त्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों में स्वीकृत पद रिक्त होने के बावजूद नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं करने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि स्वीकृत और रिक्त पदों पर ठेके या आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्तियां करना, न केवल युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी है।

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कोर्ट ने इसे राज्य की बड़ी निष्क्रियता माना है।

न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने बीते दिनों एक मामले की सुनवाई के दौरान इसका संज्ञान लिया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका का दायरा बढ़ा दिया है। पीठ ने कहा कि एक ओर युवा सरकारी नौकरियों के इंतजार में ‘ओवरएज’ हो रहे हैं, वहीं सरकार नियमित पदों को भरने के बजाय आउटसोर्स-अस्थायी माध्यमों से काम चला रही है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

कोर्ट की टिप्पणी- शोषणकारी

पीठ ने इस प्रथा को ‘शोषणकारी’ और ‘तर्कहीन’ करार दिया। पीठ ने चतुर्थ श्रेणी पदों को डाइंग कैडर (समाप्त होने वाला संवर्ग) घोषित करने पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जिस नीति को आधार बनाकर इन पदों को खत्म किया जा रहा है, उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही असंवैधानिक घोषित कर चुका है। ऐसे में इन पदों को समाप्त करना रोजगार के अवसरों को खत्म करने जैसा है।

उत्तराखंड में 40 हजार अस्थायी कर्मी

उत्तराखंड में कई विभाग आउटसोर्स, ठेका और संविदा कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं। हालांकि, वर्तमान में राज्य में स्थायी पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से भर्तियों पर रोक है। सरकारी विभागों में चतुर्थ श्रेणी श्रेणी के पदों पर भर्ती नहीं हो रही है। चतुर्थ श्रेणी के पदों पर को सातवें वेतनमान में मृत घोषित कर दिया गया। कर्मचारी संगठन लगातार चतुर्थ श्रेणी पदों को पुनर्जीवित करने की मांग कर रहे हैं।

उत्तराखंड में 22 हजार उपनल कर्मचारियों समेत पीआरडी, ठेका, स्वयं सहायता समूह के जरिए 40 हजार से अधिक अस्थायी कर्मचारी विभिन्न विभागों और निगमों में सेवाएं दे रहे हैं। कई विभागों में इन कर्मचारियों को पूरे वेतनमान, महंगाई भत्ते समेत अन्य सुविधाएं भी मिल रही हैं।

हाईकोर्ट ने उपनल और संविदा कर्मचारियों को नियमित किए जाने के साथ ही समान काम का समान वेतन देने के भी आदेश दिए हैं। इसके बाद नियमितीकरण और समान वेतन देने के लिए सरकार ने कैबिनेट की सब कमेटी का गठन किया है।

आउटसोर्स नियुक्ति पर रोक

आउटसोर्स, संविदा नियुक्तियों पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने 26 अप्रैल 2025 को रोक लगा दी थी। इससे पहले 2003 में कार्मिक विभाग ने यह रोक लगाई थी। अब कोर्ट के ताजा आदेश के बाद आउटसोर्स नियुक्तियों पर नए सिरे से सख्ती की तैयारी की जा रही है।

स्थायी भर्ती हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक

ऊर्जा निगम में कुछ वर्ष पूर्व तकनीशियन ग्रेड के पदों पर स्थायी भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ था। इसे उपनल कर्मियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कर्मियों का तर्क था कि इन पदों पर वे लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं। कोर्ट के आदेश पर इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई थी।


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