पिथौरागढ़ जिले में स्थित ॐ पर्वत के बारे में आपने खूब पढ़ा-सुना और देखा भी होगा। इस पर्वत के शिखर पर बर्फ की प्राकृतिक संरचना में ॐ की आकृति दिखाई देती है।

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चमोली जिले की नीती घाटी के लपथल क्षेत्र में भी ऐसा ही शिव साधना पर्वत है, जहां भगवान शिव ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं। पर्वत शिखर पर ध्यानावस्थित शिव की आकृति जैसी शिला हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचती है।

निर्जन स्थान पर स्थित शिव का यह दिव्य लोक अब तक देश-दुनिया की नजरों से ओझल था। हालांकि, सीमा क्षेत्र में रहने वाले भेड़ पालक, सेना, आइटीबीपी और सीमा सड़क संगठन के जवान इसके बारे में जानते हैं।

ज्योतिर्मठ से आगे माणा और नीती, चीन सीमा को जाने वाले दो दर्रे हैं। पहले लपथल क्षेत्र तक सड़क मार्ग न होने के कारण यहां सिर्फ सेना, आइटीबीपी, ट्रेकिंग दल, पर्वतारोही व भेड़पालक ही आवाजाही करते थे।

लेकिन, अब सड़क बन जाने से आम नागरिकों के साथ ही पर्यटकों के लिए इनर लाइन परमिट खुल चुके हैं। ऐसे में लपथल के सामने कुमाऊं की ओर दिखने वाली पर्वत शृंखला के मध्य पर्वत पर ध्यान मुद्रा में बनी शिव की आकृति आकर्षण का केंद्र है।

हालांकि, इस पर्वत तक पहुंचना आम लोगों के लिए संभव नहीं है, लेकिन लपथल से इसके दर्शन किए जा सकते हैं।

सीमा क्षेत्र में धार्मिक व पर्यटन गतिविधियों के जानकार अजय भट्ट का कहना है इस पर्वत तक श्रद्धालुओं की पहुंच बनाने की जरूरत है। इससे नीती घाटी में सीमांत वासियों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

मलारी से आगे इनर लाइन परमिट जरूरी

ऋषिकेश तक रेल मार्ग या हवाई मार्ग से आने के बाद 280 किमी दूर ज्योतिर्मठ तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। यहां तहसील प्रशासन इनर लाइन परमिट जारी करता है।

हालांकि, ज्योतिर्मठ से मलारी की 60 किमी की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन इससे आगे सुमना व लपथल जाने के लिए परमिट जरूरी है। मलारी से लपथल की दूरी 58 किमी है।

ये भी खास

  • पार्वती कुंड: लपथल के पास पार्वती कुंड भी है। इस कुंड में पहाड़ों के प्रतिबिंब ऐसे दिखाई देते हैं, मानो जलाशय में ऊंचे हिमालय की पर्वत शृंखलाएं विद्यमान हों।
  • टिम्मरसैंण महादेव: नीती गांव से डेढ़ किमी ऊपर गुफा में टिम्मरसैंण महादेव हैं। इस गुफा में फरवरी में बर्फबारी के बाद बर्फ के तीन से पांच शिवलिंग बनते हैं। गुफा में स्थित शिवलिंग पर पर्वत शृंखला से निकलने वाली जलधारा स्वयं जलाभिषेक करती है।
  • भविष्य बदरी: ज्योतिर्मठ से नीती घाटी के रास्ते में तपोवन के पास भविष्य बदरी धाम है। मान्यता है कि जब ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर में भगवान नृसिंह की बायें हाथ की हथेली टूटकर गिर जाएगी तो गोविंदघाट के पास जय-विजय पर्वत आपस में मिल जाएंगे। तब भगवान नारायण की पूजा भविष्य बदरी धाम में ही होगी।

नीती-मलारी घाटी के सीमावर्ती लपथल क्षेत्र में यात्रा के लिए प्रशासन परमिट दे रहा है। इसके लिए आनलाइन आवेदन किया जा सकता है। पर्यटकों के रहने के लिए मलारी क्षेत्र में होमस्टे और होटल हैं। सीमावर्ती नीती घाटी में वाइब्रेंट विलेज में सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। हाल में ही इस क्षेत्र में नीती अल्ट्रा रेस का आयोजन भी हो चुका है।

– गौरव कुमार, जिलाधिकारी, चमोली


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