संपादकीय स्पा सेंटरों की आड़ में अनैतिक कारोबार: जवाबदेही किसकी?स्पा सेंटरों की आड़ में संगठित देह व्यापार और मानव तस्करी: क्या यह समाज के लिए लव जिहाद से भी बड़ा खतरा है?

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ग्रेटर नोएडा में स्पा सेंटरों पर हुई छापेमारी और बड़ी संख्या में युवतियों के रेस्क्यू की घटना ने एक बार फिर देशभर में संचालित स्पा सेंटरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड के रुद्रपुर, देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी सहित कई शहरों में भी समय-समय पर पुलिस कार्रवाई में ऐसे मामलों का खुलासा हुआ है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

यदि लाइसेंस प्राप्त संस्थानों की आड़ में मानव तस्करी, ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण का संगठित नेटवर्क चल रहा है, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती है।


सरकार स्पा सेंटरों को विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं और लाइसेंस के आधार पर संचालन की अनुमति देती है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है कि लाइसेंस की आड़ में मानव तस्करी, देह व्यापार, ब्लैकमेलिंग या अन्य अवैध गतिविधियां संचालित न हों। यदि किसी केंद्र में कानून का उल्लंघन होता है, तो केवल कर्मचारियों पर ही नहीं बल्कि संचालकों और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
यदि किसी राज्य में बार-बार ऐसे मामले सामने आते हैं, तो सरकार को स्पा सेंटरों के लिए कड़े मानक, नियमित निरीक्षण, सीसीटीवी रिकॉर्ड की निगरानी, कर्मचारियों का सत्यापन और लाइसेंस की समय-समय पर समीक्षा जैसी व्यवस्था लागू करनी चाहिए। इससे वैध व्यवसाय करने वाले स्पा सेंटरों की प्रतिष्ठा भी सुरक्षित रहेगी और अवैध गतिविधियों पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
यह भी आवश्यक है कि किसी अपराध को किसी धर्म, जाति या समुदाय से जोड़कर देखने के बजाय जांच एजेंसियों को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करने दी जाए। अपराधी की पहचान उसके अपराध से होनी चाहिए, उसकी धार्मिक पहचान से नहीं।
उत्तराखंड सहित पूरे देश में यदि स्पा सेंटरों की आड़ में अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, मानव तस्करी की रोकथाम और समाज की नैतिक जिम्मेदारी का भी विषय है। सरकार, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और समाज—सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि लाइसेंस की आड़ में कोई भी अवैध कारोबार फलने-फूलने न पाए।

उत्तराखंड के रुद्रपुर, हल्द्वानी, देहरादून और हरिद्वार सहित कई शहरों में स्पा सेंटरों की आड़ में कथित अनैतिक गतिविधियों के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) और स्थानीय पुलिस ने समय-समय पर छापेमारी कर कई युवतियों का रेस्क्यू किया, आरोपियों को गिरफ्तार किया और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्पा सेंटरों पर कार्रवाई की। इसके बावजूद कुछ समय बाद कई प्रतिष्ठान फिर से संचालित होते दिखाई देते हैं, जिससे जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर स्थायी समाधान कब मिलेगा।
रुद्रपुर में कई बार हुई कार्रवाई ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल छापेमारी पर्याप्त कदम साबित नहीं हो सकती। आवश्यक है कि स्पा सेंटरों का नियमित निरीक्षण, कर्मचारियों का अनिवार्य सत्यापन, लाइसेंस की समय-समय पर समीक्षा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सार्वजनिक चर्चा में कुछ लोग मिलीभगत या “सेटिंग” जैसे आरोप भी लगाते हैं, लेकिन ऐसे आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकती है। इसलिए पारदर्शी जांच और जवाबदेही बेहद आवश्यक है। वैध रूप से संचालित स्पा सेंटरों की प्रतिष्ठा बनाए रखते हुए अवैध गतिविधियों पर प्रभावी और स्थायी रोक लगाना प्रशासन, कानून-व्यवस्था और समाज सभी की साझा जिम्मेदारी है।


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