हेपेटाइटिस प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर सीएमओ ने दिए कड़े निर्देश, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

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उधम सिंह नगर,नयागांव एवं आसपास के क्षेत्रों में वायरल हेपेटाइटिस (पीलिया) के संदिग्ध मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। बीमारी के संभावित प्रसार को रोकने तथा प्रभावित लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने सोमवार को प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न टीमों द्वारा किए जा रहे कार्यों का जायजा लिया और मौके पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड


सीएमओ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनस्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीमों को निर्देशित किया कि प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण कार्य किया जाए और ऐसे व्यक्तियों की पहचान की जाए जिनमें पीलिया, बुखार, उल्टी, कमजोरी, भूख न लगना अथवा पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हों। ऐसे सभी लोगों की तत्काल जांच कर उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया जाए।
निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने नयागांव, आसपास की बस्तियों तथा प्रभावित परिवारों के घरों का दौरा किया। उन्होंने ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा बीमारी के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इस दौरान कई ग्रामीणों ने पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की। ग्रामीणों का कहना था कि कुछ स्थानों पर पेयजल स्रोतों का पानी दूषित दिखाई दे रहा है तथा बरसात के कारण जल स्रोतों में गंदगी पहुंचने की आशंका बनी हुई है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पेयजल स्रोतों की नियमित जांच कराई जाए तथा जिन स्थानों पर पानी की गुणवत्ता संदिग्ध हो, वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि बीमारी का प्रमुख कारण दूषित पानी होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, इसलिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरटी) पहले से ही क्षेत्र में सक्रिय है। टीम द्वारा सार्वजनिक पेयजल स्रोतों, हैंडपंपों, पाइपलाइन जलापूर्ति केंद्रों तथा प्रभावित परिवारों के घरों से पानी के नमूने एकत्र किए गए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद बीमारी के वास्तविक कारणों का पता लगाने में सहायता मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देशित किया कि क्षेत्र में व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाए। उन्होंने कहा कि केवल उपचार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को बीमारी से बचाव के उपायों की जानकारी देना भी उतना ही आवश्यक है। ग्रामीणों को उबला हुआ पानी पीने, भोजन को ढककर रखने, खुले में रखे खाद्य पदार्थों का सेवन न करने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाए।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा ग्राम सभाओं के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए ताकि बीमारी का प्रसार रोका जा सके। विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
सीएमओ ने निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्थापित अस्थायी चिकित्सा शिविरों की भी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति बनी रहे। यदि किसी मरीज की स्थिति गंभीर हो तो उसे तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर किया जाए।
इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी संदिग्ध मरीजों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है और उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। विभाग की ओर से आवश्यक दवाएं एवं चिकित्सा सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई गई हैं।
आईडीएसपी (इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम) टीम के डॉ. संतोष कुमार पांडेय ने बताया कि रोग की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि टीम लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर रही है तथा संदिग्ध मामलों की पहचान कर आवश्यक जानकारी एकत्रित कर रही है। प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर बीमारी के प्रसार की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्र के आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। सभी कर्मियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सक्रिय रहकर बीमारी के लक्षणों वाले लोगों की जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कई प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने मरीजों एवं उनके परिजनों से बातचीत कर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त की तथा उन्हें आवश्यक सावधानियों के बारे में बताया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सभी प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि समय रहते उठाए गए कदमों से बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। कई ग्रामीणों ने मांग की कि पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार किया जाए और जल स्रोतों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।
सीएमओ ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग अकेले इस चुनौती का सामना नहीं कर सकता। जल संस्थान, स्थानीय प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधि एवं अन्य विभागों का सहयोग भी आवश्यक है। सभी विभागों को मिलकर कार्य करना होगा ताकि बीमारी के प्रसार को रोका जा सके और लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सार्वजनिक जल स्रोतों में क्लोरीनेशन अभियान तेज किया जाए। जिन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या है वहां तत्काल सफाई अभियान चलाया जाए। साथ ही नालियों की सफाई एवं कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था को भी प्रभावी बनाया जाए।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में नियमित मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे। इन शिविरों में लोगों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी तथा आवश्यक दवाएं निःशुल्क वितरित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त गंभीर मरीजों की पहचान कर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा जाएगा।
सीएमओ ने कहा कि वर्तमान स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन सतर्कता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार न करें और तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें। समय पर जांच और उपचार से बीमारी की गंभीरता को कम किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दिया जाए तथा केवल स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास किया जाए। किसी भी संदिग्ध स्थिति की जानकारी तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों या संबंधित अधिकारियों को दी जाए।
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी, चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, आशा कार्यकर्ता एवं क्षेत्रीय कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी को निर्देश दिया गया कि वे पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। प्रत्येक संदिग्ध मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है तथा नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से स्थिति का आकलन किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य बीमारी के प्रसार को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित करना है ताकि किसी भी प्रकार की गंभीर स्थिति उत्पन्न न हो।
अधिकारियों ने कहा कि सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी व्यवस्थाएं तैयार रखी गई हैं।
निरीक्षण के अंत में सीएमओ ने पुनः दोहराया कि जनस्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीमों से अपेक्षा की कि वे पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करें। साथ ही उन्होंने आम जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन कर ही इस बीमारी से बचाव संभव है।
स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग तथा विभिन्न सहयोगी एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। लोगों को उम्मीद है कि विभाग द्वारा उठाए जा रहे प्रभावी कदमों के परिणामस्वरूप शीघ्र ही स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी और क्षेत्रवासी सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण में जीवनयापन कर सकेंगे।


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