उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर कटघरे में है। नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान जो घटनाक्रम हुआ, उसने लोकतंत्र को कलंकित कर दिया। पहले कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं ने उनके छह सदस्यों को तलवार और पिस्तौल की नोक पर अगवा कर लिया। पुलिस की मौजूदगी में चुनाव स्थल से कुछ ही दूरी पर यह मामला घटा। हाईकोर्ट तक मामला पहुंचा और अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज हो गया। लेकिन अगले ही दिन लापता सदस्य खुद एक वीडियो संदेश जारी करके सामने आ गए और कहने लगे – “हमारा कोई अपहरण नहीं हुआ, हम अपनी मर्जी से घूमने निकले हैं और हमने स्वेच्छा से मतदान से किनारा किया है।”✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)
सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनता ने इन्हें वोट दिए थे या फिर वोट बिकवाने और बहाने बनाने के लिए?
जनता का गुस्सा: बिकाऊ राजनीति की पोल खुली?सोशल मीडिया पर इस घटनाक्रम के बाद लोगों ने जमकर गुस्सा निकाला। जनता ने साफ कहा कि इन सभी पंचायत सदस्यों को बिकाऊ मान लेना चाहिए। कुछ प्रतिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
- शिवानन्द घिल्डियाल, देहरादून: “भाई बात कड़वी लगेगी लेकिन सच यही है – जनता ने तुम्हें घूमने के लिए नहीं, सेवा के लिए वोट किया था। झूठ मत बोलो, स्वार्थ की दरिया में गोते लगा रहे हो।”
- “चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी, अब ये मिले हुए हैं। उत्तराखंड का जल-जंगल-जमीन बेचने पर आमादा हैं।”
- “इनकी सदस्यता निरस्त करनी चाहिए और परमानेंट घूमने भेज देना चाहिए।”
- “इतने बड़े ‘हुतिये’ हो क्या, कि वोटिंग के दिन घूमने निकल गए? कितने में बेचा अपना वोट?”
- “लगता है मोटा माल मिला है। जनता को बेवकूफ बना रहे हो और कहते हो विकास करेंगे।”
- “कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए इनकी सदस्यता खत्म होनी चाहिए। ये किसको बेवकूफ बना रहे हैं?”
