यूकेएसएसएससी की स्नातक स्तरीय परीक्षा के प्रश्नपत्र को हल करने के लिए खालिद ने मेहनत की जगह शॉर्टकर्ट अपनाया और अपने जाल में न खुद फंसा बल्कि बहन को भी सलाखों के पीछे पहुंचवा दिया।

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हरिद्वार सीआईयू कार्यालय में चली पूछताछ में उसने पूरे घटनाक्रम को बताया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

पता चला कि परीक्षा वाले दिन खालिद मुख्य गेट पर चेकिंग से बचने के लिए पीछे खेतों की तरफ बने छोटे दरवाजे से जुराब में आईफोन 12 मिनी मोबाइल लेकर अंदर पहुंचा। कक्ष में पेपर के तीन पन्नों में 12 प्रश्नों फोटो खींचने में सफल हो गया और उसने जैमर की रेंज से बच रहे शौचालय में जाकर फोटो घर वाले मोबाइल पर भेजे। जहां से उसकी बहन ने आगे प्रोफेसर को भेजे और फिर मामला यहां से खुल गया।

दरअसल, सीपीडब्ल्यूडी में संविदा के तौर पर जेई रह चुके खालिद मलिक निवासी आदमपुर सुल्तानपुर कोतवाली लक्सर की जान पहचान टिहरी गढ़वाल के अमरोडा डिग्री कॉलेज में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन से थी। 2018 में ऋषिकेश नगर निगम में टैक्स इंस्पेक्टर रही सुमन से उसका परिचय हुआ था। पुलिस सूत्रों अनुसार, पूछताछ में खालिद मलिक ने उगला कि उसने तैयारी के दौरान प्रोफेसर सुमन से बात कर कहा था कि उसकी बहन यूकेएसएसएससी की परीक्षा देगी। उसकी कुछ मदद कर देना। उसने ये बात नहीं बताई कि वह खुद परीक्षा दे रहा है।


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