देव होम्स कॉलोनी में बदहाल सड़कें और घटिया निर्माण से residents परेशान? रेरा की मुहर के पीछे छिपा खेल—देव होम्स में घटिया निर्माण पर कब होगी कार्रवाई

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काशीपुर मुख्य हाईवे से बिंदुखेड़ा और देव होम्स कॉलोनी को जोड़ने वाली सड़कों की जर्जर हालत से स्थानीय निवासी लंबे समय से परेशान हैं। चुनाव से पहले सड़क निर्माण का वादा किया गया था, लेकिन छह महीने बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। गड्ढों से भरी सड़कों के कारण आए दिन वाहन पंचर हो रहे हैं और लोगों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


वहीं कॉलोनी में बिल्डर पर घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल करने के आरोप भी लग रहे हैं। कई मकानों में छत से पानी टपकने, दीवारों में दरारें आने और जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने की शिकायतें सामने आई हैं। खुले में पानी जमा होने से डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
ग्राम प्रधान ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए करीब 3 करोड़ 98 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं और जल्द कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इधर, कॉलोनी वासियों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग करते हुए कार्रवाई न होने पर कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी है।

रेरा की मुहर के पीछे छिपा खेल—देव होम्स में घटिया निर्माण पर कब होगी कार्रवाई?”
देव होम्स कॉलोनी आज उस कड़वी सच्चाई का प्रतीक बन चुकी है, जहां सपनों का घर खरीदने वाले लोग ठगी और लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। जिस भरोसे के साथ लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर मकान खरीदे, वही भरोसा अब दरकती दीवारों, टपकती छतों और बदहाल सुविधाओं के बीच टूटता नजर आ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल बिल्डर की नीयत पर उठता है। आरोप हैं कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी की गई और जल निकासी जैसी आवश्यक व्यवस्था तक को नजरअंदाज कर दिया गया। नतीजा यह है कि कॉलोनी में जगह-जगह पानी भर रहा है, जिससे डेंगू और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। क्या यही वह “आधुनिक कॉलोनी” है, जिसका सपना दिखाया गया था?
और हैरानी की बात यह है कि यह प्रोजेक्ट रेरा से स्वीकृत बताया जा रहा है। यदि ऐसा है, तो यह केवल बिल्डर की लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता भी है। क्या रेरा अधिकारियों ने बिना जमीनी जांच के कागजों में ही मंजूरी दे दी? यदि हां, तो यह सीधा-सीधा आम जनता के साथ अन्याय है।
कॉलोनी वासी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका गुस्सा जायज है, क्योंकि उन्होंने केवल मकान नहीं खरीदा, बल्कि एक सुरक्षित और व्यवस्थित जीवन का सपना खरीदा था।

घटिया निर्माण की मार झेल रहे कॉलोनी वासी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उसने अपनी मेहनत की कमाई जोड़कर सपनों का घर बनाया था, लेकिन बिल्डर की लापरवाही ने उन अरमानों पर पानी फेर दिया। छत में आई खराबी को ठीक कराने के लिए अब उसे 20 से 30 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। पीड़ित ने मांग की है कि बिल्डर या तो स्वयं मरम्मत कराए या खर्च की भरपाई करे। कॉलोनी वासी ने प्रशासन से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है, ताकि भविष्य में अन्य लोगों को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े।


अब समय आ गया है कि प्रशासन सख्त रुख अपनाए। बिल्डर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, रेरा की भूमिका की जांच हो और कॉलोनी में सभी बुनियादी सुविधाएं तुरंत बहाल की जाएं। अन्यथा, यह मामला केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सिस्टम पर अविश्वास की गहरी लकीर खींच देगा।


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