साइबर क्राइम से बचाव को लेकर नंदपुर नरका टोपा में जागरूकता कैंप, ग्रामीणों को बताए बचाव के उपाय और हेल्पलाइन नंबर

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बाजपुर। डिजिटल युग में जहां ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई भुगतान और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ा है, वहीं साइबर अपराधियों की सक्रियता भी लगातार बढ़ती जा रही है। आम लोगों को साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ऊधमसिंह नगर द्वारा जागरूकता अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में जिला सचिव एवं जिला सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ममता पंत के निर्देश पर ग्राम नंदपुर नरका टोपा में साइबर क्राइम जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की नियुक्त पैरा लीगल वालंटियर (PLV) टीम ने ग्रामीणों को साइबर अपराध के बदलते स्वरूप, उससे बचने के व्यावहारिक उपाय तथा कानूनी सहायता संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष, महिलाएं, छात्र-छात्राएं और युवा उपस्थित रहे तथा उन्होंने विशेषज्ञों से अपने प्रश्न भी पूछे।
कार्यक्रम की शुरुआत में पैरा लीगल वालंटियरों ने बताया कि आज अधिकांश साइबर अपराध मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से किए जा रहे हैं। अपराधी स्वयं को बैंक अधिकारी, पुलिस, सीबीआई, आयकर विभाग, कूरियर कंपनी या अन्य सरकारी एजेंसी का कर्मचारी बताकर लोगों को झांसे में लेते हैं। कई बार वे डराने, धमकाने अथवा लालच देकर लोगों से बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं और कुछ ही मिनटों में खाते से पूरी रकम निकाल लेते हैं।
ग्रामीणों को बताया गया कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाले कॉल, व्हाट्सएप संदेश, ई-मेल अथवा सोशल मीडिया पर भेजे गए संदिग्ध लिंक पर कभी क्लिक न करें। यदि कोई व्यक्ति किसी प्रकार की बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी, यूपीआई पिन या नेट बैंकिंग पासवर्ड मांगता है तो समझ लेना चाहिए कि वह साइबर ठग हो सकता है। बैंक या सरकारी संस्थाएं कभी भी फोन पर ऐसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगतीं।
शिविर के दौरान विशेष रूप से “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए साइबर अपराध के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। पैरा लीगल वालंटियरों ने बताया कि कुछ गिरोह लोगों को फोन कर स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। वे दावा करते हैं कि संबंधित व्यक्ति किसी अपराध में शामिल है और वीडियो कॉल के माध्यम से घंटों तक मानसिक दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि इस प्रकार का कोई कॉल आए तो तुरंत फोन काट दें और उसकी सूचना पुलिस को दें।
कार्यक्रम में मौजूद PLV शिवानी ने साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाए तो समय बिल्कुल भी न गंवाए। तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय रहते शिकायत करने पर संबंधित बैंक खातों में भेजी गई धनराशि को फ्रीज कराकर वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए पीड़ित को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि मोबाइल फोन में मजबूत पासवर्ड रखें, समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहें तथा किसी भी सार्वजनिक स्थान पर असुरक्षित वाई-फाई नेटवर्क का उपयोग करते समय सावधानी बरतें। मोबाइल में केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें और समय-समय पर उन्हें अपडेट भी करते रहें।
जागरूकता शिविर में ऑनलाइन लोन, निवेश, नौकरी और इनाम के नाम पर होने वाली ठगी के बारे में भी लोगों को सचेत किया गया। बताया गया कि सोशल मीडिया पर कई फर्जी विज्ञापन और वेबसाइटें आकर्षक ऑफर देकर लोगों से पहले रजिस्ट्रेशन शुल्क या प्रोसेसिंग फीस जमा करवाती हैं और बाद में संपर्क समाप्त कर देती हैं। इसलिए किसी भी ऑनलाइन ऑफर पर विश्वास करने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें।
PLV सुनीता ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निशुल्क विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोग, बच्चे तथा अन्य पात्र नागरिक किसी भी कानूनी समस्या में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि नालसा हेल्पलाइन 15100 के माध्यम से भी लोग कानूनी सलाह प्राप्त कर सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर निःशुल्क अधिवक्ता की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
उन्होंने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य केवल मुकदमों में सहायता प्रदान करना ही नहीं, बल्कि लोगों को उनके अधिकारों और कानूनों के प्रति जागरूक बनाना भी है, ताकि समाज में कानूनी साक्षरता बढ़े और लोग समय रहते उचित कदम उठा सकें।
PLV अंजली ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से अपना स्वरूप बदल रहे हैं। अपराधी नई-नई तकनीकों और तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक का जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश, सोशल मीडिया अकाउंट या वित्तीय लेनदेन को हल्के में न लें और तुरंत संबंधित विभाग या पुलिस को इसकी जानकारी दें।
अंजली और सुनीता ने ग्रामीणों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनने के साथ-साथ अपने परिवार के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भी साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी दें। अक्सर साइबर अपराधी ऐसे लोगों को अपना निशाना बनाते हैं जिन्हें तकनीकी जानकारी कम होती है। यदि प्रत्येक परिवार का एक सदस्य भी साइबर सुरक्षा के नियमों को अच्छी तरह समझ ले, तो पूरे परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है।
शिविर के दौरान ग्रामीणों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कई लोगों ने बताया कि उनके मोबाइल पर बैंक अधिकारी बनकर कॉल आ चुके हैं, जबकि कुछ लोगों को फर्जी लोन और केवाईसी अपडेट के नाम पर संदेश प्राप्त हुए थे। पैरा लीगल वालंटियरों ने सभी प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देते हुए सही प्रक्रिया समझाई और भविष्य में सतर्क रहने की सलाह दी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित ग्रामीणों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस जागरूकता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि गांवों में इस प्रकार के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होने चाहिए। उनका कहना था कि साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता सबसे प्रभावी उपाय है। यदि प्रत्येक नागरिक सतर्क रहेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 अथवा स्थानीय पुलिस को देगा, तो साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने भी स्पष्ट किया कि भविष्य में जिले के विभिन्न गांवों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर इसी प्रकार के जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग डिजिटल सुरक्षा, साइबर कानूनों और निशुल्क विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सुरक्षित एवं जागरूक नागरिक बन सकें।


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