गंगा किनारे उनकी घड़ी और चप्पल मिली हैं। इन वस्तुओं के मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस लापता संचालक से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नीरज गुप्ता की पत्नी विनीता गुप्ता ने 27 अक्टूबर को पुलिस को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में उन्होंने जमीन की खरीद-फरोख्त और पैसों के विवाद को लेकर रवि बजाज और गगन बत्रा पर अपने पति को कथित रूप से मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों नामजद व्यक्तियों समेत अन्य के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।
मामले में यह भी जानकारी सामने आई है कि नीरज गुप्ता कथित तौर पर अपने घर पर पांच पत्र छोड़कर गए थे। हालांकि, इन पत्रों में क्या लिखा है और उनका लापता होने की घटना से क्या संबंध है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। पुलिस की जांच में इन तथ्यों की अहम भूमिका हो सकती है।
गंगा किनारे घड़ी और चप्पल मिलने से उनके साथ किसी अनहोनी की आशंका जताई जा रही है। आत्महत्या की आशंका भी व्यक्त की गई है, लेकिन अभी इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। नीरज गुप्ता की वास्तविक स्थिति और उनके लापता होने की परिस्थितियों का खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा।
लक्ष्मणझूला कोतवाली पुलिस मामले से जुड़े साक्ष्यों, शिकायत और अन्य परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है। फिलहाल उनकी बरामदगी या घटना की अंतिम स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है। जिन व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है, उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप भी जांच के अधीन हैं। किसी पर आरोप लगना अपराध सिद्ध होना नहीं है। अब पुलिस की जांच पर नजर है कि नीरज गुप्ता कहां हैं और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।
2. उत्तराखंड विधानसभा: विधायकों के घोषित आपराधिक मामलों में आई कमी
2017 में 22 विधायकों ने घोषित किए थे आपराधिक मामले, 2022 में संख्या घटकर 19 हुई
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में निर्वाचित विधायकों द्वारा अपने हलफनामों में घोषित आपराधिक मामलों के अनुपात में वर्ष 2017 के मुकाबले 2022 में कमी दर्ज की गई। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और उत्तराखंड इलेक्शन वॉच के आंकड़ों के अनुसार, 2017 में निर्वाचित 70 विधायकों में से 22 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे। यह कुल विधायकों का लगभग 31 प्रतिशत था।
वहीं, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में निर्वाचित 70 विधायकों में से 19 ने अपने हलफनामों में आपराधिक मामले घोषित किए। यह संख्या कुल विधायकों का लगभग 27 प्रतिशत है। इस प्रकार दोनों चुनावों के बीच आपराधिक मामलों की घोषणा करने वाले विधायकों की संख्या में तीन की कमी दर्ज की गई।
गंभीर आपराधिक मामलों में भी गिरावट
ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2017 में 14 विधायकों ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए थे। यह विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का लगभग 20 प्रतिशत था। वर्ष 2022 में गंभीर आपराधिक मामले घोषित करने वाले विधायकों की संख्या घटकर 10 रह गई, जो कुल संख्या का लगभग 14 प्रतिशत है।
इन आंकड़ों से दोनों चुनावों के बीच घोषित आपराधिक मामलों और गंभीर आपराधिक मामलों वाली श्रेणी में कमी का संकेत मिलता है। हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि रिपोर्ट उम्मीदवारों द्वारा चुनाव के समय दाखिल किए गए हलफनामों पर आधारित है।
हलफनामे पारदर्शिता का महत्वपूर्ण आधार
ADR और उत्तराखंड इलेक्शन वॉच चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण कर उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति और अन्य जानकारियों को सार्वजनिक करते हैं। इसका उद्देश्य मतदाताओं को उम्मीदवारों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।
किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। दोषसिद्धि का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होता है। इसलिए इन आंकड़ों को घोषित मामलों की संख्या के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
वर्ष 2017 और 2022 के आंकड़े एक तुलनात्मक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं, लेकिन अक्टूबर 2026 की वर्तमान स्थिति जानने के लिए मौजूदा विधायकों के नवीनतम हलफनामों और संबंधित अभिलेखों का अलग से विश्लेषण आवश्यक होगा। लोकतंत्र में मतदाताओं की जागरूकता, उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि की जानकारी और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।
3. गैरसैंण विधानसभा सत्र: आठ घंटे चार मिनट में पारित हुए 10 विधेयक
पहले दिन करीब सात घंटे चला सदन, दूसरे दिन एक घंटे चार मिनट में कार्यवाही समाप्त; हंगामे के बीच जनहित के कई मुद्दों पर नहीं हो सकी विस्तृत चर्चा
गैरसैंण। उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा का अंतिम सत्र कुल आठ घंटे चार मिनट चला। इस दौरान सरकार ने अनुपूरक बजट सहित 10 विधेयक पारित कराए और दो अध्यादेश सदन के पटल पर रखे। हालांकि, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव तथा दूसरे दिन हुए हंगामे के कारण जनता से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।
मौजूदा विधानसभा का अंतिम सत्र होने के कारण सरकार ने अनुपूरक बजट सहित महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के लिए ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को चुना। उम्मीद थी कि प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं, विकास कार्यों और जनता की समस्याओं पर चर्चा होगी। साथ ही अनुपूरक बजट पारित होने से विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही थी।
सत्र के पहले दिन सदन में पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद उम्मीद जगी कि सदन के शेष समय में राज्य के विकास, जनसमस्याओं और नीतिगत विषयों पर सार्थक चर्चा होगी। पहले दिन कार्यवाही करीब सात घंटे तक चली।
लेकिन दूसरे दिन सदन में हंगामे की स्थिति बनी रही। प्रश्नकाल किसी तरह पूरा हुआ, जिसके बाद सरकार ने शेष विधायी कार्य भी हंगामे के बीच आगे बढ़ाए। दूसरे दिन की कार्यवाही एक घंटे चार मिनट में समाप्त हो गई। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी ने सदन की इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
ये 10 विधेयक हुए पारित
सत्र में पारित विधेयकों में उत्तराखंड विनियोग (अनुपूरक) विधेयक, उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक, उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, उत्तराखंड निवेश और आधारभूत संरचना (विकास और विनियमन) (संशोधन) विधेयक तथा उत्तराखंड जनविश्वास (उपबंधों का संशोधन) द्वितीय विधेयक शामिल रहे।
इसके अलावा उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) विधेयक, उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक, उत्तराखंड सिविल विधि (संशोधन) विधेयक, उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा (संशोधन) विधेयक और उत्तराखंड माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक भी पारित किए गए।
सदन के पटल पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश और उत्तराखंड माल एवं सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश भी प्रस्तुत किए गए।
नियमों के तहत आईं कई सूचनाएं
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नियम 300 के तहत कुल 34 सूचनाएं प्राप्त हुईं और सभी को ध्यानाकर्षण के लिए स्वीकार किया गया। नियम 53 के तहत 17 सूचनाएं मिलीं और सभी ध्यानाकर्षण के लिए स्वीकृत हुईं। नियम 58 के अंतर्गत सात सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से तीन स्वीकृत की गईं और दो ध्यानाकर्षण के लिए स्वीकार की गईं।
विधायी कामकाज की दृष्टि से सत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, लेकिन जनता की अपेक्षा केवल विधेयकों के पारित होने तक सीमित नहीं थी। लोगों को उम्मीद थी कि सदन में सड़क, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास योजनाओं और अन्य जनसमस्याओं से जुड़े सवालों पर सरकार से जवाब मांगे जाएंगे।
सत्र के दौरान हुए टकराव ने एक बार फिर विधानसभा में चर्चा की गुणवत्ता और जनहित के मुद्दों को पर्याप्त समय दिए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने की है, वहीं विपक्ष की भूमिका सरकार से जवाब मांगने और जनता की समस्याओं को उठाने की है। दोनों पक्षों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही का मूल उद्देश्य जनहित के विषयों पर चर्चा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
गैरसैंण के इस अंतिम सत्र में 10 विधेयकों का पारित होना महत्वपूर्ण विधायी उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ, लेकिन हंगामे के कारण विस्तृत चर्चा नहीं हो पाने से जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा उतरने का सवाल भी बना रहा।
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