2026 में अप्रैल से नवंबर के बीच राज्यसभा की कुल 75 सीटें खाली हो रही हैं, जिनका चुनावी परिणाम न केवल दिग्गज नेताओं का भविष्य तय करेगा, बल्कि संसद में एनडीए और विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की ताकत नए सिरे से परिभाषित करेगा।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
किस राज्य में कितनी सीटें खाली?
इस चुनावी चक्र में शरद पवार, उपेंद्र कुशवाहा, मल्लिकार्जुन खरगे और एचडी देवेगौड़ा जैसे भारतीय राजनीति के धुरंधरों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये दिग्गज दोबारा सदन में पहुंच पाएंगे या बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में उनकी विदाई तय है? साल 2026 में राज्यसभा का चुनावी कैलेंडर काफी व्यस्त है। अप्रैल में महाराष्ट्र की 7 और बिहार की 5 सीटें खाली हो रही हैं। इसके अलावा झारखंड (2), आंध्र प्रदेश (4), तेलंगाना (1), पश्चिम बंगाल (5) और तमिलनाडु की 6 सीटों पर चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर मुकाबला होगा।
कुशवाहा की वापसी पर संकट
उसके साथ ही मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के राज्यों (असम, अरुणाचल, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम) से भी सदस्य रिटायर होंगे। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की 1-1 सीट पर भी सबकी नजरें टिकी होंगी। वर्तमान में राज्यसभा में एनडीए के पास 129 सीटें हैं, जबकि विपक्ष 78 पर सिमटा हुआ है। 2026 के नतीजे तय करेंगे कि क्या सरकार अपनी मजबूती बरकरार रख पाएगी या विपक्ष सेंधमारी करने में कामयाब होने वाला है। बिहार में 9 अप्रैल 2026 को 5 सीटें खाली हो रही हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025
रिटायर होने वाले नेताओं में आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता और एडी सिंह, जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह (उपसभापति) और रामनाथ ठाकुर, तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। बिहार के हालिया विधानसभा चुनाव और मौजूदा संख्याबल के आधार पर एक राज्यसभा सीट के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। वर्तमान गणित के अनुसार बीजेपी और जेडीयू दो-दो सीटें आसानी से जीत सकते हैं, जबकि एक सीट विपक्ष के पाले में जाएगी।
शरद पवार की राह मुश्किल
ऐसे में बीजेपी के भीतर दावेदारों की लंबी फेहरिस्त को देखते हुए उपेंद्र कुशवाहा के लिए एनडीए के कोटे से दोबारा राज्यसभा जाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद पूरी तरह बदल चुकी है। अप्रैल 2026 में शरद पवार (NCP-SP), प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना UBT) और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। महायुति (बीजेपी, शिवसेना-शिंदे, एनसीपी-अजित) के प्रचंड बहुमत के कारण विपक्ष के पास केवल एक सीट जीतने लायक संख्याबल बचता दिख रहा है।
खरगे और देवेगौड़ा का भविष्य
महाविकास अघाड़ी (MVA) में कांग्रेस के पास सबसे अधिक विधायक हैं। ऐसे में क्या कांग्रेस अपनी इकलौती सीट शरद पवार या उद्धव ठाकरे के उम्मीदवार के लिए छोड़ेगी? यदि कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारती है, तो शरद पवार और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे कद्दावर नेताओं की संसद से विदाई हो सकती है। कर्नाटक में 4 सीटों पर चुनाव होने हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का कार्यकाल 25 जून 2026 को खत्म हो रहा है। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी रिटायर होंगे।
कांग्रेस की 3 सीटें जीतने की स्थिति
कर्नाटक की सत्ता में कांग्रेस के होने के कारण खरगे की वापसी तय मानी जा रही है, क्योंकि कांग्रेस वहां 3 सीटें जीतने की स्थिति में है। बीजेपी के पास केवल एक सीट का विकल्प होगा, जहां उसे यह तय करना होगा कि वह अपने नेता को भेजेगी या सहयोगी जेडीएस (देवेगौड़ा) का समर्थन करेगी। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में नवंबर 2026 तक 10 सीटें खाली होंगी। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, सपा के रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी जैसे नाम शामिल हैं।
बीजेपी का दबदबा बरकरार
यूपी विधानसभा में 37 विधायकों के वोट से एक राज्यसभा सीट जीती जा सकती है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी गठबंधन 8 सीटें और सपा 2 सीटें जीत सकती है। इस चुनाव के बाद राज्यसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व शून्य होने की कगार पर है। राजस्थान से केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म होगा। मध्य प्रदेश से कांग्रेस के बड़े नेता दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन 2026 में रिटायर हो रहे है। गुजरात से कांग्रेस के शक्तिसिंह गोहिल का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है।
राज्यसभा में नए युग की शुरुआत?
आंध्र प्रदेश से वाईएसआरसीपी के दिग्गज नेताओं का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। मनोनीत सदस्य: पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कार्यकाल भी मार्च 2026 में समाप्त हो जाएगा। ये 2026 का चुनाव केवल सीटों के आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह भारतीय राजनीति के कई पुराने स्तंभों के भविष्य का फैसला करेंगे। क्या विपक्षी दल एकजुट होकर अपने बड़े चेहरों को बचा पाएंगे? क्या बीजेपी उच्च सदन में अपने दम पर पूर्ण बहुमत के और करीब पहुंचेगी?
