मीडिया पर बढ़ते हमले लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी, पत्रकारों को निशाना बनाना किसी भी हाल में उचित नहींहिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | विशेष रिपोर्टअवतार सिंह बिष्ट

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उत्तराखंड,देश में बड़े विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं लगातार चर्चा का विषय बन रही हैं। 20 जुलाई को दिल्ली में हुए सीजेपी के संसद मार्च के दौरान भी कुछ प्रदर्शनकारियों ने मीडिया के प्रति नाराज़गी व्यक्त की और कई पत्रकारों को विरोध का सामना करना पड़ा। इस घटना ने पत्रकारों की सुरक्षा, मीडिया की भूमिका और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मीडिया संस्थान की नीतियों या संपादकीय दृष्टिकोण से असहमति लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार, धमकी या हिंसा लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और उसकी स्वतंत्रता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।
पिछले कुछ वर्षों में नेपाल, बांग्लादेश और भारत सहित कई देशों में आंदोलनों के दौरान मीडिया संस्थानों और पत्रकारों पर हमले देखने को मिले हैं। नेपाल में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रमुख समाचार संस्थान के कार्यालय में आगजनी की घटना सामने आई थी, जबकि बांग्लादेश में भी एक प्रमुख अखबार के कार्यालय पर हमला हुआ था। इन घटनाओं ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए।
दिल्ली की घटना के बाद कई वरिष्ठ पत्रकारों ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी राय रखी। अनेक पत्रकारों ने स्पष्ट कहा कि रिपोर्टर केवल घटनास्थल से तथ्य जुटाने का कार्य करते हैं और उन्हें निशाना बनाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। वहीं कुछ पत्रकारों ने यह भी कहा कि मीडिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों पर गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है।
मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि आज का मीडिया परिदृश्य पहले की तुलना में अधिक ध्रुवीकृत दिखाई देता है। ऐसे माहौल में पत्रकारों के प्रति असहिष्णुता बढ़ना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है। असहमति का समाधान संवाद और तथ्यों के माध्यम से होना चाहिए, न कि धमकी, हिंसा या भय के वातावरण से।
पत्रकार संगठनों ने भी मांग की है कि किसी भी आंदोलन या विरोध-प्रदर्शन के दौरान मीडिया कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव या भय के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स का दृष्टिकोण
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स का मानना है कि लोकतंत्र में सरकार, विपक्ष, मीडिया और जनता—सभी की जवाबदेही है। मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन पत्रकारों पर हमला या उन्हें डराने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है। विचारों का संघर्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, किंतु हिंसा और भय का वातावरण किसी भी सभ्य समाज के हित में नहीं हो सकता।
(यह विशेष रिपोर्ट हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के लिए अवतार सिंह बिष्ट द्वारा तैयार एवं प्रसारित की गई है।)


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