सत्ता भाजपा की, शासन की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की—फिर सरकारी जमीनों की सुरक्षा, कथित भू-माफिया के प्रभाव और तेजी से बदलते जनसांख्यिकीय समीकरणों का जवाब कौन देगा?
संपादकीय | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
नौकरशाह, जनप्रतिनिधि और भूमाफिया का गठबंधन—लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी
जब नौकरशाही के कुछ भ्रष्ट तत्व, जनप्रतिनिधियों में शामिल कुछ लोग और भूमाफिया कथित तौर पर एक-दूसरे के हित साधने लगें, तो सरकारी जमीनों की सुरक्षा और आम जनता का विश्वास दोनों खतरे में पड़ जाते हैं। उधम सिंह नगर में नजूल, नदी, नहर और अन्य सरकारी भूमि पर कथित कब्जों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सवाल यह है कि यदि कब्जे वर्षों से होते रहे, तो जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? भाजपा सरकार को राजनीतिक संरक्षण और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराकर दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
उत्तराखंड में भाजपा के शासनकाल के दौरान उधम सिंह नगर के विकास, आबादी के विस्तार और लोकतांत्रिक समीकरणों को लेकर कुछ ऐसे सवाल उठ रहे हैं, जिनसे सरकार और प्रशासन मुंह नहीं मोड़ सकते। पिछले दस वर्षों में जिले के मतदाताओं की संख्या में 43 प्रतिशत वृद्धि का आंकड़ा सामने आया है। देहरादून में यह वृद्धि 41 प्रतिशत और नैनीताल में 32 प्रतिशत बताई गई है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी उधम सिंह नगर की दस वर्षीय मतदाता वृद्धि 43 प्रतिशत दर्ज की गई थी। यह आंकड़ा अपने आप में महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके पीछे के कारणों की विस्तृत पड़ताल भी उतनी ही आवश्यक है। ।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
भाजपा सरकार से सवाल इसलिए भी बनता है कि शासन चलाने की जिम्मेदारी उसी की है। कानून-व्यवस्था, सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा, अवैध कब्जों पर कार्रवाई और प्रशासनिक पारदर्शिता सरकार के दायित्व हैं। यदि इन क्षेत्रों में कमियां हैं, तो उनकी समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि मतदाता वृद्धि को सीधे किसी पार्टी की नीतियों या किसी खास वर्ग की मौजूदगी से जोड़ने के लिए ठोस प्रमाण आवश्यक हैं।
मतदाता वृद्धि: विकास का परिणाम या नियोजन की चुनौती?
उधम सिंह नगर उत्तराखंड का महत्वपूर्ण औद्योगिक और कृषि प्रधान जिला है। यहां रोजगार, कारोबार और आवासीय विस्तार के कारण दूसरे क्षेत्रों से लोगों का आना स्वाभाविक है। नई पीढ़ी के मतदाताओं का पंजीकरण और नागरिकों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना भी मतदाता संख्या को प्रभावित करता है।
लेकिन जब दस वर्षों में मतदाता वृद्धि 43 प्रतिशत तक पहुंचने का आंकड़ा सामने हो, तो भाजपा सरकार और निर्वाचन प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस बदलाव में जनसंख्या वृद्धि, पलायन, नए पंजीकरण और मतदाता सूची के संशोधन का कितना योगदान रहा।
लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक को मताधिकार मिलना चाहिए। सवाल मतदाताओं की संख्या बढ़ने का विरोध करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और निर्वाचन प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बनाए रखना है। मतदाता वृद्धि से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं, लेकिन किसी खास राजनीतिक बदलाव के लिए केवल प्रतिशत को प्रमाण नहीं माना जा सकता।
सरकारी जमीनों पर कब्जे: भाजपा शासन में किसकी जवाबदेही?
जिले में नजूल भूमि, नदियों के किनारों, नहरों और दूसरी सरकारी जमीनों पर कथित अवैध कब्जों का मुद्दा भी गंभीर है। इन संपत्तियों पर कब्जे होने से सार्वजनिक विकास, जल निकासी, पर्यावरण संरक्षण और नियोजित शहरी विस्तार प्रभावित हो सकते हैं।
सरकारी भूमि पर लगभग 1,000 करोड़ रुपये के कब्जे होने का दावा किया जा रहा है। यदि यह अनुमान सही है, तो यह केवल राजस्व का नुकसान नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी की बड़ी विफलता का संकेत होगा। मगर इस रकम की पुष्टि आधिकारिक भूमि सर्वेक्षण, बाजार मूल्यांकन और राजस्व अभिलेखों से होनी चाहिए।
भाजपा सरकार से सीधा सवाल है: यदि सरकारी जमीन पर वर्षों से कब्जे हो रहे थे, तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? राजस्व विभाग, नगर निकाय, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी कितनी निभाई? क्या अतिक्रमण के मामलों में सभी के साथ समान व्यवहार हुआ?
सरकार को जिले की सरकारी जमीनों का विस्तृत सर्वे कराकर सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करनी चाहिए। रिपोर्ट में भूमि का क्षेत्रफल, कानूनी स्थिति, अनुमानित मूल्य, कब्जे की अवधि और अब तक हुई कार्रवाई का विवरण होना चाहिए।
क्या स्थानीय राजनीति और भूमाफिया का गठजोड़ है?
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी उठते हैं कि कुछ मामलों में नेताओं, पार्षदों, सभासदों, अन्य जनप्रतिनिधियों, भूमाफिया और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों पर कब्जे हुए या उन्हें संरक्षण मिला। इन आरोपों की जांच जरूरी है। किसी व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन प्रभावशाली लोगों के विरुद्ध जांच से बचना भी स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
यदि किसी जनप्रतिनिधि ने सरकारी भूमि पर कब्जा कराने, अवैध निर्माण को संरक्षण देने या सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने में भूमिका निभाई है, तो उसके विरुद्ध प्रमाणों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
भाजपा सरकार के लिए यह सुशासन की परीक्षा है। कानून का राज तभी विश्वसनीय होगा, जब गरीब परिवार से लेकर प्रभावशाली नेता और बड़े कारोबारी तक सभी पर समान नियम लागू हों। केवल छोटे कब्जे हटाना और बड़े कब्जों को अनदेखा करना जनता के मन में भेदभाव की आशंका पैदा करेगा।
बदलते लोकतांत्रिक समीकरण और सरकार की जिम्मेदारी
मतदाता संख्या में वृद्धि किसी जिले की सामाजिक और राजनीतिक संरचना को प्रभावित कर सकती है। नए मतदाता, रोजगार के लिए आए परिवार, शहरी विस्तार और पीढ़ीगत बदलाव स्थानीय चुनावों की परिस्थितियों को बदल सकते हैं। लेकिन लोकतंत्र में हर पात्र नागरिक का वोट समान महत्व रखता है।
इसलिए उधम सिंह नगर में लोकतांत्रिक स्वरूप बदलने की चर्चा का आधार किसी समुदाय या नए बसने वाले नागरिकों को संदेह की दृष्टि से देखना नहीं होना चाहिए। वास्तविक सवाल यह है कि क्या मतदाता सूची नियमों के अनुसार तैयार हुई, क्या सरकारी भूमि सुरक्षित रही, क्या शहरी नियोजन प्रभावी रहा और क्या प्रशासन ने राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम किया?
यदि भाजपा सरकार के कार्यकाल में इन व्यवस्थाओं में खामियां सामने आती हैं, तो सरकार को उनका जवाब देना चाहिए। सत्ता में बने रहने का अर्थ केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि सरकारी संपत्तियों की रक्षा करना, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करना और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को सुरक्षित रखना भी है।
निष्कर्ष: भाजपा सरकार को तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए
उधम सिंह नगर की मतदाता वृद्धि और सरकारी जमीनों पर कथित कब्जों के मुद्दे को राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। भाजपा सरकार को मतदाता वृद्धि के कारणों, सरकारी भूमि की वास्तविक स्थिति और अतिक्रमण के मामलों में हुई कार्रवाई पर तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए।
यदि 1,000 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन पर कब्जे का दावा सही है, तो जिम्मेदार लोगों की पहचान होनी चाहिए। यदि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, भूमाफिया या अधिकारियों की मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं, तो निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इसी तरह निर्वाचन सूची में किसी भी अनियमितता की जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र नागरिक का मताधिकार प्रभावित न हो।
भाजपा सरकार से सवाल पूछना लोकतंत्र का अधिकार है और सरकार का जवाब देना उसकी जिम्मेदारी। उधम सिंह नगर में बदलते मतदाता समीकरण, सरकारी भूमि की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। जनता को आश्वासन नहीं, तथ्य चाहिए; आरोप नहीं, निष्पक्ष जांच चाहिए; और राजनीतिक संरक्षण की आशंका नहीं, कानून का समान शासन चाहिए।
अवतार सिंह बिष्ट
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
संपादकीय
