मिशन 2027 पर भारी पड़ा पिथौरागढ़ कांड: आईपीएस लोकेश्वर सिंह पर एफआईआर के आदेश से सरकार की छवि पर सवाल

Spread the love



पिथौरागढ़।उत्तराखंड में सत्तारूढ़ दल के बहुप्रचारित “मिशन 2027” के बीच पिथौरागढ़ से आई एक सनसनीखेज खबर ने सरकार की कानून-व्यवस्था और जवाबदेही के दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय सिंह की अदालत ने 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी लोकेश्वर सिंह के खिलाफ गंभीर आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब राज्य सरकार “सुशासन” और “कानून का राज” को मिशन 2027 की आधारशिला बता रही है। ऐसे में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर ही अत्याचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगना राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


क्या है मामला?
व्यापारी लक्ष्मी राज जोशी की शिकायत के अनुसार, 6 फरवरी 2023 को वह अपने बेटे के साथ एसपी कार्यालय परिसर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां आईपीएस लोकेश्वर सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन एक कमरे में ले जाकर निर्वस्त्र किया और बुरी तरह पीटा।
पीड़ित का दावा है कि उनके सिर पर 10-12 टांके आए और शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं। किसी तरह बाद में उन्हें वहां से बाहर निकलने दिया गया।
अदालत का सख्त रुख
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय सिंह ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने साफ किया कि प्रथम दृष्टया मामला मानवाधिकार हनन और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 323, 342, 346, 504, 506, 392 और 120B के तहत मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
मिशन 2027 की साख पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मामले “मिशन 2027” की विश्वसनीयता पर सीधा असर डाल सकते हैं। सरकार जहां विकास, पारदर्शिता और जवाबदेही की बात कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर इस प्रकार के आरोप जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं।
विपक्ष को भी अब सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। आने वाले समय में यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।
प्रशासनिक हलचल तेज
अदालत के आदेश के बाद पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो न केवल विभागीय कार्रवाई बल्कि उच्चस्तरीय जांच एजेंसियों की एंट्री भी संभव है।
बड़ा सवाल
मिशन 2027 के सपनों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है—
क्या उत्तराखंड में कानून का राज केवल दावों तक सीमित है, या वास्तव में हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी?
यह मामला आने वाले दिनों में न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक दिशा भी तय कर सकता है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं।


Spread the love