देहरादून। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उत्तराखंड भाजपा में संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलावों का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजेय कुमार को उत्तराखंड से हटाकर राजस्थान की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण कुमार सिंह ने सोमवार को इसके आदेश जारी किए।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
अजेय कुमार वर्ष 2019 से उत्तराखंड में संगठन की कमान संभाल रहे थे। उनके कार्यकाल में भाजपा ने संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति के कई महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए। अब उन्हें राजस्थान जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में भेजा गया है।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को मिशन 2027 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरे के दौरान संगठन और सरकार की गतिविधियों की गहन समीक्षा की थी। उनके लौटने के तुरंत बाद यह बदलाव होने से चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारी के स्तर पर भी जल्द बदलाव संभव हैं। भाजपा नेतृत्व चुनावी रणनीति को धार देने और विपक्ष के हमलों का प्रभावी जवाब तैयार करने के लिए नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंप सकता है।
प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कहा कि अजेय कुमार के नेतृत्व में संगठन ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं और राजस्थान में उनकी नियुक्ति भाजपा संगठन को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
मिशन 2027 और भाजपा की बेचैनी: क्या बढ़ता यूकेडी जनाधार है वजह?
उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। भाजपा द्वारा संगठन में किए जा रहे लगातार बदलावों को केवल सामान्य प्रक्रिया मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे चुनावी गणित और बदलते राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
हाल के वर्षों में उत्तराखंड के मूल मुद्दों—भू-कानून, मूल निवास, पलायन, रोजगार और राज्य आंदोलन की मूल भावनाओं—को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) फिर सक्रिय दिखाई दे रहा है। भले ही यूकेडी का चुनावी प्रदर्शन अभी सीमित रहा हो, लेकिन जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों पर उसकी पकड़ ने बड़े दलों का ध्यान आकर्षित किया है।
भाजपा अच्छी तरह जानती है कि उत्तराखंड की राजनीति में छोटे मत प्रतिशत भी चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में संगठनात्मक फेरबदल, नई रणनीति और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने के प्रयासों को यूकेडी सहित क्षेत्रीय दलों के बढ़ते प्रभाव की पृष्ठभूमि में भी देखा जा सकता है।
2027 का चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं होगा, बल्कि यह उत्तराखंड की अस्मिता, स्थानीय अधिकारों और विकास के मॉडल पर भी जनमत का परीक्षण होगा। यही कारण है कि भाजपा अभी से हर राजनीतिक चुनौती का मुकाबला करने के लिए अपने संगठन को नए सिरे से तैयार करती दिखाई दे रही है।
“मिशन 2027: क्या यूकेडी के बढ़ते प्रभाव से भाजपा में बढ़ी राजनीतिक सतर्कता?”
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उत्तराखंड भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी किस नए चेहरे को सौंपी जाती है और मिशन 2027 के लिए पार्टी का अगला कदम क्या होगा।
