पहाड़ के लोगों को सुनहरे भविष्य का सपना दिखाने वाली एलयूसीसी सोसायटी जब रातों-रात अपने दफ्तरों पर ताला जड़कर फरार हुई, तो निवेशकों के पैरों तले से मानों जमीन खिसक गई। पहले निवेश पर एजेंटों को अच्छा रिटर्न दिया गया।

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फिर उनके जरिए सेठ बनाने का सपना दिखाकर हजारों लोगों को जोड़ा गया, जिन्होंने करोड़ों का निवेश किया और फिर सड़क पर आ गए।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

लोगों के आक्रोश के बीच सामने आया कि लोगों ने अपनी बेटियों की शादी, बुढ़ापे की पेंशन और मकान बनाने के लिए रखी रकम की पाई-पाई जोड़कर सोसायटी में जमा कराई थी। उम्मीद थी निवेश के जरिए वह अपने सपने को और अच्छे तरीके से पूरे कर पाएंगे। हालांकि, यह सत्य नहीं था। 2024 के अंत तक आते-आते सोसायटी से दिए चेक बाउंस होने लगे और पोर्टल बंद कर दिए गए। शाखाओं में लोग पहुंचे तो वहां ताले लटके मिले। एजेंटों के पास पहुंचे तो पता लगा कि वह अपने खुद लाखों रुपए लगाए बैठे हैं। पुलिस में शिकायत हुई तो कई जिलों में में एक के बाद एक कुल 18 केस दर्ज हो गए। पुलिस एजेंटों तो पहुंची। समीन अग्रवाल तक तमाम प्रयास के बाद भी न पहुंच गए। निवेश करने वालों ने शाखा संचालकों और एजेंटों को घेरना शुरू किया। वह सड़क पर उतर गए और दून समेत उत्तराखंड के कई शहरों में उग्र आंदोलन हुआ। पुलिस से उम्मीद टूटटी देख लोगों ने सीबीआई जांच की मांग की। इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। जिसे सही मानते हुए हाईकोर्ट ने केस दर्ज करने का आदेश दिया। इस आदेश पर सीबीआई ने केस दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है।

पहले मुनाफा कमाया, फिर अपनों को फंसाकर बर्बाद

एलयूसीसी घोटाले की सबसे दुखद दास्तां उन एजेंटों की है जो इस खेल में ‘मोहरा’ और ‘शिकारी’ दोनों बन गए। सीबीआई की एफआईआर में कई ऐसे आरोपी भी शामिल हैं जो खुद पहले शिकायतकर्ता थे। बाद में आरोपी बने और अब सीबीआई की एफआईआर तक नाम पहुंच गया है।

एजेंटों के लिए कंपनी ने पिरामिड स्कीम की तरह काम किया। कई लोगों को पहले ग्राहक और फिर एजेंट बनाया गया। इन्हें शुरुआत में मोटा कमीशन और गिफ्ट (स्कूटी, विदेश यात्रा) देकर लुभाया गया। इस चकाचौंध में आकर इन एजेंटों ने अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों और दोस्तों का पैसा भी लगवा दिया। जब कंपनी भागी तो रिश्तेदार और परिचित से निवेशक बने लोग इन एजेंटों के घर के बाहर खड़े हो गए। कई के विवाद हुए और संबंध टूट गए। ये अब दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ सीबीआई से कार्रवाई का शिकंजा कसा हुआ है और दूसरी तरफ संबंध पहले गंवाए बैठे हैं।

पुलिस से न्याय नहीं मिला अब सीबीआई से जुड़ी आस

सीबीआई में दर्ज एफआईआर में कुल 46 लोगों और संस्थाओं को नामजद किया गया है। इसमें कंपनी के टॉप मैनेजमेंट से लेकर प्रचार करने वाले चेहरे तक शामिल हैं। कंपनी को बनाने वाला मुंबई निवासी समीर अग्रवाल है। जिसने देशभर में हुए इस घोटाले की पटकथा लिखी। जब अरबों रुपये जमा कर लिए तो किस को भनक लगने की देर किए बिना आरोपी फरार हो गया। दो वर्ष से अधिक लंबे समय से फरार समीर अग्रवाल को देश के किसी राज्य की पुलिस अब तक दबोच नहीं पाई है। उसे दुबई में होने की चर्चा बनी रहती है।

राज्य में 50 हजार रुपये के इनामी आरोपी के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस की प्रक्रिया काफी समय पहले शुरू की गई थी। आरोपी समीर अग्रवाल ने उत्तराखंड में शुरुआत में लाभ देकर कई लोगों को अपना विश्वासपात्र बनाया। फिर इनके जरिए लोगों की रकम हासिल की और रफूचक्कर हो गया। फिलहाल उसे तलाशा जा रहा है।


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