हल्द्वानी/देहरादून। उत्तराखंड में एक तरफ विकास और बड़े प्रोजेक्टों के नाम पर जमीनों की कीमतों में तेजी का बाजार गर्म हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य व्यवस्था, महंगाई और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े गंभीर सवाल फिर सामने आ रहे हैं। हल्द्वानी में प्रस्तावित हाई कोर्ट परिसर के नाम पर प्रापर्टी डीलरों ने इंटरनेट मीडिया पर प्लाटों की ऑनलाइन दुकानें सजा दी हैं। रामपुर रोड और आसपास के गांवों में हाई कोर्ट से दूरी बताकर जमीनों के सौदे आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच गणेश महोत्सव को लेकर प्रतिमाओं की कीमत में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी ने श्रद्धालुओं के बजट को प्रभावित किया है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
स्वास्थ्य मोर्चे पर सुशीला तिवारी अस्पताल में दस दिन के भीतर स्वाइन फ्लू से तीसरी मौत सामने आई है। 65 वर्षीय महिला की शनिवार को उपचार के दौरान मौत हुई। काशीपुर की 70 वर्षीय महिला के स्वाइन फ्लू संक्रमित मिलने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि संक्रमित पाए गए एसटीएच के एक चिकित्सक को होम आइसोलेट किया गया है।
दूसरी ओर देहरादून में वर्ष 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा का कथित घोटाला करीब एक दशक बाद फिर चर्चा में है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने पुराने प्रकरण की जांच को फिर सुर्खियों में ला दिया है। ओएमआर शीट में कथित हेरफेर से शुरू हुआ यह मामला अब जांच की लंबी प्रक्रिया के बाद आर्थिक अपराध और धन के लेनदेन के एंगल तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
हाई कोर्ट के नाम पर रामपुर रोड में जमीन का बाजार गर्म
नैनीताल स्थित हाई कोर्ट की प्रस्तावित शिफ्टिंग को लेकर रामपुर रोड पर बेलबाबा के पास तराई केंद्रीय डिवीजन की भाखड़ा रेंज की करीब 30 हेक्टेयर वन भूमि चिह्नित की गई है। परियोजना वन भूमि से जुड़ी होने के कारण केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति सहित कई औपचारिक प्रक्रियाओं से गुजर रही है।
लोनिवि, प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त प्रक्रिया के बाद पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए बेतालघाट क्षेत्र में जमीन तलाशे जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद बेलबाबा की भूमि के हस्तांतरण के लिए आधिकारिक तौर पर परिवेश पोर्टल पर आवेदन किया गया है। लोनिवि हल्द्वानी डिवीजन के अधिशासी अभियंता प्रत्यूष कुमार के अनुसार आवेदन नोडल स्तर तक पहुंच चुका है और आगे इसे भारत सरकार के स्तर पर भेजा जाना है।
यानी प्रस्तावित हाई कोर्ट परियोजना अभी स्वीकृतियों और तकनीकी प्रक्रियाओं के महत्वपूर्ण चरणों से गुजर रही है। डिजाइन और डीपीआर को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी आगे की स्वीकृति के बाद गति पकड़ेगी। निजी कंपनी के चयन सहित कई चरण बाकी हैं।
इसी बीच प्रापर्टी डीलरों ने संभावित भविष्य के विकास को आज की जमीन की बिक्री का आधार बना दिया है। फेसबुक सहित विभिन्न इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों पर प्लाटों की पोस्ट सामने आ रही हैं। पोस्ट में प्लाट की लंबाई-चौड़ाई, दिशा, कीमत, स्थान और हाई कोर्ट के लिए चिह्नित भूमि से दूरी तक बताई जा रही है।
कई पोस्ट में सड़क की चौड़ाई, हाईवे से दूरी और आसपास मौजूद स्कूल जैसी सुविधाओं का उल्लेख कर ग्राहकों को आकर्षित किया जा रहा है। जमीन के कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार पिछले दो माह में इस बेल्ट में जमीन की कीमतों में तेजी दिखाई दी है।
सवाल यह है कि प्रोजेक्ट अभी प्रक्रिया में है तो जमीन के दाम कैसे दौड़ने लगे?
यहीं से प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा होता है। हाई कोर्ट की प्रस्तावित भूमि को लेकर सरकारी स्तर पर अभी स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में प्रापर्टी डीलरों द्वारा भविष्य के विकास का दावा करके जमीन बेचने का कारोबार कितना पारदर्शी है, इसकी निगरानी जरूरी हो जाती है।
खरीदारों को भी किसी ऑनलाइन पोस्ट या मौखिक दावे के आधार पर जमीन खरीदने से पहले भू-अभिलेख, भूमि की प्रकृति, स्वामित्व, नक्शा, सड़क की स्थिति और संबंधित विभागों की अनुमति की पूरी जांच करनी चाहिए।
गणेश प्रतिमाओं पर महंगाई की मार, कीमत 25 प्रतिशत तक बढ़ी
गणेश महोत्सव की तैयारियों के बीच इस वर्ष श्रद्धालुओं को बप्पा की प्रतिमा के लिए ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ रही है। प्रतिमा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और परिवहन लागत बढ़ने के कारण कीमतों में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
पिछले वर्ष करीब चार हजार रुपये में मिलने वाली प्रतिमा अब लगभग 5200 रुपये में तैयार हो रही है। इसी तरह 13 हजार रुपये की प्रतिमा के लिए इस बार करीब 16 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
मूर्ति कारोबारियों के अनुसार जूट के रेशे, बांस के डंडे, सुतली, पीओपी और रंगों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। प्रतिमा निर्माण में लगने वाली मेहनत और पंडाल तक पहुंचाने का भाड़ा अलग से बढ़ा है।
25 वर्षों से मिट्टी की प्रतिमा बनाने वाले देवाराम के अनुसार इस बार पांच से आठ फीट तक की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। घर में स्थापना के लिए छोटी प्रतिमाओं की कीमत करीब 200 रुपये से शुरू हो रही है। ढाई फीट की प्रतिमा, जो पहले करीब 500 रुपये में तैयार हो जाती थी, अब लगभग 800 रुपये तक पहुंच गई है।
इको फ्रेंडली प्रतिमाओं की बढ़ी मांग
पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए आयोजन समितियां मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रही हैं। देहरादून दुर्गाबाड़ी में पिछले 35 वर्षों से प्रतिमा तैयार कर रहे प्रद्युत कुमार के अनुसार इस वर्ष ढाई से सात फीट तक की पांच प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। सभी प्रतिमाएं मिट्टी से बनाई गई हैं और पानी वाले रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुतली की कीमत 108 रुपये से बढ़कर करीब 260 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने और पराली की लागत बढ़ने से मूर्तिकारों की लागत पर सीधा असर पड़ा है। मिट्टी की उपलब्धता भी चुनौती बनी हुई है।
मूर्तिकारों का कहना है कि आने वाले समय में मिट्टी की व्यवस्था और पारंपरिक मूर्तिकारों को सहायता उपलब्ध कराने पर ध्यान देना जरूरी होगा।
एसटीएच में स्वाइन फ्लू से तीसरी मौत, स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी चिंता
हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में दस दिन के भीतर स्वाइन फ्लू से तीसरी मौत ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को आईसीयू में भर्ती 65 वर्षीय महिला की उपचार के दौरान मौत हुई।
महिला मूल रूप से बागेश्वर की रहने वाली थीं और वर्तमान में लामाचौड़ क्षेत्र में रह रही थीं। वह कैंसर से पीड़ित थीं और उनकी कीमोथैरेपी चल रही थी। निमोनिया की शिकायत के बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद दो सितंबर को उन्हें एसटीएच रेफर किया गया।
इससे पहले तीन सितंबर को नैनीताल निवासी 62 वर्षीय बुजुर्ग और पांच सितंबर को रातीघाट निवासी 65 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू से मौत हुई थी। दोनों पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे।
शनिवार को काशीपुर निवासी 70 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद उन्हें एसटीएच में भर्ती कराया गया। वहीं अस्पताल के एक चिकित्सक के संक्रमित मिलने के बाद उन्हें होम आइसोलेट किया गया है।
फिलहाल अस्पताल में स्वाइन फ्लू से संक्रमित दो मरीजों का उपचार चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों की निगरानी और संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कह रहा है।
एक दशक बाद फिर सुर्खियों में वीपीडीओ परीक्षा घोटाला
देहरादून में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की वर्ष 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है।
छह मार्च 2016 को 236 परीक्षा केंद्रों पर वीपीडीओ के 196 पदों के लिए परीक्षा आयोजित हुई थी। इसमें करीब 87,196 अभ्यर्थी शामिल हुए। 30 मार्च 2016 को परिणाम जारी हुआ और 196 अभ्यर्थियों के चयन की घोषणा की गई।
परिणाम के बाद ही परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर शिकायतें सामने आने लगीं। चयन पैटर्न पर सवाल उठे। एक ही गांव से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के चयन और दो सगे भाइयों के चयन सहित कई बिंदुओं को लेकर संदेह जताया गया।
2017 में जांच कमेटी, परिणाम निरस्त
शिकायतों के बाद 2017 में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई। जांच में परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं की पुष्टि हुई। इसके बाद न्यायालयीय प्रक्रिया के बीच वर्ष 2016 की परीक्षा का परिणाम निरस्त कर दिया गया।
बाद में दोबारा परीक्षा आयोजित हुई। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार पहली परीक्षा में चयनित 196 अभ्यर्थियों में से केवल आठ अभ्यर्थी ही दोबारा चयनित हो पाए। इस परिणाम ने पहली परीक्षा की प्रक्रिया पर उठे सवालों को और गंभीर बना दिया।
विजिलेंस से एसटीएफ तक पहुंचा मामला
वर्ष 2019 में सरकार ने मामले की जांच सतर्कता अधिष्ठान को सौंपी। खुली जांच के बाद जनवरी 2020 में मुकदमा दर्ज किया गया।
वर्ष 2022 में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के अन्य मामले सामने आने के बाद इस पुराने प्रकरण की जांच भी तेज हुई। अगस्त-सितंबर 2022 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जांच विजिलेंस से एसटीएफ को सौंपे जाने की बात सामने आई।
एसटीएफ ने ओएमआर शीटों की फॉरेंसिक जांच कराई। चंडीगढ़ स्थित फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में 54 ओएमआर शीटों में परीक्षा के बाद कथित रूप से छेड़छाड़ कर उत्तरों के गोले भरे जाने की पुष्टि का उल्लेख जांच में सामने आया।
जांच के दौरान ओएमआर स्कैनिंग और अंतिम परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। एसटीएफ ने कई अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके बयान दर्ज किए। कुछ महत्वपूर्ण गवाहों के बयान न्यायालय में भी दर्ज कराए गए।
जांच आगे बढ़ने के साथ प्रकरण परीक्षा की सामान्य अनियमितता से निकलकर कथित ओएमआर हेराफेरी और अभ्यर्थियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के आरोपों तक पहुंचा।
तीन गिरफ्तारियां और अब ईडी की दस्तक
जांच के शुरुआती दौर में आरएमएस टेक्नो साल्यूशंस से जुड़े राजेश पाल, पौड़ी में तैनात शिक्षक मुकेश कुमार शर्मा और काशीपुर निवासी मुकेश चौहान सहित आरोपितों की गिरफ्तारी हुई।
अब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना से जुड़े ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई ने इस पुराने मामले को फिर राष्ट्रीय स्तर की जांच के दायरे में ला दिया है। ईडी की कार्रवाई के बाद सवाल यह है कि कथित परीक्षा घोटाले से जुड़े आर्थिक लेनदेन की कड़ियां कहां तक जाती हैं और जांच में आगे कौन-कौन से नाम सामने आते हैं।
चार घटनाएं, एक बड़ा सवाल
हल्द्वानी में हाई कोर्ट के नाम पर जमीन का बाजार गर्म होना, गणेश प्रतिमाओं की बढ़ती लागत, स्वाइन फ्लू से लगातार मौतें और देहरादून के पुराने भर्ती परीक्षा प्रकरण में ईडी की सक्रियता—चारों घटनाएं अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी हैं, मगर इनसे शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठते हैं।
जमीन के मामले में जरूरत पारदर्शी सूचना और खरीदारों को स्पष्ट तथ्य उपलब्ध कराने की है। गणेश प्रतिमाओं के मामले में पारंपरिक मूर्तिकारों को राहत और पर्यावरण अनुकूल सामग्री को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। स्वाइन फ्लू के मामले में समय पर जांच, निगरानी और अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण जरूरी है। वहीं भर्ती परीक्षा घोटाले में दोषियों तक जांच की अंतिम कड़ी पहुंचना और अभ्यर्थियों के विश्वास को बहाल करना शासन की बड़ी जिम्मेदारी है।
उत्तराखंड में विकास की रफ्तार के साथ पारदर्शिता, स्वास्थ्य सुरक्षा और भर्ती व्यवस्था पर जनता का भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
