रुद्रपुर। उत्तराखंड के रेहड़ी-पटरी एवं ठेला व्यापारियों को सम्मानजनक व्यापारिक पहचान दिलाने और सरकारी व्यवस्थाओं से जोड़ने की मांग को लेकर ठेला व्यापारी उत्थान समिति (पंजीकृत), रुद्रपुर ने गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। समिति का कहना है कि प्रदेश के हजारों रेहड़ी-पटरी संचालक वर्षों से मेहनत और ईमानदारी के साथ अपना व्यवसाय कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें भी संगठित व्यापारियों की तरह पहचान और आवश्यक सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
समिति के अध्यक्ष बाबू राम कश्यप तथा कोषाध्यक्ष सूरज सिंह कश्यप के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि रेहड़ी-पटरी संचालक किसी प्रकार की विशेष रियायत की अपेक्षा लेकर सरकार के पास नहीं पहुंचे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि उन्हें व्यापारिक पहचान मिले और सरकारी प्रक्रियाओं को उनके लिए सरल बनाया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना कारोबार संचालित कर सकें।
ज्ञापन में विशेष रूप से मांग की गई है कि उत्तराखंड सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करे, जिसके माध्यम से पात्र रेहड़ी-पटरी संचालकों को जीएसटी (GST) पंजीकरण की प्रक्रिया में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। जिन छोटे व्यापारियों पर जीएसटी लागू नहीं होता, उन्हें भी नगर निकाय अथवा सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त व्यापारिक पहचान प्रमाण-पत्र जारी किया जाए। समिति का कहना है कि व्यापारिक पहचान मिलने से छोटे व्यापारियों को बैंकिंग सेवाओं, सरकारी योजनाओं, ऋण सुविधाओं तथा डिजिटल लेनदेन से जुड़ने में आसानी होगी।
समिति ने ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा है। पहली मांग के अनुसार पात्र रेहड़ी-पटरी संचालकों के लिए जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल और सहज बनाया जाए। दूसरी मांग में नगर निकायों द्वारा जारी किए जाने वाले वेंडिंग प्रमाण-पत्र अथवा पहचान-पत्र को प्रभावी व्यापारिक पहचान के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया गया है। समिति का कहना है कि वर्तमान समय में अनेक छोटे व्यापारियों के पास अपने व्यवसाय का कोई ऐसा प्रमाण उपलब्ध नहीं होता, जिसे विभिन्न सरकारी अथवा बैंकिंग प्रक्रियाओं में स्वीकार किया जा सके।
तीसरी मांग के तहत जीएसटी, बैंकिंग, ऋण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित सभी प्रक्रियाओं के लिए सिंगल विंडो सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। समिति का मानना है कि अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने के कारण छोटे व्यापारियों का समय और संसाधन दोनों प्रभावित होते हैं। यदि एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध हों तो बड़ी संख्या में व्यापारी औपचारिक व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।
चौथी मांग के रूप में प्रदेशभर में विशेष पंजीकरण एवं जागरूकता शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया गया है। समिति का कहना है कि अनेक रेहड़ी-पटरी संचालकों को सरकारी योजनाओं, वेंडिंग प्रमाण-पत्र, जीएसटी पंजीकरण अथवा अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे शिविरों के माध्यम से उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता मिल सकेगी।
पांचवीं मांग में छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली, बैंकिंग सेवाओं तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही गई है। समिति का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था से जुड़ने पर व्यापारियों की आर्थिक गतिविधियां अधिक पारदर्शी होंगी और उन्हें विभिन्न वित्तीय सुविधाओं का लाभ भी आसानी से प्राप्त हो सकेगा।
ज्ञापन में समिति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रेहड़ी-पटरी संचालक कर व्यवस्था से दूर रहने के पक्षधर नहीं हैं। उनका उद्देश्य सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बनना और नियमों के अनुरूप अपना व्यापार संचालित करना है। ज्ञापन में लिखा गया है, “हम कर से भागना नहीं चाहते, हम व्यवस्था से जुड़ना चाहते हैं। हम भी व्यापारी हैं, हमें भी पहचान चाहिए।”
समिति ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि प्रदेश के हजारों छोटे व्यापारियों को व्यापारिक पहचान, सरल प्रशासनिक प्रक्रिया और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
कोषाध्यक्ष सूरज सिंह कश्यप ने कहा कि रेहड़ी-पटरी संचालक उत्तराखंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। शहरों और कस्बों में बड़ी संख्या में परिवार इसी व्यवसाय पर निर्भर हैं। यदि उन्हें व्यवस्थित पहचान और सरकारी सहयोग मिलेगा तो उनका आर्थिक सशक्तिकरण होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
समिति के अध्यक्ष बाबू राम कश्यप ने कहा कि संगठन लंबे समय से ठेला एवं रेहड़ी व्यापारियों के अधिकारों और हितों के लिए कार्य कर रहा है। भविष्य में भी व्यापारियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का अभियान जारी रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार छोटे व्यापारियों की भावनाओं को समझते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।
ज्ञापन के अंत में समिति ने अपना नारा भी दोहराया—”रेहड़ी-पटरी का सम्मान, उत्तराखण्ड का आर्थिक उत्थान।” समिति का कहना है कि यही भावना प्रदेश के हजारों छोटे व्यापारियों के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने का आधार बन सकती है।
