

यहां एक 10 साल के मासूम बच्चे ने ऐसा दावा किया है जिसे सुनकर बड़े-बुजुर्गों के भी होश उड़ गए हैं। जिले के जैकमाबाद गांव में रहने वाले इस बालक का कहना है कि वह कोई साधारण बच्चा नहीं, बल्कि आमेर के महान शासक राजा मानसिंह का पुनर्जन्म है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड) रही थी।
दरअसल, 10 वर्षीय कान्हाराम बैरवा के इस दावे ने पूरे इलाके में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है। बच्चा न केवल खुद को राजा मानसिंह बता रहा है, बल्कि वह 400 साल पहले के इतिहास की ऐसी कड़ियां जोड़ रहा है, जिन्हें सुनकर लोग दांतों तले उंगली दबा रहे हैं। कान्हाराम का दावा है कि उसे अपने पिछले जन्म की हर बात याद है और वह वही राजा मानसिंह है जिनका निधन सन 1614 में हुआ था।
हल्दीघाटी का युद्ध और आमेर के खजाने की कहानी
कान्हाराम की बातों में सबसे चौंकाने वाला हिस्सा इतिहास की वो घटनाएं हैं, जिन्हें अक्सर किताबों में पढ़ाया जाता है। बालक का दावा है कि उसने हल्दीघाटी के भीषण युद्ध में सक्रिय रूप से भाग लिया था। इतना ही नहीं, उसने गांव वालों और अपने परिवार के सामने यह भी कहा है कि उसने आमेर के किले में भारी मात्रा में खजाना छिपाकर रखा है। बताया जा रहा है कि बच्चा जब इन बातों का जिक्र करता है, तो उसके आत्मविश्वास को देखकर कोई भी चकित रह जाए।
आमतौर पर 10 साल की उम्र में बच्चे खेल-कूद और स्कूल की बातों में मशगूल रहते हैं, लेकिन कान्हाराम के मुंह से युद्ध और खजाने की बातें सुनकर स्थानीय लोग इसे किसी दैवीय चमत्कार से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह बच्चे की कोरी कल्पना भी हो सकती है, लेकिन जिस बारीकी से वह बातें बताता है, उसने शोध का विषय जरूर खड़ा कर दिया है।
रहन-सहन में ‘राजपूती’ ठाट और अलग व्यवहार
कान्हाराम के परिवार का कहना है कि उसका व्यवहार बचपन से ही अन्य बच्चों से काफी अलग रहा है। उसके माता-पिता बताते हैं कि वह छोटी उम्र से ही राजपूतों जैसी जीवनशैली अपनाने की कोशिश करता है। परिवार के अनुसार, कान्हाराम ने अपने खाने-पीने के तरीके भी बदल लिए हैं। वह परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बैठकर भोजन करने के बजाय अलग बर्तनों में खाना खाना पसंद करता है और उसके चलने-बोलने के अंदाज में भी एक अलग तरह का ‘राजसी’ ठसक दिखाई देता है।
गांव के लोग बताते हैं कि कान्हाराम अक्सर पुरानी रियासतों और राजाओं की बातें करता है। उसके व्यवहार में अचानक आए इन बदलावों ने उसके परिवार को भी धर्मसंकट में डाल दिया है। माता-पिता को समझ नहीं आ रहा कि वे अपने बच्चे की इन बातों को सच मानें या उसे किसी मानसिक स्थिति का हिस्सा समझें।
चमत्कार या मनोवैज्ञानिक प्रभाव? गांव में छिड़ी बहस
जैसे-जैसे यह खबर आसपास के इलाकों में फैली, जैकमाबाद गांव में लोगों का तांता लगना शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ लोग इसे पूरी तरह से आस्था और पुनर्जन्म से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं आधुनिक सोच रखने वाले लोग इसे बच्चे के दिमाग पर पड़े किसी फिल्म या कहानी के प्रभाव के तौर पर देख रहे हैं। असल में, पुनर्जन्म के दावों को लेकर विज्ञान हमेशा से ही संशय में रहा है, लेकिन भारत के ग्रामीण अंचलों में ऐसी घटनाएं अक्सर कौतूहल का विषय बनती हैं।
फिलहाल, इस पूरे मामले में किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि या वैज्ञानिक जांच नहीं हुई है। शिक्षाविदों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि कई बार बच्चे ‘फाल्स मेमोरी सिंड्रोम’ का शिकार हो जाते हैं, जिसमें वे सुनी-सुनाई बातों को अपना अनुभव समझने लगते हैं। खैर, सच जो भी हो, लेकिन फिलहाल कान्हाराम बैरवा का यह ‘राजसी’ दावा राजस्थान के टोंक में चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।




