उत्तराखंड के महान सपूत, विश्वविख्यात निशानेबाज जसपाल राणा को भावभीनी श्रद्धांजलि

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उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद समस्त आंदोलनकारियों, प्रदेशवासियों तथा देशभर के खेल प्रेमियों की ओर से भारत के महान निशानेबाज, उत्कृष्ट प्रशिक्षक और उत्तराखंड की शान स्वर्गीय जसपाल राणा जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करती है।
आज हम सभी अत्यंत दुःख और वेदना के साथ उस महान व्यक्तित्व को स्मरण कर रहे हैं, जिसने अपने अदम्य साहस, कठोर परिश्रम, अनुशासन और असाधारण प्रतिभा के बल पर न केवल उत्तराखंड का, बल्कि पूरे भारतवर्ष का नाम विश्व पटल पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया। मात्र 49 वर्ष की आयु में उनका असामयिक निधन खेल जगत, उत्तराखंड समाज और राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड


जसपाल राणा केवल एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि वे लाखों युवाओं के प्रेरणास्रोत, संघर्ष और सफलता के प्रतीक तथा उत्तराखंड की प्रतिभा और परिश्रम की जीवंत मिसाल थे। पहाड़ की धरती से निकलकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर जो उपलब्धियां अर्जित कीं, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बनी रहेंगी।
उत्तराखंड की पवित्र भूमि ने अनेक वीर, साहित्यकार, सैनिक और प्रतिभाशाली व्यक्तित्व देश को दिए हैं। इन्हीं महान विभूतियों की श्रेणी में जसपाल राणा का नाम अत्यंत सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा। उन्होंने ऐसे समय में निशानेबाजी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई, जब भारत में यह खेल अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय था। सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश को अनेक अंतरराष्ट्रीय पदक दिलाए।
एशियाई खेलों, विश्व प्रतियोगिताओं और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उनके द्वारा अर्जित स्वर्णिम सफलताओं ने भारत को गौरवान्वित किया। उन्होंने सिद्ध किया कि यदि संकल्प दृढ़ हो तो पर्वतों की ऊंचाइयों से निकलकर विश्व की ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है। उनकी उपलब्धियों ने न केवल खेल जगत को नई दिशा दी, बल्कि पहाड़ के युवाओं में भी आत्मविश्वास का संचार किया कि वे किसी भी क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
जसपाल राणा की लोकप्रियता केवल खेल मैदानों तक सीमित नहीं रही। उत्तराखंड की संस्कृति और लोकजीवन ने भी उन्हें अपने हृदय में विशेष स्थान दिया। उनकी असाधारण सफलताओं से प्रभावित होकर उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक और गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी जी ने उनके सम्मान में “बंदूक्या जसपाल राणा” जैसा ऐतिहासिक लोकगीत रचा। यह घटना अपने आप में अद्वितीय थी। किसी खिलाड़ी के सम्मान में लोकगीत की रचना होना इस बात का प्रमाण है कि जसपाल राणा जनता के दिलों में किस स्तर तक बस चुके थे।
यह गीत केवल एक खिलाड़ी की प्रशंसा नहीं था, बल्कि उत्तराखंड के सपनों, संघर्षों और उपलब्धियों का सांस्कृतिक प्रतीक बन गया। कैसेट युग में यह गीत घर-घर सुना गया और आज भी नई पीढ़ी उसे सुनकर प्रेरणा प्राप्त करती है। जसपाल राणा की उपलब्धियों ने लोकसंस्कृति और खेल जगत के बीच एक ऐसा सेतु बनाया, जो विरले ही देखने को मिलता है।
उनका जीवन हमें यह भी सिखाता है कि सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि वह पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने का माध्यम बनती है। जब कोई व्यक्ति अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करता है, तो उसका प्रभाव हजारों-लाखों लोगों के जीवन पर पड़ता है। जसपाल राणा ने यही कार्य किया। उन्होंने उत्तराखंड के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस दिया।
एक खिलाड़ी के रूप में उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया, वहीं एक प्रशिक्षक के रूप में भी उन्होंने भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अनेक युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया और उनके भीतर विजेता बनने का आत्मविश्वास विकसित किया। उनकी कोचिंग और मार्गदर्शन का लाभ भारतीय खेल जगत को लंबे समय तक मिलता रहेगा।
उनकी विनम्रता, सरलता और कर्मनिष्ठा भी उतनी ही प्रेरणादायक थी जितनी उनकी खेल उपलब्धियां। इतनी बड़ी सफलताएं अर्जित करने के बावजूद वे सदैव अपनी जड़ों से जुड़े रहे। उत्तराखंड की संस्कृति, भाषा और परंपराओं के प्रति उनका गहरा लगाव था। वे हमेशा अपने प्रदेश और देश का नाम रोशन करने के लिए समर्पित रहे।
आज जब हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं, तब हमारे मन में गर्व और दुःख दोनों भाव एक साथ उपस्थित हैं। गर्व इस बात का कि हमारी देवभूमि ने ऐसा महान सपूत देश को दिया, और दुःख इस बात का कि वह महान व्यक्तित्व इतनी कम आयु में हमें छोड़कर चला गया। किंतु महान व्यक्तित्व कभी वास्तव में विदा नहीं होते। उनके कार्य, उनके आदर्श और उनकी उपलब्धियां सदैव जीवित रहती हैं।
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद मानती है कि जसपाल राणा का जीवन उत्तराखंड की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायक पाठशाला है। उनके संघर्ष, समर्पण और उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि कठिन परिस्थितियां कभी भी सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं। दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर परिश्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण व्यक्ति को असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
आज सम्पूर्ण उत्तराखंड शोकाकुल है। खेल प्रेमी, युवा वर्ग, सांस्कृतिक जगत, सामाजिक संगठन और समस्त प्रदेशवासी अपने इस महान पुत्र को नम आंखों से विदाई दे रहे हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवार, मित्रों और उनके असंख्य प्रशंसकों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
जसपाल राणा जी का नाम उत्तराखंड और भारत के इतिहास में सदैव सम्मान और गौरव के साथ लिया जाएगा। उनकी उपलब्धियां, उनका संघर्ष, उनका व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
आप भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, किंतु आपकी स्मृतियां, आपकी सफलताएं और आपके द्वारा स्थापित आदर्श सदैव जीवित रहेंगे।
देवभूमि उत्तराखंड का प्रत्येक नागरिक आपके प्रति कृतज्ञ है।
भावभीनी श्रद्धांजलि!
ॐ शांति।


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