

उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहाँ असली मुद्दों की जगह फर्जी नैरेटिव और डिजिटल अफवाहें हावी हो रही हैं। हाल ही में कांग्रेस नेता Ganesh Godiyal के नाम से कथित फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर बंगाली समाज को लेकर आपत्तिजनक बयान वायरल किया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि समाज में अविश्वास और विभाजन की आशंका भी बढ़ा दी है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
रुद्रपुर में आयोजित एक बैठक में पूर्व विधायक Rajkumar Thukral, विधायक Narayan Pal, पूर्व विधायक Ramanand Mahajan और कांग्रेस नगर अध्यक्ष ममता रानी ,ममता हालदार, उमा सरकार, योगेश चौहान, बाबू विश्वकर्मा, सतीश कुमार, बाबू विश्वकर्मा, विकास मलिक, विकास बंसल, सुनील चुग, नरेश सागर,सहित कई नेताओं ने इस मामले को गंभीर साजिश करार दिया। उनका आरोप है कि किसी ने सुनियोजित तरीके से फर्जी आईडी बनाकर समाज विशेष के खिलाफ बयान पोस्ट किए, ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके और चुनावी माहौल को विषाक्त किया जा सके।
रुद्रपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व विधायको Rajkumar Thukral, Premanand Mahajan और Narayan Pal ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि Ganesh Godiyal के नाम से फर्जी आईडी बनाकर सोशल मीडिया पर भ्रामक और आपत्तिजनक पोस्ट वायरल की जा रही हैं, जो समाज में भ्रम और वैमनस्य फैलाने का प्रयास है। नेताओं ने इसे एक गंभीर साजिश बताते हुए कहा कि ऐसे कृत्य लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ हैं। उन्होंने जानकारी दी कि आज शाम 6 बजे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। साथ ही दोषी व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई जाएगी, ताकि भविष्य में कोई इस तरह की हरकत करने का साहस न कर सके।
यह मामला केवल एक फर्जी पोस्ट का नहीं है—यह उस खतरनाक प्रवृत्ति का संकेत है, जिसमें ‘डेमोग्राफी चेंज’ जैसे संवेदनशील शब्दों को हथियार बनाकर समाज को बांटने की कोशिश की जाती है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami अपने भाषणों में कई बार जनसंख्या संतुलन की बात उठाते रहे हैं, लेकिन जब इसी मुद्दे को तोड़-मरोड़ कर सोशल मीडिया पर फैलाया जाता है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बन जाता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बंगाली समाज, जो दशकों से तराई क्षेत्र में रहकर उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करता आया है, उसे इस तरह की राजनीति का निशाना बनाया जा रहा है। क्या यह वही उत्तराखंड है, जो ‘देवभूमि’ के नाम से अपनी समावेशी संस्कृति के लिए जाना जाता है?
राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि चुनाव जीतने के लिए समाज को बांटना आसान रास्ता जरूर हो सकता है, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम बेहद खतरनाक होते हैं। फर्जी आईडी बनाकर बयान फैलाना केवल आईटी एक्ट का उल्लंघन के साथ साथ सामाजिक सौहार्द पर सीधा हमला है।
प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर असली दोषियों को सामने लाया जाए। साथ ही, राजनीतिक दलों को भी आत्ममंथन करना होगा कि वे किस दिशा में जा रहे हैं—क्या वे विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर बात करेंगे, या फिर ‘डेमोग्राफी’ जैसे शब्दों के सहारे समाज में डर और विभाजन का बीज बोते रहेंगे?
अंततः, यह लड़ाई उत्तराखंड की सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। यदि समय रहते इस तरह की साजिशों पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले समय में हर समाज, हर वर्ग इसी तरह के डिजिटल षड्यंत्रों का शिकार बन सकता है।
रुद्रपुर में एक कथित फर्जी फेसबुक आईडी से आपत्तिजनक पोस्ट वायरल होने के बाद उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेताओं ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सामाजिक वैमनस्य फैलाना और पार्टी की छवि धूमिल करना है। मामले की शिकायत पुलिस को दी गई है और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। चेतावनी दी गई कि कार्रवाई न होने पर आंदोलन किया जाएगा।




